चकबंदी प्रक्रिया में ग्रामीणों की आवाज सुनी गई
गोरखपुर जिले के पीपीगंज तहसील के अंतर्गत थवईपार और रगरगंज गांवों में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ग्रामीणों ने अपनी पुरानी शिकायतें और खातों के बंटवारे से जुड़ी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। बैठक का मकसद चकबंदी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और तेजी से पूरा करना था। ग्रामीणों की ओर से रखी गई शिकायतों को चकबंदी अधिकारी ने गंभीरता से लिया और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया।
बैठक में क्या-क्या मुद्दे उठे?
थवईपार और रगरगंज दोनों ही गांव कृषि प्रधान हैं, जहां ज्यादातर परिवार छोटे-मझोले किसानों के हैं। चकबंदी शुरू होने के बाद ग्रामीणों को कई परेशानियां आईं। बैठक में मुख्य रूप से ये मुद्दे उठे:
- खातों का असमान बंटवारा – कुछ किसानों को उनकी मूल भूमि से दूर या कम उपजाऊ चक मिलने की शिकायत।
- पुरानी सीमांकन में गड़बड़ी – जमाबंदी और लगान रसीद में दर्ज भूमि का वर्तमान स्थिति से मेल न खाना।
- पड़ोसी खातों में विवाद – कई जगहों पर पड़ोसी किसानों के बीच सीमा विवाद, जिससे चकबंदी रुक रही है।
- सिंचाई और सड़क पहुंच – नए चकों में सिंचाई नहर या पक्की सड़क न पहुंचने की समस्या।
- मुआवजा और विस्थापन – कुछ मामलों में सड़क/नहर के लिए भूमि देने वाले किसानों को उचित मुआवजा न मिलने की शिकायत।
ग्रामीणों ने कहा कि चकबंदी से उनकी जमीनें बिखर रही हैं और उत्पादकता प्रभावित हो रही है।
अधिकारियों का आश्वासन और मौजूदगी
बैठक की अध्यक्षता चकबंदी अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने की। उनके साथ तहसीलदार, लेखपाल, पटवारी और अन्य राजस्व अधिकारी मौजूद थे। सुनील कुमार सिंह ने ग्रामीणों की हर शिकायत को ध्यान से सुना और कहा:
“चकबंदी का उद्देश्य किसानों को सुविधाजनक और उपजाऊ भूमि उपलब्ध कराना है। सभी शिकायतों का सर्वेक्षण करवाया जाएगा और 30-45 दिनों के अंदर अधिकांश समस्याओं का निपटारा कर दिया जाएगा।”
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे आपसी सहमति से विवाद सुलझाएं और जहां जरूरत हो, वहां कानूनी प्रक्रिया का पालन करें। अधिकारियों ने यह भी बताया कि चकबंदी के अंतिम चरण में ग्राम सभा की बैठक बुलाई जाएगी, जहां अंतिम चक आवंटन का फैसला लिया जाएगा।
चकबंदी का महत्व और ग्रामीणों की उम्मीद
चकबंदी उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादकता बढ़ाने और भूमि विवाद कम करने की एक पुरानी और प्रभावी योजना है।
पीपीगंज क्षेत्र में यह प्रक्रिया कई सालों से चल रही है और अब अंतिम दौर में है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान होगा और उन्हें बेहतर चक मिलेंगे।
कई किसानों ने कहा कि अगर अधिकारियों ने वादा निभाया तो
चकबंदी से उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और खेती आसान हो जाएगी।
पीपीगंज के थवईपार और रगरगंज गांवों में हुई यह बैठक चकबंदी प्रक्रिया को नई गति देने वाली साबित हुई।
ग्रामीणों की आवाज सुनी गई और अधिकारियों ने समाधान का आश्वासन दिया।
उम्मीद है कि जल्द ही सभी विवाद सुलझेंगे और किसान अपनी भूमि पर खुशी-खुशी खेती कर सकेंगे।
गोरखपुर जिले में चकबंदी जैसी योजनाओं से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
किसानों की समस्याएं सुनना और समाधान करना – सरकार की प्राथमिकता!