कृषि यंत्र खरीदे, लेकिन नहीं मिली सब्सिडी
पूर्वांचल के किसानों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। गोरखपुर और बस्ती मंडल के करीब 250 किसानों की लगभग 2.42 करोड़ रुपये की सब्सिडी का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्होंने सरकार की योजना के तहत कृषि यंत्र खरीदे, लेकिन अब तक अनुदान की राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है।
कर्ज और गिरवी रखे गहनों से खरीदी मशीनें
कई किसानों का कहना है कि कृषि यंत्र खरीदने के लिए उन्होंने बैंक से कर्ज लिया। कुछ किसानों ने तो परिवार की महिलाओं के गहने तक गिरवी रख दिए ताकि आधुनिक कृषि उपकरण खरीद सकें। किसानों को उम्मीद थी कि योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से आर्थिक बोझ कम होगा, लेकिन भुगतान अटकने से वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
2024 से लंबित है मामला
बताया जा रहा है कि यह मामला वर्ष 2024 से जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसानों ने कृषि यंत्र खरीदे थे और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसानों को अब तक सब्सिडी की राशि नहीं मिल सकी है।
किसानों की बढ़ी चिंता
अनुदान का पैसा नहीं मिलने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। जिन किसानों ने उधार लेकर मशीनें खरीदी थीं, उन्हें अब किस्तें चुकाने में परेशानी हो रही है। कई किसानों का कहना है कि सरकार की योजनाओं पर भरोसा करके उन्होंने निवेश किया, लेकिन भुगतान में देरी ने उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है।
कृषि आधुनिकीकरण पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को समय पर सब्सिडी नहीं मिलेगी तो भविष्य में वे सरकारी योजनाओं में भाग लेने से हिचक सकते हैं। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और मशीनों के इस्तेमाल की गति भी प्रभावित हो सकती है। कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन भुगतान में देरी किसानों का भरोसा कमजोर कर सकती है।
प्रशासन से समाधान की उम्मीद
किसानों ने संबंधित विभागों और प्रशासन से जल्द से जल्द भुगतान कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो
कई किसानों पर कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा। किसानों को उम्मीद है कि
शासन स्तर पर हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
कृषि आधारित क्षेत्रों में किसानों की आय सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।
जब किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलता तो
इसका असर स्थानीय बाजारों और ग्रामीण विकास पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि
सब्सिडी भुगतान में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है।
गोरखपुर और बस्ती मंडल के 250 किसानों की 2.42 करोड़ रुपये की सब्सिडी का
अटकना किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। कृषि यंत्र खरीदने के लिए कर्ज और
निजी संसाधनों का सहारा लेने वाले किसान अब अपने हक के
भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। सभी की नजर शासन और प्रशासन पर टिकी है कि
आखिर कब किसानों को उनका बकाया अनुदान मिलेगा।
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