⚠️ सावधान! आपके घर पहुंच रहा मिलावटी मावा? ट्रेनों से रोज 50 कुंतल सप्लाई,

त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार भी तेजी पकड़ लेता है। इसी बीच खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े मिलावटी मावा गिरोह का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह तीन राज्यों में सक्रिय था और रेलवे नेटवर्क के जरिए प्रतिदिन 50 कुंतल से अधिक नकली मावा विभिन्न शहरों तक पहुंचा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था। अधिकारियों ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

ट्रेनों के जरिए रोजाना होती थी 50 कुंतल से ज्यादा नकली मावा की सप्लाई

जांच अधिकारियों के अनुसार गिरोह ने रेलवे परिवहन को सबसे सुरक्षित और सस्ता माध्यम बनाया था। ट्रेनों के जरिए बड़ी मात्रा में नकली मावा एक राज्य से दूसरे राज्य तक भेजा जाता था। प्रतिदिन करीब 50 कुंतल से अधिक मिलावटी मावा अलग-अलग शहरों के थोक बाजारों और मिठाई बनाने वाले कारोबारियों तक पहुंचता था। रेलवे के माध्यम से कम लागत में अधिक माल भेजना आसान होने के कारण गिरोह कई वर्षों से इसी तरीके का इस्तेमाल कर रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा किन शहरों तक इसकी सप्लाई पहुंच रही थी।

ऐसे तैयार किया जाता था नकली मावा, स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक

जांच में खुलासा हुआ कि नकली मावा बनाने के लिए घटिया दूध पाउडर, स्टार्च, रिफाइंड तेल, सिंथेटिक केमिकल और अन्य सस्ते पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद मिश्रण को इस तरह तैयार किया जाता था कि उसका रंग, स्वाद और खुशबू असली मावा जैसी लगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार का मिलावटी मावा स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इसके सेवन से फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, एलर्जी, लीवर और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए इसका खतरा और भी अधिक माना जाता है।

मिठाई की दुकानों तक पहुंचता था नकली मावा, छापेमारी में मिला भारी सामान

जांच एजेंसियों के अनुसार तैयार किया गया नकली मावा थोक व्यापारियों और मिठाई की दुकानों तक पहुंचाया जाता था। कई दुकानदारों को इसकी असलियत की जानकारी नहीं होती थी, जबकि कुछ मामलों में जानबूझकर सस्ते दाम पर नकली मावा खरीदे जाने की भी जांच की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में कई स्थानों से भारी मात्रा में संदिग्ध मावा, पैकिंग सामग्री, मशीनें, रसायन और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। सभी नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिया गया है और पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

उपभोक्ता कैसे रहें सतर्क, प्रशासन की कार्रवाई जारी

विशेषज्ञों की सलाह है कि मावा हमेशा विश्वसनीय और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खरीदें। यदि मावा का रंग, गंध, स्वाद या बनावट सामान्य से अलग दिखाई दे तो उसका सेवन बिल्कुल न करें। अत्यधिक सस्ते दाम पर मिलने वाले बिना ब्रांड और बिना गुणवत्ता प्रमाण वाले उत्पादों से बचें। किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की जानकारी तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग को दें। प्रशासन का कहना है कि इस मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून और अन्य संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा आने वाले दिनों में लगातार छापेमारी अभियान जारी रहेगा।

निष्कर्ष

तीन राज्यों में सक्रिय मिलावटी मावा गिरोह का खुलासा खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चेतावनी है। ट्रेनों के जरिए प्रतिदिन 50 कुंतल से

अधिक नकली मावा की सप्लाई किया जाना लाखों लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में ऐसे गिरोह अधिक सक्रिय हो जाते हैं,

इसलिए उपभोक्ताओं को विशेष सतर्क रहने की आवश्यकता है।

नियमित जांच, सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और लोगों की जागरूकता ही

इस तरह के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

FAQ

1. मिलावटी मावा गिरोह का खुलासा कहां हुआ?

जांच एजेंसियों ने तीन राज्यों में सक्रिय एक बड़े मिलावटी मावा नेटवर्क का खुलासा किया है,

जो ट्रेनों के जरिए नकली मावा की सप्लाई कर रहा था।

2. नकली मावा कैसे तैयार किया जाता था?

इसमें घटिया दूध पाउडर, स्टार्च, रिफाइंड तेल, सिंथेटिक केमिकल और अन्य सस्ते पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता था।

3. मिलावटी मावा खाने से क्या नुकसान हो सकता है?

फूड पॉइजनिंग, पेट संबंधी रोग, एलर्जी, लीवर और किडनी की समस्या सहित कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।

4. असली और नकली मावा की पहचान कैसे करें?

हमेशा विश्वसनीय दुकानों से खरीदें। यदि रंग, गंध, स्वाद या

बनावट असामान्य लगे तो उसका सेवन न करें और संबंधित विभाग को सूचना दें।

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