फर्जी आईडी से युवतियों को जाल में फंसाकर ठगी के मामले में कोर्ट का फैसला, तीनों आरोपी दोषी करार
रायबरेली। फर्जी पहचान और आईडी का इस्तेमाल कर युवतियों से संपर्क करने और कथित तौर पर ठगी करने के मामले में रायबरेली की अदालत ने तीन नाइजीरियाई युवकों को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने प्रत्येक आरोपी को चार वर्ष की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों पर 7-7 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामला पुराना बताया जा रहा है और आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी। प्रकरण में करीब 32 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया था। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने मामले में फैसला सुनाया है।
फर्जी आईडी बनाकर युवतियों से करते थे संपर्क
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी पहचान के जरिए युवतियों से संपर्क स्थापित करने के आरोप लगाए गए थे। बातचीत के माध्यम से भरोसा कायम करने के बाद कथित तौर पर उन्हें अपने जाल में फंसाया जाता था।
इसके बाद अलग-अलग तरीकों से पैसे की मांग अथवा आर्थिक लेनदेन के जरिए ठगी किए जाने का आरोप था। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
32 लाख रुपये की ठगी का आरोप
मामले में तीनों आरोपियों पर करीब 32 लाख रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और प्रकरण को न्यायालय तक पहुंचाया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी माना।
इसके बाद कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी को चार वर्ष के कारावास और 7 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
पांच साल पुराने गैंगस्टर एक्ट मामले से भी जुड़ा प्रकरण
बताया जा रहा है कि यह मामला करीब पांच साल पुराने गैंगस्टर एक्ट से जुड़े प्रकरण से भी संबंधित है। आरोपियों के खिलाफ पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद मामला न्यायालय में पहुंचा।
लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद अब अदालत की ओर से फैसला सुनाया गया है।
मामले में STF और मेरठ पुलिस की कार्रवाई का भी उल्लेख सामने आया है।
ADJ पंचम गैंगस्टर कोर्ट में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई ADJ पंचम गैंगस्टर कोर्ट में हुई। न्यायालय ने मामले में
उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
अदालत के फैसले के बाद फर्जी पहचान बनाकर ऑनलाइन माध्यमों से लोगों को निशाना बनाने वाले मामलों को
लेकर पुलिस कार्रवाई और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सावधान रहने की जरूरत
यह मामला ऑनलाइन संपर्क और आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत को भी सामने लाता है।
सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी अनजान व्यक्ति से संपर्क होने पर उसकी
पहचान और दावों की पुष्टि किए बिना आर्थिक लेनदेन करना नुकसानदायक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन दोस्ती, रिश्ते या किसी अन्य बहाने से पैसे
मांगने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध आर्थिक लेनदेन सामने आता है तो
तत्काल बैंक और संबंधित साइबर अपराध विभाग को इसकी सूचना देना महत्वपूर्ण है।
कोर्ट के फैसले के बाद मामले में आया अहम मोड़
करीब पांच साल पुराने इस मामले में न्यायालय का फैसला सामने आने के
बाद कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। तीनों आरोपियों को
चार-चार साल की सजा और 7-7 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।
फिलहाल यह मामला फर्जी पहचान के जरिए ऑनलाइन संपर्क स्थापित कर
कथित आर्थिक ठगी के आरोपों और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के कारण चर्चा में है।
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