इस समाचार का सार ये है कि नेपाल में भारी बारिश के चलते गोरखपुर-सन्तकबीरनगर क्षेत्र में रोहिन व राप्ती नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँच गया है, जिस कारण उत्तरासोत गाँव सहित कई गाँवों को बाढ़ का खतरा है। ग्रामीण रात-दिन बाँध को बचाने और गाँव की रक्षा के लिए जुटे हैं।
खबर का विस्तृत विवरण
नेपाल में लगातार हो रही बारिश से रोहिन नदी के बाद अब राप्ती नदी भी खतरे के निशान को पार कर गई है। इससे गोरखपुर-सन्तकबीरनगर बॉर्डर के गाँवों में चिंता और भय का माहौल है। उत्तरासोत, गाहसाई, काहिलिया एवं आसपास के गाँवों के सामने बाढ़ का बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रशासन की टीमें, तहसील स्तर के अधिकारी, तथा बचाव दल मौके पर पहुँच चुके हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय लोग रातभर बाँधों की मरम्मत और सुरक्षा में लगे रहे। ग्रामीणों ने खुद मिलकर बाँस-बल्ली का बंधा बनाया है ताकि कटान को रोका जा सके। प्रशासन भी बचाव सामग्री और निर्देशों के साथ मौजूद है।
24 घंटे के भीतर कटान से करीब 400 मीटर बाँध टूटने की आशंका जताई गई है, जिससे उत्तरासोत गाँव समेत करीब 1400 से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं। सन्तकबीरनगर के अधिकारी, राजस्व विभाग, पुलिस और ग्राम प्रधान स्वयं मौके पर लोगों का हौसला बढ़ा रहे हैं।
बाढ़ और कटान का संकट
राप्ती नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि से क्षेत्र के राप्ती व रोहिन नदी के बीच बसे गाँवों में पानी भर गया है। प्रशासन ने गाँव खाली करने के निर्देश दिए हैं मगर ज्यादातर ग्रामीण अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
रात में ग्रामीण और प्रशासन के कर्मचारी मिलकर बंधा बचाने की कोशिश कर रहे हैं। गाँव के पास तटबंध पर लगातार बाँस और लकड़ी से अस्थाई दीवार बनाई जा रही है। तस्वीरें बताती हैं कि लोगों में डर है फिर भी वे बाढ़ से लड़ रहे हैं।
बारिश और बाढ़ के आलम में उत्तरासोत एवं आसपास के गाँव जोखिम में हैं। प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था का भरोसा दिया है। जिले के अधिकारी लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि कटान को रोका जा सके।
गाँवों की स्थिति और प्रशासन की मुस्तैदी
- उत्तरासोत और आसपास के गाँवों में करीब 1400 परिवार जोखिम में हैं।
- बंधा टूटने का डर सबसे ज्यादा उत्तरासोत में है, क्योंकि यहाँ कटान की रफ्तार तेज है।
- ग्रामीणों और बचाव दल ने एक साथ मिलकर रातभर बाँध की मरम्मत की।
- जिला प्रशासन ने राहत व बचाव कार्य तेज कर दिया है।
- गाँव के प्रधान और पुलिस चौकी के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
लोगों की चिंता
ग्रामीणों की चिंता ये है कि अगर बंधा टूट गया तो गाँव में बाढ़ का पानी घुस जाएगा और पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। खाद्यान्न, मवेशी, मकान, सब खतरे में आ जाएँगे।
लोगों का कहना है कि हर साल इस मौसम में बाढ़ आती है लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर है क्योंकि नेपाल में बारिश बहुत ज्यादा हुई है।
प्रशासनिक कदम
- मुख्यमंत्री ने स्थिति की समीक्षा की है।
- बाढ़ कंट्रोल रूम एक्टिव किये गए हैं।
- प्रशासन की टीमें प्रभावित गाँवों में पहुँच गई हैं।
- राहत सामग्री, नाव, बचाव दल और पुलिस तैनात की गई है।
- सभी संवेदनशील गाँवों में सूचना तंत्र मजबूत किया गया है।
राजस्व विभाग, पुलिस, ग्राम पंचायत, प्रधान और जिले के प्रमुख अधिकारी मौके पर हैं। जिलाधिकारी ने हालात देखकर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
तटबंधों की स्थिति
गाहसाई-काहिलिया बंधा सबसे ज्यादा खतरे में है। गाँववालों ने खुद बाँस-बल्ली लगाकर कटान को रोकने की कोशिश की। प्रशासन ने भी रात में बचाव सामग्री उपलब्ध कराई।
जाँच के दौरान पता चला कि कटान बहुत तीव्र है और यदि स्थिति जल्दी न संभली तो पूरा गाँव डूब सकता है।
इलाके के पुराने रिकॉर्ड एवं असर
ब्लॉक बेलघाट, फतेहपुर, कसया आदि जगहों पर भी बाढ़ का असर दिखने लगा है। पुराने रिकॉर्ड के अनुसार राप्ती और रोहिन नदी जब खतरे के निशान के ऊपर जाती हैं तो क्षेत्र में व्यापक जनधन हानि होती है।
सूबे के सरकारी हेलिकॉप्टर और मोटरबोट तैयार रखे गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके।
निष्कर्ष
गोरखपुर-सन्तकबीरनगर बॉर्डर पर बाढ़ का संकट लगातार बढ़ रहा है। NDRF, SDRF, पुलिस और प्रशासन हालात को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहे हैं मगर लोगों का डर और संघर्ष जारी है।
इलाके के सभी गाँववाले, खासकर उत्तरासोत, गहसाई, काहिलिया, लगातार बंधा बचाने में जुटे हुए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि लोगों को सुरक्षित रखा जाए और बाढ़ का असर कम किया जाए।
कुल मिलाकर, नेपाल की भारी बारिश और नदियों का बढ़ता जलस्तर इस क्षेत्र के गाँवों के लिए बड़ा खतरा बन गया है, जिसमें प्रशासन और आम लोग दोनों हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
