सहारनपुर मस्जिद के नीचे मिला पुराना कुआं, ASI टीम ने उतरकर की जांच; 250 साल पुरानी संरचना का अनुमान

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद सामने आई एक पुरानी संरचना ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे एक गहरी कुएं जैसी संरचना मिली थी। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने मौके पर पहुंचकर इसकी बारीकी से जांच की है। टीम के सदस्य संरचना के भीतर भी उतरे और इसकी आंतरिक बनावट तथा इस्तेमाल की गई ईंटों का निरीक्षण किया।

प्रारंभिक आकलन में इस संरचना की उम्र करीब 200 से 250 वर्ष तक होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ASI की विस्तृत जांच और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ही इसकी वास्तविक उम्र और उपयोग के बारे में अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

मलबा हटाने के दौरान सामने आई थी संरचना

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को हटाए जाने के बाद जब मलबा हटाने का काम चल रहा था, उसी दौरान जमीन के नीचे यह संरचना दिखाई दी। शुरुआत में इसे कुएं जैसा बताया गया।

बताया जा रहा है कि संरचना काफी गहराई तक जाती है और इसके अंदर मलबा भी मौजूद है। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुरातत्व विशेषज्ञों को इसकी जांच के लिए बुलाया गया।

कुएं के अंदर उतरी ASI की टीम

ASI की टीम ने केवल बाहर से संरचना को देखने तक अपनी जांच सीमित नहीं रखी। अधिकारियों ने इसके अंदर उतरकर इसकी आंतरिक बनावट का निरीक्षण किया।

रिपोर्ट के मुताबिक टीम ने करीब 15 मिनट तक अंदर रहकर संरचना की स्थिति, दीवारों की बनावट और निर्माण में इस्तेमाल हुई ईंटों को देखा। इस दौरान विशेषज्ञों ने कुछ नमूने भी लिए, ताकि आगे की जांच में इसकी उम्र और निर्माण काल के बारे में अधिक जानकारी हासिल की जा सके।

लखौरी ईंटों ने बढ़ाई ऐतिहासिक महत्व की संभावना

इस संरचना में इस्तेमाल हुई ईंटों को लेकर भी खास चर्चा है। रिपोर्टों में इन्हें लखौरी ईंटें बताया गया है। ऐसी ईंटों का इस्तेमाल उत्तर भारत की कई पुरानी इमारतों और ऐतिहासिक निर्माणों में मिलता है।

इसी वजह से विशेषज्ञ इस संरचना को पुराना मान रहे हैं। हालांकि, सिर्फ ईंटों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि यह किस शासक या किस काल से संबंधित है। इसके लिए पुरातात्विक और वैज्ञानिक जांच जरूरी होगी।

क्या यह 250 साल पुराना कुआं है?

फिलहाल इसकी उम्र को लेकर अनुमान ही सामने आया है। विभिन्न रिपोर्टों में संरचना के करीब 200 से 250 वर्ष पुरानी होने की संभावना जताई गई है।

कुछ चर्चाओं में इसे मुगलकालीन समय से जोड़ने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे अभी

किसी निश्चित ऐतिहासिक काल या शासक से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी।

ASI की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह वास्तव में

कुआं है या किसी अन्य उद्देश्य से बनाई गई प्राचीन संरचना।

संरचना का असली इस्तेमाल क्या था?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जमीन के नीचे मिली

इस संरचना का इस्तेमाल आखिर किस उद्देश्य से किया जाता था।

फिलहाल इसे कुएं जैसी संरचना माना जा रहा है,

लेकिन पुरातत्व विशेषज्ञों को इसके निर्माण की तकनीक,

आकार, गहराई और आसपास की ऐतिहासिक परिस्थितियों का अध्ययन करना होगा।

मलबा पूरी तरह हटने और नमूनों की जांच के बाद इस संबंध में ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है।

सहारनपुर में बढ़ी मामले को लेकर हलचल

मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद सामने आई इस संरचना को लेकर सहारनपुर में राजनीतिक और

सामाजिक चर्चा भी तेज हो गई है। अलग-अलग पक्ष इस खोज को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।

हालांकि, पुरातत्व संबंधी किसी भी निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच पूरी होना जरूरी है।

इसलिए फिलहाल केवल ASI की जांच में सामने आने वाले तथ्यों को ही आधार माना जाना चाहिए।

ASI की रिपोर्ट के बाद साफ होगी तस्वीर

विशेषज्ञों द्वारा संरचना का निरीक्षण किए जाने के बाद अब आगे की

जांच महत्वपूर्ण हो गई है। नमूनों और निर्माण शैली के अध्ययन से इसकी संभावित

उम्र और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मस्जिद के मलबे के नीचे मिली यह संरचना सामान्य निर्माण से

अलग और पुरानी प्रतीत होती है। लेकिन इसका वास्तविक इतिहास क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

निष्कर्ष

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के मलबे के नीचे मिली कुएं जैसी संरचना ने

इतिहास और पुरातत्व से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ASI टीम ने मौके पर

पहुंचकर अंदर उतरकर जांच की है और संरचना से जुड़े नमूने भी लिए हैं।

इसकी उम्र करीब 200 से 250 वर्ष होने का प्रारंभिक अनुमान सामने आया है, लेकिन

इसे अभी अंतिम ऐतिहासिक प्रमाण नहीं माना जा सकता। आगे की पुरातात्विक जांच से ही

इस संरचना के निर्माण काल और वास्तविक उपयोग का खुलासा होगा।

Fisherman World News की हर बड़ी और जरूरी खबर

सबसे पहले पाने के लिए बेल आइकन दबाएं और ‘All/सभी’ विकल्प जरूर चुनें।

read this post :अंबेडकरनगर में भीषण सड़क हादसा: स्कूल बस ने बाइक को मारी टक्कर, दंपती और बेटे की मौत