गोरखपुर और आसपास के इलाकों में नेपाल में भारी बारिश के कारण राप्ती नदी में कटान बहुत तेज हो गया है और बाढ़ के खतरे के चलते मलाव सहित कई इलाकों में संकट गहरा गया है।
खबर का विस्तार
गोरखपुर, महराजगंज और बलरामपुर जैसे जिलों में नेपाल की सीमावर्ती नदियों में जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। नेपाल में लगातार बारिश के कारण राप्ती और रोहिन नदी का पानी कई स्थानों पर खतरे के निशान के बहुत करीब पहुँच चुका है। सिंचाई विभाग के मुताबिक, राप्ती नदी के जलस्तर में पिछले 24-48 घंटों में एक से डेढ़ मीटर तक वृद्धि देखी गई है और खतरे की स्थिति बनी हुई है। मलाव ब्लॉक सहित दर्जनों गांवों के पास नदी के किनारों पर कटान तेज हो रहा है, जिसकी वजह से दर्जनों घर व खेत नदी में समा चुके हैं।
आपदा और राहत कार्य
इन्हीं हालातों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आपातकालीन तैयारी शुरू कर दी है। विभिन्न इलाकों में 22 नावों को तैनात किया गया है, जिससे कि प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को निकाला जाए। बांधों और नदियों के किनारे बचाव चौकियाँ स्थापित की गई हैं, साथ ही मेडिकल, पुलिस और अन्य विभागों को अलर्ट कर दिया गया है। स्कूल, पंचायत भवन और अस्पतालों तक पानी पहुँच गया है, जिससे स्थानीय जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गांवों में हालात
बांधों के किनारे बसे गांवों जैसे मधवापुर, चौकाकला, गंगाबक्श भागड़, टेंगनहिया, बेला व कोड़री में सैकड़ों बीघे जमीन नदी द्वारा काटी जा चुकी है। कुछ स्थानों पर 20 से अधिक घर नदी में समा गए और भारी नुकसान हुआ है। गांवों तक ट्रैक्टर-ट्राली तक पहुँचना असंभव हो गया है, लोग नाव से परिवहन कर रहे हैं। शरणार्थी शिविर बनाए गए हैं, जहां लोगों को राहत दी जा रही है।
बाढ़ की विभीषिका
जिन इलाकों में बाढ़ का असर सबसे ज्यादा है, वहाँ प्रशासन लगातार गाँवों का निरीक्षण कर रहा है। गांवों में राहत सामग्री, दवाओं और जरूरी सामान की सप्लाई की जा रही है। प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात है और जरूरी जगहों पर नावें उपलब्ध हैं। पानी का बहाव इतना तेज है कि कई जगह सड़कें और रास्ते बंद हो गए हैं, लाखों लोगों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित है।
सजगता और प्रशासन की पहल
प्रशासन द्वारा बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय कर दिया गया है और कर्मचारी 8-8 घंटे की शिफ्ट में तैनात किए गए हैं। तीनों तहसीलों के डीएम, एसडीएम, क्षेत्रीय लेखपाल और ग्राम प्रधान लगातार निगरानी कर रहे हैं तथा किसी भी आपात स्थिति में फौरन राहत पहुँचाने की व्यवस्था की गई है।
धार्मिक स्थल भी प्रभावित
बांसगांव क्षेत्र का माता मंदिर, मलाव के इलाके और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक भी नदी का पानी पहुँच गया है, जिससे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को दिक्कतें हुई हैं।
