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लखनऊ/नोएडा: उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण से जुड़े करीब 4,000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में 1997 बैच के वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। हरीश चंद्र नोएडा प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात रह चुके हैं। शासन के अनुसार, उनके खिलाफ विभागीय जांच में जमीन के लीजबैक से संबंधित गंभीर अनियमितताओं के आरोप साबित हुए।
जमीन लीजबैक मामले में क्या है आरोप?
विभागीय जांच के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण के अधीन सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 से जुड़ी 3,81,527 वर्गमीटर जमीन के लीजबैक में नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए थे। जांच में करीब 4,00,447 वर्गमीटर जमीन का मूल्य लगभग 4,000 करोड़ रुपये बताया गया।
किसानों के लिए निर्धारित थी लीजबैक सुविधा
जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, लीजबैक की सुविधा संबंधित गांव के पात्र स्थानीय निवासियों के लिए थी और एक परिवार के लिए अधिकतम 450 वर्गमीटर जमीन का प्रावधान बताया गया था।
आरोप यह था कि कुछ बाहरी लोगों और निजी कंपनियों के पक्ष में भी बड़े भूखंडों का लीजबैक किया गया।
किसानों के लिए निर्धारित थी लीजबैक सुविधा
जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, लीजबैक की सुविधा संबंधित गांव के पात्र स्थानीय निवासियों के लिए थी।
एक परिवार के लिए अधिकतम 450 वर्गमीटर जमीन का प्रावधान बताया गया था।
आरोप यह था कि कुछ बाहरी लोगों और निजी कंपनियों के पक्ष में भी बड़े भूखंडों का लीजबैक किया गया।
जांच और बर्खास्तगी की प्रक्रिया
इस मामले में विभागीय कार्रवाई वर्ष 2013 में शुरू हुई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 3 सितंबर 2026 के फैसले में इस मामले से संबंधित विभागीय कार्यवाही और उसके कानूनी पहलुओं पर विचार किया।
बाद में शासन ने विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद हरीश चंद्र की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया।
वर्तमान तैनाती
बर्खास्तगी के समय हरीश चंद्र पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के रूप में तैनात बताए गए हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
यह खबर विभागीय जांच, शासन के आदेश और न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों पर आधारित है।
आरोपों और जांच में सामने आए निष्कर्षों को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।