उत्तर प्रदेश में फर्जी FASTag और कूटरचित वाहन नंबर के जरिए टोल राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी के सामने अब तक 142 ऐसे वाहनों की जानकारी सामने आई है, जिनके जरिए फर्जीवाड़े का इस्तेमाल कर टोल पार करने की बात सामने आई है। शुरुआती आकलन में सरकारी राजस्व को पांच करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगने की बात सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद यह रकम और बढ़ सकती है।
फर्जी FASTag के जरिए कैसे किया जा रहा था खेल?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर असली वाहन की जगह दूसरे वाहन के नंबर पर FASTag तैयार करवाता था। इसके लिए कूटरचित दस्तावेजों और फर्जी वाहन नंबर का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
इस व्यवस्था के जरिए टोल प्लाजा पर वाहन की पहचान और FASTag रिकॉर्ड में अंतर पैदा किया जाता था। साथ ही ऑनलाइन चालान से बचने के लिए भी कथित तौर पर फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया जाता था।
142 वाहनों की पहचान, करोड़ों के नुकसान का अनुमान
जांच में अब तक 142 वाहनों को चिह्नित किया गया है। इन वाहनों ने संबंधित टोल प्लाजा से कई बार आवाजाही की। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पांच करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का शुरुआती अनुमान लगाया गया है।
अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन वाहनों ने कुल कितनी बार टोल पार किया और प्रत्येक यात्रा में कितने राजस्व का नुकसान हुआ। पुराने सर्वर और DVR डेटा की जांच के बाद तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
STF ने टोल प्लाजा से सर्वर और DVR किए जब्त
मामले की जांच कर रही STF ने लखनऊ-सीतापुर मार्ग स्थित इटौंजा टोल प्लाजा पर कार्रवाई करते हुए सर्वर, CCTV रिकॉर्डिंग वाले DVR और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं।
जांच एजेंसी को टोल संचालन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में देरी के बाद अदालत से अनुमति लेकर यह कार्रवाई की गई। अब जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की आशंका
जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आने की बात कही गई है, जिनसे यह आशंका पैदा हुई है कि
मामले से जुड़े सबूतों को हटाने के लिए CCTV फुटेज में छेड़छाड़ की गई हो सकती है।
हालांकि यह अभी जांच का विषय है। DVR और सर्वर से पुराने डेटा को रिकवर किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्डिंग के साथ वास्तव में कोई छेड़छाड़ हुई थी या नहीं।
अप्रैल में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में लखनऊ के सरोजनीनगर थाने में 3 अप्रैल 2026 को FIR दर्ज की गई थी। शिकायत फर्जी वाहन नंबर और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर FASTag बनवाकर टोल पार करने से जुड़ी थी। बाद में मामले की जांच STF को सौंप दी गई।
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी, जांच जारी
जांच के दौरान STF ने मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की है। इनमें वाहन मालिकों से जुड़े लोगों के साथ
FASTag तैयार कराने में कथित रूप से मदद करने वाले लोग भी शामिल बताए गए हैं।
जांच एजेंसी अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और टोल रिकॉर्ड की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
टोल सिस्टम और रिकॉर्ड की जांच पर जोर
अब जांच का मुख्य फोकस पुराने FASTag लेन-देन, वाहन आवाजाही,
CCTV रिकॉर्डिंग और सर्वर डेटा को आपस में मिलाने पर है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि
फर्जी नंबर वाले वाहनों ने कितनी बार टोल पार किया और
उससे वास्तविक राजस्व नुकसान कितना हुआ।
जांच पूरी होने के बाद मामले में शामिल लोगों की भूमिका और कथित
फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क सामने आने की उम्मीद है।
FAQ: यूपी फर्जी FASTag घोटाला
यूपी में फर्जी FASTag मामले में कितने वाहन चिह्नित हुए हैं?
जांच में अब तक 142 वाहनों को चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फर्जी FASTag मामले में कितने रुपये के नुकसान का अनुमान है?
प्रारंभिक आकलन में पांच करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान की बात सामने आई है।
अंतिम रकम जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
क्या CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की गई थी?
CCTV फुटेज से छेड़छाड़ की आशंका जांच में सामने आई है। इसकी पुष्टि के लिए
DVR और सर्वर के पुराने डेटा को रिकवर और फोरेंसिक तरीके से जांचा जा रहा है।
STF ने क्या-क्या जब्त किया है?
STF ने टोल प्लाजा से सर्वर, CCTV DVR और टोल संचालन से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।
फर्जी FASTag का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था?
प्रारंभिक जांच के मुताबिक फर्जी वाहन नंबर और FASTag के जरिए टोल भुगतान से बचने तथा
ऑनलाइन चालान से बचने की कोशिश की जा रही थी।
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