अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी चोरी और कथित गबन के मामले में अदालत में आरोपियों की जमानत अर्जियों पर सुनवाई का सिलसिला जारी है। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत ने सोमवार को तीन आरोपियों रमा शंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव और अविनाश शुक्ला की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।
अब मामले में जेल में बंद अन्य आरोपियों की जमानत अर्जियों पर अलग-अलग तारीखों में सुनवाई होनी है। अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की जमानत अर्जी पर 22 सितंबर को सुनवाई निर्धारित थी, जबकि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव की अर्जियों पर 23 सितंबर को सुनवाई तय की गई है।
तीन आरोपियों को अदालत से नहीं मिली राहत
विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा की अदालत में सोमवार को रमा शंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव और अविनाश शुक्ला की जमानत अर्जियों पर सुनवाई हुई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर जमानत का विरोध किया था।
इन तीनों आरोपियों की जमानत अर्जियां 5 सितंबर 2026 को दाखिल की गई थीं। इसके बाद मामले में कई तारीखों पर सुनवाई हुई और आवश्यक रिपोर्ट तथा केस डायरी से संबंधित प्रक्रिया के कारण सुनवाई आगे बढ़ती रही।
आज अनुकल्प, लवकुश और करुणेश की जमानत पर सुनवाई
मामले में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की जमानत अर्जियों पर 22 सितंबर को सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित था। इन तीनों की ओर से भी 5 सितंबर को जमानत प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया था।
इन अर्जियों पर पहले भी सुनवाई टल चुकी है। अदालत ने जांच से संबंधित रिपोर्ट और केस डायरी उपलब्ध कराने के लिए विवेचक से जानकारी मांगी थी। अभियोजन पक्ष की ओर से समय मांगे जाने के बाद सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाई गई थी।
रामशंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव की सुनवाई 23 सितंबर को
मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की जमानत अर्जियों पर सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख निर्धारित है।
इन दोनों मामलों में भी अभियोजन पक्ष को अपनी आपत्ति और जांच संबंधी रिपोर्ट दाखिल करने का अवसर दिया गया है। इससे पहले सुनवाई के दौरान विवेचक की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण अदालत ने अभियोजन को अंतिम अवसर देते हुए अगली तारीख तय की थी।
आठ आरोपियों की जमानत अर्जियां दाखिल
इस मामले में कुल आठ आरोपियों की जमानत अर्जियां 5 सितंबर को अदालत में प्रस्तुत की गई थीं। इनमें—
- रमा शंकर मिश्रा
- मनीष कुमार यादव
- अविनाश शुक्ला
- अनुकल्प मिश्रा
- लवकुश मिश्रा
- करुणेश पांडेय
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
- सुभाष श्रीवास्तव
शामिल हैं।
इन सभी की अर्जियों पर एक साथ फैसला नहीं हुआ है। अदालत ने अलग-अलग आरोपियों की अर्जियों पर अलग तारीखों में सुनवाई की है।
25 जून को हुई थी गिरफ्तारियां
उपलब्ध अदालती घटनाक्रम के अनुसार इस मामले में आठ आरोपियों को 25 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सोमवार तक उनकी न्यायिक अभिरक्षा कई बार बढ़ाई जा चुकी थी।
मामले की जांच विशेष जांच दल यानी SIT द्वारा किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। यह जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित व्यवस्था के तहत चल रही है।
अभियोजन ने क्या दलील दी?
जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की भूमिका और जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला दिया। उपलब्ध रिपोर्टों में अभियोजन की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में कथित चोरी और गबन की घटनाएं एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत की गईं।
हालांकि, ये अभियोजन पक्ष के आरोप और अदालत में रखी गई दलीलें हैं। मामले में आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
*बचाव पक्ष ने अदालत में क्या कहा?
बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों की जमानत के समर्थन में विभिन्न कानूनी तर्क रखे गए।
एक प्रमुख तर्क यह था कि आरोपी लोक सेवक नहीं हैं और इसलिए भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत लगाए गए
आरोपों के संबंध में कानूनी आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
बचाव पक्ष ने जांच और बरामदगी से जुड़े बिंदुओं पर भी सवाल उठाए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तीन आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।
मामले में आगे क्या होगा?
अब अदालत के सामने बाकी आरोपियों की जमानत अर्जियों पर सुनवाई का क्रम जारी है।
22 सितंबर को अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की अर्जियों पर सुनवाई निर्धारित थी,
जबकि 23 सितंबर को रामशंकर यादव और सुभाष श्रीवास्तव की अर्जियां सूचीबद्ध हैं।
इन सुनवाइयों के दौरान अदालत अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों के साथ
जांच से संबंधित दस्तावेजों और रिपोर्टों पर भी विचार करेगी।
जमानत खारिज होने का क्या मतलब है?
किसी आरोपी की जमानत अर्जी खारिज होने का अर्थ यह है कि संबंधित अदालत ने
उस चरण पर आरोपी को जमानत देने से इनकार किया है। इससे मामले में आरोप सिद्ध नहीं हो जाते।
अंतिम दोष या निर्दोषता का निर्णय मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
इसी तरह अन्य आरोपियों की जमानत अर्जियों पर भी अदालत अलग-अलग तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर निर्णय लेगी।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में अब तक का घटनाक्रम
5 सितंबर: आठ आरोपियों की ओर से जमानत अर्जियां दाखिल की गईं।
11 और 16 सितंबर: कुछ अर्जियों पर सुनवाई आगे बढ़ी और जांच संबंधी रिपोर्ट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी रही।
21 सितंबर: रमा शंकर मिश्रा, मनीष कुमार यादव और अविनाश शुक्ला की जमानत अर्जियां अदालत ने खारिज कर दीं।
22 सितंबर: अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की जमानत अर्जियों पर सुनवाई निर्धारित थी।
23 सितंबर: रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव की जमानत अर्जियों पर सुनवाई निर्धारित है।
निष्कर्ष
अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े चोरी और कथित गबन मामले में
अदालत की कार्यवाही जारी है। सोमवार को तीन आरोपियों रमा शंकर मिश्रा,
मनीष कुमार यादव और अविनाश शुक्ला को जमानत नहीं मिली।
वहीं बाकी आरोपियों की अर्जियों पर अलग-अलग तारीखों में सुनवाई हो रही है।
अब 22 और 23 सितंबर की सुनवाई मामले के अगले कानूनी घटनाक्रम के
लिहाज से महत्वपूर्ण है। अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा कि अन्य
आरोपियों को जमानत मिलती है या उनकी न्यायिक हिरासत आगे जारी रहती है।
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