उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां नसबंदी ऑपरेशन के बावजूद एक महिला गर्भवती हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला पहले से ही चार बच्चों की मां है और आर्थिक रूप से कमजोर है। ऐसे में यह घटना उसके लिए एक बड़ी परेशानी बन गई है। महिला ने अब एसडीएम से शिकायत कर न्याय और सरकारी मुआवजे की मांग की है।
नसबंदी के बाद भी गर्भवती: कैसे हुआ पूरा मामला?
महिला ने बताया कि उसने 19 जनवरी 2021 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर में लैप्रोस्कोपिक विधि से नसबंदी कराई थी। ऑपरेशन के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अचानक उसे गर्भावस्था के लक्षण महसूस हुए। पहले तो उसे विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब जांच कराई गई तो मामला गंभीर निकला।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट ने खोली पोल
5 अप्रैल को महिला ने आंवला के एक निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया, जहां डॉक्टर ने गर्भ होने की पुष्टि की। इसके बाद 7 अप्रैल को जिला अस्पताल में दोबारा जांच कराई गई, जिसमें डॉक्टरों ने महिला को 6 महीने 6 दिन की गर्भवती बताया। यह सुनकर महिला और उसका परिवार पूरी तरह से हैरान रह गया।
❌ अस्पताल ने रिपोर्ट मानने से किया इनकार
महिला ने जब नसबंदी करने वाले अस्पताल में दोनों रिपोर्ट दिखाईं, तो वहां के डॉक्टरों ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया। न तो किसी तरह की जांच की गई और न ही महिला को कोई सहायता दी गई। इससे महिला और अधिक परेशान हो गई।
मुआवजा भी नहीं मिला, बढ़ी परेशानी
सरकारी नियमों के अनुसार यदि नसबंदी के बाद महिला गर्भवती होती है, तो उसे 30,000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है। लेकिन पीड़िता का आरोप है कि उसे अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। वह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है।
गरीबी में बढ़ा संकट
महिला के चार बच्चे हैं—तीन बेटे और एक बेटी। पति मजदूरी कर किसी तरह परिवार चलाता है। ऐसे में पांचवें बच्चे का जन्म उनके लिए आर्थिक संकट को और गहरा कर सकता है।
एसडीएम से लगाई न्याय की गुहार
परेशान होकर महिला ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उसने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और उसे उचित मुआवजा दिया जाए।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और नसबंदी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। अगर समय रहते इस तरह के मामलों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से उठ सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, नसबंदी 100% सुरक्षित नहीं होती, लेकिन इस तरह के मामलों में उचित जांच और मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है।
बरेली का यह मामला सिर्फ एक महिला की समस्या नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को न्याय दिलाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।
