गोरखपुर के रामगढ़ताल में
घटना का खुलासा: अचानक मरी हजारों मछलियां
गोरखपुर शहर की शान रामगढ़ताल में हाल ही में बड़ी संख्या में मछलियां मर गईं। शुक्रवार और शनिवार को ताल के किनारे रोहू, भाकुर समेत अन्य प्रजातियों की मरी मछलियां तैरती मिलीं। मत्स्यजीवी सहकारी समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह घटना अचानक हुई। ताल में पानी का स्तर कम होने और तल गरम होने से समस्या बढ़ी।
मछली पालकों को 40-50 लाख रुपये का नुकसान हुआ। ताल से बदबू आने लगी, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी हुई। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में घुलित ऑक्सीजन की कमी मुख्य कारण है। बारिश के बाद तेज धूप से ऑक्सीजन लेवल गिर गया, जिससे जलीय जीव प्रभावित हुए।
GDA की त्वरित कार्रवाई: पानी की गुणवत्ता जांच के निर्देश
मछलियों की मौत की सूचना मिलते ही गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) हरकत में आ गया। उपाध्यक्ष आनंद वर्धन और सचिव यूपी सिंह ने खुद रामगढ़ताल का निरीक्षण किया। उन्होंने ताल के पानी की गुणवत्ता जांच के सख्त निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच सौंपी गई। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि ऑक्सीजन की कमी से मछलियां मर रही हैं। GDA ने दोषियों पर एक्शन की बात कही। गंदगी फैलाने वालों और प्रदूषण बढ़ाने वाले स्रोतों की पहचान होगी।
सफाई और निगरानी: 5 सदस्यीय कमेटी गठित
GDA ने सफाई के लिए विशेष कमेटी बनाने का फैसला किया। 5 सदस्यीय यह कमेटी रोजाना रामगढ़ताल की निगरानी करेगी। ताल से मरी मछलियां निकाल ली गईं और शनिवार को सफाई कराई गई। अब बदबू कम हो गई है।
कमेटी विस्तृत कार्ययोजना बनाएगी। इसमें नियमित सफाई, पानी की जांच,
प्रदूषण रोकथाम और ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के उपाय शामिल होंगे।
80 MLD गंदा पानी गिर रहा है, लेकिन सफाई केवल 50 MLD की हो रही है।
कमेटी इस गैप को भरने पर फोकस करेगी।
रामगढ़ताल का महत्व और चुनौतियां
रामगढ़ताल गोरखपुर का सबसे बड़ा तालाब है, क्षेत्रफल 723 हेक्टेयर। यह पर्यटन और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है।
लेकिन प्रदूषण, सीवेज और औद्योगिक कचरा से समस्या बनी हुई है। पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं।
GDA और जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहे हैं।
एनजीटी के दिशानिर्देशों के तहत 500 मीटर दायरे में निर्माण पर रोक है। योगी सरकार ने
ताल को मरीन ड्राइव जैसा बनाने की योजना बनाई है। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण जरूरी है।
समाज के लिए संदेश: जागरूकता और संरक्षण जरूरी
यह घटना पर्यावरण संरक्षण की चेतावनी है। तालाब शहर की फेफड़े हैं, इन्हें स्वच्छ रखना सबकी जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोग, मछली पालक और प्रशासन मिलकर काम करें।
नियमित जांच, सफाई और प्रदूषण रोकथाम से रामगढ़ताल फिर से सुंदर बनेगा।
GDA की यह पहल सराहनीय है। उम्मीद है कि कमेटी के प्रयासों से भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी।
रामगढ़ताल गोरखपुर की पहचान बने रहेगा।