विवेक तिवारी हत्याकांड: चश्मदीद के बयान से फिर चर्चा में आई 2018 की वह रात, कोर्ट ने एक सिपाही को दोषी ठहराया

एप्पल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की 2018 में हुई मौत का मामला करीब आठ साल बाद फिर चर्चा में है। 17 सितंबर 2026 को लखनऊ की अदालत ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया, जबकि दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। दोषी की सजा की अवधि पर अदालत 21 सितंबर को फैसला सुनाएगी।

इस मामले में विवेक तिवारी के साथ कार में मौजूद उनकी सहकर्मी सना प्रमुख चश्मदीद गवाह थीं। उनके पुराने बयान में घटना की परिस्थितियों और गोली चलने से पहले पुलिसकर्मियों की बाइक और एसयूवी के बीच हुई टक्कर का उल्लेख किया गया था।

28 सितंबर 2018 की रात क्या हुआ था?

घटना 28 सितंबर 2018 की देर रात लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में हुई थी। विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना को घर छोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उनकी एसयूवी को रोकने का प्रयास किया।

अदालती मामले में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस की बाइक और विवेक की एसयूवी के बीच टक्कर के बाद गोली चली। गोली लगने के बाद विवेक कार लेकर आगे बढ़े, लेकिन शहीद पथ अंडरपास के पास वाहन अनियंत्रित होकर एक खंभे से टकरा गया।

चश्मदीद सना ने क्या बताया था?

सना के बयान के अनुसार पुलिसकर्मी एसयूवी को रोकने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने बताया था कि पुलिस की बाइक कार के सामने आ गई थी और विवेक ने उससे बचकर निकलने की कोशिश की। इसी दौरान बाइक कार से टकराई और इसके बाद गोली चली।

सना के मुताबिक गोली लगने के बाद विवेक ने कार आगे बढ़ाई और मदद की कोशिश की गई। बाद में दुर्घटनाग्रस्त वाहन से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

यह बयान मामले की अभियोजन कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। हालांकि आरोपी पक्ष की ओर से गोली चलने की परिस्थितियों को लेकर अलग दावा किया गया था।

आरोपी सिपाही ने आत्मरक्षा की बात कही थी

मामले में प्रशांत चौधरी ने अपने बचाव में कहा था कि विवेक की कार ने उनकी बाइक को टक्कर मारी और उन्हें वाहन से कुचले जाने का खतरा था। उनका दावा था कि उन्होंने चेतावनी देने के लिए पिस्तौल निकाली थी और गोली चलना जानबूझकर नहीं हुआ।

वहीं पुलिस की जांच और अभियोजन की ओर से इस दावे को स्वीकार नहीं किया गया और मामला अदालत तक पहुंचा। अदालत ने अब प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना है।

अस्पताल पहुंचने में लगा समय

गोली लगने के बाद विवेक तिवारी की कार शहीद पथ अंडरपास के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें रात करीब 2:05 बजे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु का समय करीब 2:25 बजे दर्ज है।

डॉक्टरों ने उपचार का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।

मामले की जांच के लिए बनी थी SIT

घटना के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी SIT गठित की गई थी। इसके अलावा मजिस्ट्रियल जांच भी हुई।

मजिस्ट्रियल जांच में दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों, चश्मदीद सना, विवेक की पत्नी कल्पना और घटना के बाद मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए थे। बाद में पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

पिस्तौल और प्रशिक्षण को लेकर भी उठे थे सवाल

मजिस्ट्रियल जांच के दौरान प्रशांत चौधरी को पिस्तौल दिए जाने और उनके हथियार प्रशिक्षण से संबंधित सवाल भी सामने आए थे। रिपोर्ट में उनके द्वारा हथियार चलाने का प्रशिक्षण नहीं मिलने संबंधी बयान का उल्लेख किया गया था।

यह पहलू भी मामले की जांच के दौरान चर्चा में रहा।

आठ साल बाद आया अदालत का फैसला

इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 17 सितंबर 2026 को अदालत ने फैसला सुनाया। प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना गया, जबकि संदीप कुमार को साक्ष्यों के

अभाव में बरी कर दिया गया। दोषी की सजा पर फैसला 21 सितंबर को सुनाया जाना है।

विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने फैसले पर असंतोष जताया और ऊपरी अदालत में

अपील करने की बात कही है। यह उनकी प्रतिक्रिया है; आगे की कानूनी प्रक्रिया में मामला बदल सकता है।

विवेक तिवारी केस की टाइमलाइन

  • 28 सितंबर 2018: गोमतीनगर में विवेक तिवारी को गोली लगी।
  • 29 सितंबर 2018: दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
  • 2 अक्टूबर 2018: SIT ने घटनास्थल का पुनर्निर्माण किया।
  • 4 अक्टूबर 2018: चश्मदीद सना का बयान दर्ज हुआ।
  • 19 दिसंबर 2018: पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया।
  • 17 सितंबर 2026: प्रशांत चौधरी दोषी करार, संदीप कुमार बरी।
  • 21 सितंबर 2026: प्रशांत चौधरी की सजा पर अदालत का फैसला प्रस्तावित है।

अब आगे क्या होगा?

अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण सजा का निर्धारण है।

21 सितंबर को अदालत प्रशांत चौधरी को दी जाने वाली सजा पर फैसला करेगी। दूसरी ओर,

संदीप कुमार के बरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित पक्षों के फैसले पर निर्भर करेगी।

निष्कर्ष

विवेक तिवारी मामला 2018 की उस घटना से जुड़ा है जिसमें गोमतीनगर में पुलिसकर्मियों द्वारा

रोकने के प्रयास के दौरान उनकी एसयूवी और पुलिस बाइक के बीच टक्कर हुई और गोली चली।

उनकी सहकर्मी सना इस मामले की प्रमुख चश्मदीद रहीं। करीब आठ साल बाद अदालत ने

प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी और संदीप कुमार को साक्ष्यों के

अभाव में बरी किया है। अब 21 सितंबर को दोषी की सजा पर फैसला होना है।

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FAQ

Q1. विवेक तिवारी की मौत कब हुई थी?
उत्तर: विवेक तिवारी की मौत सितंबर 2018 में लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में गोली लगने के बाद हुई थी।

Q2. विवेक तिवारी के साथ कार में कौन था?
उत्तर: घटना के समय उनकी सहकर्मी सना कार में मौजूद थीं और वह मामले की प्रमुख चश्मदीद गवाह बनीं।

Q3. अदालत ने 2026 में क्या फैसला दिया?
उत्तर: अदालत ने प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और

संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

Q4. प्रशांत चौधरी की सजा पर फैसला कब होगा?
उत्तर: अदालत ने सजा की अवधि पर फैसला 21 सितंबर 2026 को सुनाने की तारीख तय की है।

Q5. चश्मदीद सना ने घटना के बारे में क्या बताया था?
उत्तर: उनके बयान के अनुसार पुलिस की बाइक एसयूवी के सामने आई,

दोनों वाहनों में टक्कर हुई और उसके बाद गोली चली।

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