UPI Charges 2026: UPI भुगतान को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी UPI भुगतानों पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के केंद्र के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI से इस व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है। संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से क्यों किया इनकार?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में नए MDR ढांचे को चुनौती दी गई थी और सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम रोक की मांग की गई। अदालत ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
हालांकि, तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार से MDR व्यवस्था के कानूनी आधार और इसके स्वरूप को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने केंद्र, RBI और NPCI को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR ढांचा
मौजूदा सरकारी ढांचे के अनुसार निर्दिष्ट Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन में 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर MDR लागू होगा। सामान्य श्रेणी के लिए दर 0.4 प्रतिशत रखी गई है और 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर यह अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगी। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने वाली है।
हालांकि सभी UPI भुगतानों पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
आम लोगों के UPI भुगतान पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं लगाया गया है।
इसी तरह 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान और कुछ छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अब हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा।
किन क्षेत्रों में अलग MDR व्यवस्था है?
सरकार द्वारा घोषित ढांचे में कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे निर्दिष्ट क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों तथा स्टॉक ब्रोकर और डीलर के माध्यम से होने वाले निर्दिष्ट भुगतानों के लिए 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान बताया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
MDR क्या होता है?
Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया में व्यापारी भुगतान से जुड़े भुगतान तंत्र के विभिन्न हिस्सेदारों के बीच वितरित किया जाता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया MDR सरकार या NPCI द्वारा सीधे वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। इसके तहत प्राप्त राशि भुगतान प्रणाली से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच वितरित होती है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल क्या हैं?
सुनवाई के दौरान अदालत ने नए MDR ढांचे के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। अदालत यह जानना चाहती है कि इस व्यवस्था का कानूनी आधार क्या है और प्रस्तावित भुगतान का स्वरूप किस प्रकार निर्धारित किया गया है।
केंद्र सरकार को अपने जवाब में इस संबंध में विस्तृत स्थिति स्पष्ट करनी होगी। RBI और NPCI से भी जवाब मांगा गया है।
व्यापारियों पर क्या असर पड़ सकता है?
नया ढांचा मुख्य रूप से निर्दिष्ट व्यापारी लेनदेन से जुड़ा है। इसलिए पात्र सीमा से ऊपर के भुगतान स्वीकार करने वाले कुछ व्यापारियों और भुगतान प्रणाली से जुड़े संस्थानों पर इसका आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि किसी व्यापारी पर वास्तविक लागत किस तरह पड़ेगी, यह भुगतान व्यवस्था, संबंधित श्रेणी और MDR के वितरण तंत्र पर निर्भर करेगा। सरकार का कहना है कि सामान्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लेनदेन शुल्क नहीं लगाया गया है।
UPI शुल्क पर आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल MDR व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई है। इसलिए
15 अक्टूबर से प्रस्तावित ढांचा कानूनी चुनौती के बीच आगे बढ़ सकता है,
जब तक अदालत या सरकार की ओर से कोई नया आदेश या बदलाव नहीं आता।
अब केंद्र सरकार, RBI और NPCI को चार सप्ताह के भीतर
अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद मामले की आगे सुनवाई होगी।
UPI MDR विवाद: एक नजर में
- मामला: UPI पर MDR लागू करने को चुनौती
- सीमा: निर्दिष्ट व्यापारी भुगतान में 2,000 रुपये से अधिक
- सामान्य MDR: 0.4 प्रतिशत
- अधिकतम MDR: 300 रुपये
- प्रस्तावित लागू तारीख: 15 अक्टूबर 2026
- P2P भुगतान: MDR से बाहर
- 2,000 रुपये तक के पात्र व्यापारी भुगतान: शुल्क से बाहर
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अंतरिम रोक से इनकार
- अगला कदम: केंद्र, RBI और NPCI को चार सप्ताह में जवाब देना है
निष्कर्ष
UPI MDR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है,
लेकिन मामले की कानूनी और तकनीकी स्थिति पर केंद्र, RBI और NPCI से जवाब मांगा है।
नए ढांचे के तहत सभी UPI भुगतानों पर शुल्क नहीं लगाया गया है।
सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान और कई छोटे व्यापारी लेनदेन अब भी शुल्क से बाहर हैं।
अब निगाहें चार सप्ताह के भीतर दाखिल होने वाले जवाब और मामले की अगली सुनवाई पर रहेंगी
FAQ
Q1. क्या अब हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा?
नहीं। सरकार के अनुसार सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान और कई छोटे व्यापारी लेनदेन शुल्क से बाहर हैं।
Q2. 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर कितना MDR है?
निर्दिष्ट सामान्य P2M लेनदेन पर MDR 0.4 प्रतिशत है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।
Q3. नया UPI MDR कब से लागू होना है?
प्रस्तावित ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है।
Q4. क्या सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR पर रोक लगा दी है?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है और
केंद्र, RBI तथा NPCI से जवाब मांगा है।
Q5. क्या आम व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर MDR लगेगा?
सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार P2P UPI लेनदेन पर MDR नहीं लगाया गया है।
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