लखनऊ से गिरफ्तार आतंकियों
उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश का खुलासा किया है।
लखनऊ से गिरफ्तार चार संदिग्ध आतंकियों के मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।
जांच में पता चला है कि इन आरोपियों के निशाने पर गाजियाबाद के कई अहम स्थान थे,
जहां विस्फोट और आगजनी की योजना बनाई जा रही थी।
इन स्थानों को बनाया गया था टारगेट
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने साहिबाबाद स्थित
हिंदू रक्षा दल कार्यालय और राजनगर एक्सटेंशन के दिल्ली-6 मॉल को निशाना बनाया था।
इन स्थानों की रेकी कर वीडियो और फोटो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजे गए थे।
पाकिस्तान से मिल रहा था निर्देश
एजेंसियों के मुताबिक आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में थे और उनके निर्देश पर काम कर रहे थे।
मोबाइल से मिले व्हाट्सएप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लोकेशन शेयरिंग से इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं।
साजिश के बदले मिली रकम
जांच में यह भी सामने आया कि रेकी करने के बदले आरोपियों को 13 हजार रुपये दिए गए थे।
यह रकम क्यूआर कोड के जरिए ट्रांसफर की गई थी और
इसे आरोपी विकास के जरिए उसके रिश्तेदार के खाते में मंगवाया गया।
अलीगढ़ में भी थी आगजनी की योजना
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों ने अलीगढ़ के
एक कार शोरूम की भी रेकी की थी, जहां आगजनी की योजना थी।
इसके अलावा गाजियाबाद में सड़क किनारे खड़े ट्रकों के वीडियो भी भेजे गए थे, जो संभावित टारगेट हो सकते थे।
बरामद हुए भड़काऊ पर्चे
आरोपियों के पास से 24 पर्चे भी बरामद हुए हैं, जिनमें हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में संदेश लिखा था।
इन पर्चों में धमकी भरे शब्दों के साथ यह भी लिखा गया था कि
यह सिर्फ शुरुआत है और आगे और भी कदम उठाए जाएंगे।
योजना थी कि वारदात के बाद ये पर्चे घटनास्थल पर छोड़े जाएं।
व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े थे आरोपी
एजेंसियों के अनुसार आरोपी एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जुड़े हुए थे, जिसमें पाकिस्तान के हैंडलर्स भी शामिल थे।
इसी माध्यम से उन्हें निर्देश दिए जाते थे और पूरी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की जा रही थी।
पुलिस और एटीएस की कार्रवाई
यूपी एटीएस ने 2 अप्रैल को चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसमें और कौन-कौन शामिल है।
लखनऊ में पकड़े गए इन संदिग्ध आतंकियों से जुड़ा यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
इससे यह भी साफ होता है कि देश में आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार सतर्कता और तकनीकी निगरानी कितनी जरूरी है।
