नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन
नोएडा के गौतमबुद्धनगर जिले में मजदूरों का प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया और देखते ही देखते पूरे शहर में फैल गया। चार दिनों से सुलग रही वेतन बढ़ाने की मांग सोमवार सुबह करीब 9 बजे भड़क उठी, जब फेज-2 स्थित मदरसन कंपनी से शुरू हुआ प्रदर्शन उग्र हो गया।
दो घंटे में पूरे शहर में फैला उपद्रव
शुरुआत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे श्रमिक अचानक सड़कों पर उतर आए और स्थिति बेकाबू हो गई।
करीब दो घंटे के भीतर ही यह बवाल सेक्टर-58, 59, 62, 63 और सेक्टर-84 समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में फैल गया।
प्रदर्शनकारियों ने कई कंपनियों में तोड़फोड़ की और सड़कों पर अफरातफरी मच गई।
300 से ज्यादा कंपनियों में तोड़फोड़, आगजनी
हिंसक प्रदर्शन के दौरान
300 से अधिक कंपनियों को नुकसान पहुंचा
100 से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई
20 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पूरे शहर में दहशत का माहौल बन गया।
पुलिस का एक्शन: लाठीचार्ज और आंसू गैस
हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े।
कई जगहों पर लाठीचार्ज किया गया
आंसू गैस के गोले छोड़े गए
अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया
झड़पों में 10 पुलिसकर्मियों समेत 30 से अधिक लोग घायल हो गए।
मजदूरी बढ़ाने की मांग बनी कारण
यह पूरा विवाद मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ था। लंबे समय से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे श्रमिकों का गुस्सा आखिरकार हिंसक रूप में सामने आया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने देर रात बड़ा फैसला लिया।
सरकार का बड़ा फैसला: न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी
प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है।
नए आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे
अलग-अलग श्रेणियों में करीब 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी
आगे वेज बोर्ड के जरिए स्थायी समाधान की प्रक्रिया शुरू
यह फैसला तत्काल स्थिति को शांत करने के लिए लिया गया है।
उद्योगों को भारी नुकसान
नोएडा आंत्रप्रिन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन के अनुसार, इस हिंसक प्रदर्शन में 300 से अधिक कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है।
सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है और जल्द रिपोर्ट मांगी है।
नोएडा में हुआ यह बवाल दिखाता है कि श्रमिकों की समस्याओं को समय रहते हल न किया जाए,
तो हालात कितने गंभीर हो सकते हैं।
अब सरकार के फैसलों और जांच रिपोर्ट के बाद यह देखना होगा कि
भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।
