Turkey Vs India
तुर्की ने दुनिया को चौंकाते हुए अपनी नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ‘यिल्दिरिमहान’ यानी ‘बिजली’ का खुलासा किया है। इस्तांबुल में आयोजित SAHA 2026 रक्षा और अंतरिक्ष प्रदर्शनी में इस मिसाइल को बेहद गोपनीय तरीके से पेश किया गया। माना जा रहा है कि यह मिसाइल हजारों किलोमीटर दूर तक हमला करने में सक्षम है और इसके जरिए तुर्की अपनी सैन्य ताकत का वैश्विक प्रदर्शन करना चाहता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत समेत कई देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं।,
एर्दोगन की नई रणनीति ने बढ़ाई दुनिया की बेचैनी,
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन लंबे समय से मुस्लिम देशों के बीच अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। एर्दोगन कई बार पाकिस्तान के समर्थन में कश्मीर मुद्दे पर बयान दे चुके हैं, जिससे भारत और तुर्की के रिश्तों में तनाव देखा गया। अब ‘यिल्दिरिमहान’ जैसी लंबी दूरी की मिसाइल का सामने आना भारत के लिए रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहना चाहता, बल्कि वह वैश्विक सैन्य ताकत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।,
क्या है ‘यिल्दिरिमहान’ मिसाइल की खासियत?,
रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘यिल्दिरिमहान’ एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज हजारों किलोमीटर तक हो सकती है। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मानी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी हाई स्पीड और लंबी दूरी है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देना आसान हो सकता है। रक्षा जानकारों का कहना है कि यदि यह मिसाइल पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाती है, तो तुर्की की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।,
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?,
भारत पहले से चीन और पाकिस्तान जैसे परमाणु संपन्न देशों से घिरा हुआ है। ऐसे में तुर्की का आधुनिक ICBM कार्यक्रम भारत की रणनीतिक चुनौतियों को और जटिल बना सकता है। खासकर तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा संबंध नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय हैं। माना जा रहा है कि तुर्की पाकिस्तान को सैन्य तकनीक और ड्रोन तकनीक में भी मदद कर रहा है। यदि भविष्य में मिसाइल तकनीक सहयोग बढ़ता है, तो दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।,
$भारत की रक्षा तैयारी कितनी मजबूत?,
भारत के पास पहले से अग्नि-5 जैसी अत्याधुनिक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल मौजूद है, जो हजारों किलोमीटर दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम है। इसके अलावा भारत तेजी से अपने एयर डिफेंस सिस्टम और अंतरिक्ष आधारित निगरानी तकनीक को भी मजबूत कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की सैन्य क्षमता तुर्की से
कहीं अधिक उन्नत और संतुलित है, लेकिन तुर्की के नए कदम को हल्के में नहीं लिया जा सकता।,
वैश्विक राजनीति में बदल रहा शक्ति संतुलन,
तुर्की की नई मिसाइल केवल एक हथियार नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति में शक्ति प्रदर्शन का संकेत भी है।
पश्चिम एशिया, यूरोप और दक्षिण एशिया में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में दुनिया की
सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। भारत के लिए जरूरी होगा कि वह अपनी रक्षा रणनीति को और
आधुनिक बनाए तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कूटनीतिक साझेदारी कायम रखे।,
‘यिल्दिरिमहान’ मिसाइल के जरिए तुर्की ने दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की है कि
वह अब वैश्विक सैन्य ताकत बनने की राह पर है। हालांकि भारत की सैन्य शक्ति और रक्षा
तैयारी मजबूत मानी जाती है, लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच
नई दिल्ली को हर नए खतरे पर नजर बनाए रखनी होगी। तुर्की और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां
आने वाले समय में भारत की रणनीतिक नीति को प्रभावित कर सकती हैं।,
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