सुप्रीम कोर्ट ने अडानी को दी बड़ी राहत, चरागाह भूमि वापसी का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने अडानी पोर्ट्स से जुड़े एक लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में कंपनी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसमें मुंद्रा में अडानी पोर्ट्स को आवंटित 108 हेक्टेयर चरागाह भूमि वापस लेने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
विवाद की शुरुआत और मामला का इतिहास
यह पूरा विवाद वर्ष 2005 का है। उस समय गुजरात के कच्छ जिले के नवीनल गांव में कुल 231 हेक्टेयर गौचर (चरागाह) भूमि को मुंद्रा पोर्ट्स एसईजेड लिमिटेड को आवंटित किया गया था। 2010-11 के दौरान जब इस भूमि पर बाड़बंदी शुरू हुई तो स्थानीय ग्रामीणों ने पशुचारण पर प्रभाव पड़ने का हवाला देते हुए गुजरात हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
2014 में हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को वैकल्पिक 387 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। हालांकि 2015 में राज्य सरकार ने ही रिकॉल आवेदन देकर कहा कि वैकल्पिक भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
गुजरात हाईकोर्ट का फैसला और भूमि वापसी का आदेश
19 अप्रैल 2024 को गुजरात हाईकोर्ट ने अधिकारियों को चरागाह भूमि के मुद्दे को जल्द सुलझाने का निर्देश दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने 4 जुलाई 2024 को 108 हेक्टेयर (लगभग 266 एकड़) भूमि अडानी पोर्ट्स से वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। अगले ही दिन 5 जुलाई को हाईकोर्ट ने इस आदेश पर संज्ञान लिया और वसूली के कदम तेज करने के निर्देश दिए।
अडानी ग्रुप ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और मुख्य तर्क दिया कि उन्हें कोई सुनवाई का मौका दिए बिना यह आदेश पारित किया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और अंतरिम रोक
10 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब हाल के फैसले में
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार का 4 जुलाई 2024 का आदेश प्रक्रियागत रूप से गलत था
क्योंकि प्रभावित पक्ष (अडानी) को सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया।
कोर्ट के मुख्य निर्देश और फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:
- राज्य के अधिकारियों को सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा और उचित अवसर देना होगा।
- यदि अडानी कंपनी आपत्ति दर्ज करती है, तो उस पर 2 सप्ताह के भीतर विचार करके फैसला लिया जाए।
- नया आदेश आने तक 10 जुलाई 2024 की स्थिति यथावत बनी रहेगी।
- इसके बाद गुजरात हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका पर स्वतंत्र रूप से फैसला सुनाया जा सकेगा।
फैसले का प्रभाव और महत्व
यह फैसला अडानी पोर्ट्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। मुंद्रा पोर्ट एसईजेड के विकास कार्यों पर
इस फैसले का सीधा प्रभाव पड़ सकता था। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के चरागाह और
पशुपालन के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे, यदि नया फैसला उनके पक्ष में जाता है।
यह मामला प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन, औद्योगिक विकास और स्थानीय ग्रामीण हितों के बीच संतुलन का
एक बेहतरीन उदाहरण है। सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने अडानी की ओर से पैरवी की।