गोरखपुर। गोला थाना क्षेत्र के ग्राम सभा बारानगर में सरकारी धन से कराए गए इंटरलॉकिंग कार्य को उखाड़ने और विरोध करने पर गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर गोला पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सरकारी धन से कराई गई थी इंटरलॉकिंग
बारानगर निवासी एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह पुत्र ओमप्रकाश सिंह ने गोला थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उनके घर के सामने आबादी की जमीन पर ग्राम प्रधान के कोटे से इंटरलॉकिंग का कार्य कराया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार यह कार्य सार्वजनिक उपयोग के लिए कराया गया था।
आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों ने इंटरलॉकिंग को उखाड़कर फेंक दिया। इससे सरकारी धन से कराए गए विकास कार्य को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की।
विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी
अभिमन्यु सिंह की तहरीर के मुताबिक जब उन्होंने इंटरलॉकिंग उखाड़े जाने का विरोध किया तो आरोपितों ने उनके साथ गाली-गलौज की। इसके साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि घटना के बाद उन्हें भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका है।
तहरीर में राहुल सिंह पुत्र स्वर्गीय राणा सिंह, आशीष सिंह पुत्र देवेंद्र सिंह, भानु प्रताप सिंह पुत्र स्वर्गीय कोमल सिंह, सावित्री सिंह और पूनम सिंह को आरोपित किया गया है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपित पांचों लोगों के खिलाफ
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 352, 351(3), 324(3) तथा
सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस शिकायत में लगाए गए
आरोपों की जांच के साथ घटना से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटा रही है।
इंटरलॉकिंग उखाड़ने की घटना की होगी जांच
जांच के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि इंटरलॉकिंग
किस प्रकार और किन परिस्थितियों में उखाड़ी गई तथा घटना के समय वहां क्या हुआ था।
इसके अलावा पुलिस शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गाली-गलौज और धमकी के आरोपों से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल करेगी।
जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी
मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही भविष्य में किसी तरह की अनहोनी की आशंका भी जताई है।
पुलिस का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है और
जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मामला सरकारी धन से कराए गए इंटरलॉकिंग कार्य को
नुकसान पहुंचाने और विरोध करने पर धमकी देने के आरोपों से जुड़ा है। पुलिस की
जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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