स्पेन में बढ़ता आवास संकट अब केवल घर खरीदने या किराए पर मकान लेने की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह देश का बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। लगातार बढ़ते किराए, घरों की सीमित उपलब्धता और किफायती आवास की कमी से परेशान हजारों लोग हाल के दिनों में देश के कई शहरों में सड़कों पर उतरे हैं।
प्रदर्शनों के पीछे लंबे समय से बढ़ रही आवास की समस्या के साथ-साथ मैड्रिड में एक 87 वर्षीय महिला की बेदखली का मामला भी अहम वजह बना। इस घटना ने किरायेदारों की सुरक्षा और बढ़ते आवास खर्च को लेकर लोगों में नाराजगी को और तेज कर दिया।
आखिर स्पेन में आवास संकट इतना गंभीर क्यों हुआ?
स्पेन में पिछले कुछ वर्षों में घरों की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ा है। खासकर मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे बड़े शहरों में रोजगार, पर्यटन और आबादी बढ़ने के कारण आवास की मांग लगातार बढ़ी है।
दूसरी तरफ नए घरों की आपूर्ति उसी गति से नहीं बढ़ पाई। नतीजा यह हुआ कि किराए और मकानों की कीमतों पर दबाव बढ़ता गया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2026 की दूसरी तिमाही में स्पेन में मकानों की कीमतें एक साल पहले की तुलना में 12.2 प्रतिशत बढ़ीं। पुराने मकानों की कीमतों में सालाना वृद्धि 12.9 प्रतिशत रही।
किराए का बोझ भी लगातार बढ़ा
आवास संकट का सबसे बड़ा असर किराए पर रहने वाले परिवारों पर पड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2026 में स्पेन में औसत विज्ञापित किराया लगभग 15.10 यूरो प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गया है।
किराए में लगातार वृद्धि का मतलब है कि कम और मध्यम आय वाले परिवारों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा मकान और उससे जुड़े खर्चों पर लगाना पड़ रहा है। यही स्थिति युवाओं के लिए अलग घर लेकर रहने को भी मुश्किल बना रही है।
87 साल की महिला की बेदखली बनी आंदोलन की बड़ी वजह
हालिया विरोध की एक प्रमुख वजह मैड्रिड की 87 वर्षीय मारिया डेल कारमेन अबासकल की बेदखली बनी। वह करीब सात दशक से उसी मकान में रह रही थीं।
उनकी बेदखली की तस्वीरें और घटना सार्वजनिक होने के बाद किरायेदार संगठनों तथा आम लोगों में नाराजगी बढ़ी। इसके बाद आवास अधिकार, किराएदारों की सुरक्षा और बेदखली के नियमों में बदलाव की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज हो गए।
देश के कई शहरों में हुए प्रदर्शन
आवास संकट के खिलाफ स्पेन के करीब 50 शहरों में प्रदर्शन हुए। मैड्रिड में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और सरकार से किफायती आवास तथा किराएदारों के अधिकारों को मजबूत करने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में किराए पर नियंत्रण, बेदखली से सुरक्षा और अधिक सामाजिक आवास उपलब्ध कराना शामिल है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की सरकार ने आवास संकट से निपटने के लिए आपातकालीन उपायों का प्रस्ताव रखा। इनका उद्देश्य कमजोर किरायेदारों को बेदखली से सुरक्षा देना, आवास बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करना और किराए के मकानों की उपलब्धता बढ़ाना था।
हालांकि, सरकार के प्रस्तावों को संसद में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। विपक्षी दलों ने कुछ उपायों पर आपत्ति जताई और तर्क दिया कि अत्यधिक प्रतिबंधों से निजी मकान मालिक किराए के बाजार से बाहर हो सकते हैं, जिससे उपलब्ध मकानों की संख्या और कम हो सकती है।
सरकारी आवास की कमी भी बड़ी चुनौती
स्पेन की आवास समस्या में सामाजिक आवास की सीमित उपलब्धता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में सरकारी स्वामित्व वाले किराए के मकानों की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है, जबकि यूरोपीय संघ का औसत इससे काफी अधिक है।
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो बाजार दर पर
घर खरीदने या किराए पर लेने में सक्षम नहीं हैं।
पर्यटन और शॉर्ट-टर्म रेंटल का भी असर
स्पेन दुनिया के प्रमुख पर्यटन देशों में शामिल है। बड़े शहरों और पर्यटन क्षेत्रों में
अल्पकालिक किराए वाले मकानों की बढ़ती मांग ने भी आवास बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय के किराए वाले मकानों की उपलब्धता कम होने पर किराए
बढ़ने की समस्या और गंभीर हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक स्पेन का आवास संकट केवल पर्यटन या
निवेशकों की वजह से नहीं है; इसके पीछे घरों की आपूर्ति,
भूमि नियोजन, निर्माण क्षमता और क्षेत्रीय प्रशासन जैसी कई संरचनात्मक वजहें भी हैं।
*आवास संकट अब राजनीति का बड़ा मुद्दा
आवास संकट को लेकर बढ़ते विरोध ने स्पेन की राजनीति पर भी असर डाला है। सरकार द्वारा पेश
आवास संबंधी प्रस्तावों को संसद में समर्थन नहीं मिलने के बाद राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अब 29 नवंबर 2026 को समय से पहले आम चुनाव कराने की घोषणा की है।
इस तरह आवास संकट आगामी चुनावी बहस का प्रमुख मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
स्पेन में बढ़ते मकान और किराए के दामों का सबसे बड़ा प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है।
महंगे किराए और सीमित आय के कारण बड़ी संख्या में युवा स्वतंत्र रूप से रहने के
बजाय लंबे समय तक अपने माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं।
यही कारण है कि आवास का मुद्दा केवल संपत्ति बाजार का विषय नहीं बल्कि रोजगार,
आय, परिवार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल बन गया है।
आगे क्या होगा?
स्पेन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी आवास नीति तैयार करना है
जिससे किरायेदारों को राहत मिले और साथ ही बाजार में नए मकानों की आपूर्ति भी बढ़े।
सरकार और विपक्ष के बीच इस बात पर मतभेद हैं कि किराया नियंत्रण,
सामाजिक आवास, निजी निवेश और नए निर्माण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
आने वाले आम चुनाव में आवास संकट एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों की मांग और
राजनीतिक दलों की नीतियों के बीच संतुलन बनाना नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
निष्कर्ष
स्पेन में आवास संकट कई वर्षों से धीरे-धीरे गहराता गया है। मकानों की बढ़ती कीमत,
महंगे किराए, सीमित सामाजिक आवास और बड़े शहरों में
बढ़ती मांग ने समस्या को गंभीर बना दिया है। 87 वर्षीय महिला की बेदखली ने
इस असंतोष को व्यापक आंदोलन में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अब आवास का मुद्दा सड़क से संसद और चुनावी राजनीति तक पहुंच चुका है।
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