सोया और पाम तेल पर शुल्क 5%, सूरजमुखी तेल पर शून्य

नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026

परिचय

केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों की आयात लागत कम करने के लिए कच्चे सोयाबीन और पाम तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी घटाकर 5% कर दी है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर यह शुल्क शून्य कर दिया गया है। नए शुल्क 24 सितंबर 2026 से लागू हैं।

Main News

केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों की कीमतों को लेकर बड़ा शुल्क बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की 23 सितंबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, कच्चे सूरजमुखी तेल पर लगने वाली 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह संशोधित व्यवस्था 24 सितंबर से प्रभावी हो गई है।

इस फैसले का सीधा संबंध खाद्य तेलों की आयात लागत से है। भारत घरेलू खपत की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करता है। ऐसे में आयात शुल्क में कमी से विदेश से आने वाले कच्चे तेल की लागत में कमी की गुंजाइश बनती है। खुदरा बाजार में कीमत कितनी घटेगी, यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और आयातकों व कारोबारियों द्वारा शुल्क में मिली राहत को आगे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर निर्भर करेगा।

सोयाबीन और पाम तेल पर नई दर

अधिसूचना के तहत कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल की BCD दर 10 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत तक काम कर दी गई है।

रिफाइंड सोयाबीन और रिफाइंड पाम तेल पर भी बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत की गई है।

इससे कच्चे और रिफाइंड दोनों श्रेणियों में आयात शुल्क का बोझ कम हुआ है।

सूरजमुखी तेल पर सबसे बड़ी कटौती

कच्चे सूरजमुखी तेल पर सरकार ने बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी है।

वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत किया गया है।

सूरजमुखी तेल की दोनों प्रमुख श्रेणियों के शुल्क ढांचे में बदलाव किया गया है।

त्योहारों से पहले उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब?

सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारी अवधि में खाद्य तेल की मांग बढ़ती है।

मिठाई, नमकीन और अन्य तले हुए खाद्य पदार्थों में तेल की खपत अधिक होती है। आम जनता व व्यापारियों को लाभ होने कीसंभावना है।

आयात शुल्क में कमी से कंपनियों की लागत पर दबाव कम होने और घरेलू बाजार में कीमतों को नरम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इसका वास्तविक असर खुदरा कीमतों पर आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा।

Headings। सोयाबीन और पाम तेल पर नई कस्टम्स ड्यूटी। सूरजमुखी तेल पर शुल्क शून्य। त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद

Facts/Details

संशोधित दरें 24 सितंबर 2026 से प्रभावी हैं।

Statement

सरकार के इस फैसले से खाद्य तेलों की आयात लागत कम होने की संभावना है।

बाजार में इसका लाभ उपभोक्ताओं तक कितना पहुंचता है, यह वैश्विक कीमतों, मुद्रा विनिमय दर और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति पर निर्भर करेगा।

FAQ

सवाल 1: सोयाबीन तेल पर कस्टम्स ड्यूटी कितनी हुई?

कच्चे सोयाबीन तेल पर BCD 10% से घटाकर 5% कर दी गई है।

सवाल 2: पाम तेल पर नई ड्यूटी कितनी है?

कच्चे पाम तेल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी अब 5% है।

सवाल 3: सूरजमुखी तेल पर क्या बदलाव हुआ?

कच्चे सूरजमुखी तेल पर BCD 10% से घटाकर शून्य कर दी गई है।

सवाल 4: नई दरें कब से लागू हुईं?

नई दरें 24 सितंबर 2026 से लागू हैं।

खाद्य तेलों पर कस्टम्स ड्यूटी में कटौती से आयात लागत घटाने का प्रयास किया गया है।

इसका असर घरेलू बाजार में कीमतों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में बाजार की स्थितियों और लागत में बदलाव पर निर्भर करेगा।