उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर से साइबर ठगी का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रियल एस्टेट कारोबारी और शेयर मार्केट ब्रोकर विश्वजीत श्रीवास्तव की कंपनी को फर्जी UPI स्क्रीनशॉट दिखाकर करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। इस खुलासे के बाद कारोबारी जगत में हड़कंप मच गया है और डिजिटल पेमेंट सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर किया करोड़ों का खेल,
जानकारी के मुताबिक आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से ऑनलाइन पेमेंट के नकली स्क्रीनशॉट तैयार किए। वे कंपनी को लाखों और करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने का दावा करते थे और मोबाइल पर फर्जी ट्रांजैक्शन स्क्रीन दिखाकर भरोसा जीत लेते थे। शुरुआती दौर में किसी को शक नहीं हुआ क्योंकि स्क्रीनशॉट बिल्कुल असली जैसे नजर आते थे।
धीरे-धीरे यह फर्जीवाड़ा इतना बड़ा हो गया कि कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। आरोपियों ने तकनीक और विश्वास दोनों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक इस खेल को अंजाम दिया।
ऑडिट में खुला 24 करोड़ के फ्रॉड का राज,
बताया जा रहा है कि कंपनी के नियमित ऑडिट के दौरान खातों का मिलान किया गया। इसी दौरान पता चला कि जिन ट्रांजैक्शन का दावा किया गया था, वे वास्तव में बैंक खाते में पहुंचे ही नहीं थे। कई एंट्री केवल मोबाइल स्क्रीनशॉट के आधार पर दर्ज कर ली गई थीं।
जब ऑडिट टीम ने बैंक स्टेटमेंट और वास्तविक लेनदेन की जांच की तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और मामला दर्ज कराया गया।
21 लोगों पर दर्ज हुई प्राथमिकी,
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। शुरुआती जांच में कई संदिग्धों की भूमिका सामने आई है। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार कुछ आरोपी लंबे समय से कारोबारी नेटवर्क से जुड़े हुए थे, जिसके कारण उन पर जल्दी शक नहीं हुआ। अब पुलिस साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
फर्जी UPI स्क्रीनशॉट बना नया साइबर हथियार,
देशभर में डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
फर्जी UPI स्क्रीनशॉट बनाकर ठगी करना अब तेजी से बढ़ता अपराध बन चुका है।
कई दुकानदार, व्यापारी और कारोबारी बिना बैंक खाते की पुष्टि किए
केवल स्क्रीनशॉट देखकर सामान या सेवाएं दे देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मोबाइल स्क्रीन देखकर भरोसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है।
हमेशा बैंक खाते में रकम आने की पुष्टि करना जरूरी है। सिर्फ स्क्रीनशॉट या
मैसेज के आधार पर भुगतान मान लेना बड़ी गलती साबित हो सकता है।
कारोबारियों के लिए बड़ा सबक बना मामला,
गोरखपुर में सामने आया यह मामला कारोबारियों और व्यापारियों के लिए बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
डिजिटल लेनदेन में छोटी सी लापरवाही करोड़ों रुपये का नुकसान करा सकती है।
खासतौर पर बड़े ट्रांजैक्शन में बैंक एंट्री और अकाउंट स्टेटमेंट का मिलान बेहद जरूरी माना जा रहा है।
अब कई व्यापारिक संगठनों ने भी अपने सदस्यों को सावधानी बरतने और हर
भुगतान की बैंक स्तर पर पुष्टि करने की सलाह दी है।
पुलिस जांच में हो सकते हैं बड़े खुलासे,
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल साधारण फ्रॉड नहीं
बल्कि सुनियोजित साइबर नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि
कहीं अन्य कारोबारी भी इसी गिरोह का शिकार तो नहीं बने।
यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
साइबर सेल डिजिटल सबूत जुटाने और ट्रांजैक्शन की तकनीकी जांच में जुटी हुई है।
डिजिटल इंडिया के दौर में बढ़ी सतर्कता की जरूरत,
यह मामला दिखाता है कि डिजिटल इंडिया के दौर में ऑनलाइन भुगतान जितना आसान हुआ है,
उतना ही जरूरी सतर्क रहना भी हो गया है। साइबर अपराधी अब तकनीक का
इस्तेमाल कर बेहद प्रोफेशनल तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में हर कारोबारी और
आम नागरिक को डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी हो गया है।
गोरखपुर में 24 करोड़ रुपये की फर्जी UPI स्क्रीनशॉट ठगी ने पूरे कारोबारी जगत को झकझोर दिया है।
इस मामले ने साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बेहद आधुनिक और खतरनाक तरीके अपना रहे हैं।
डिजिटल भुगतान के इस दौर में सतर्कता और बैंक सत्यापन ही सबसे बड़ा बचाव बन सकता है।
यह घटना व्यापारियों, कंपनियों और आम लोगों सभी के लिए बड़ा चेतावनी संदेश है।
