रामविलास पासवान वंचितों की मजबूत आवाज थे: सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि, लखनऊ में आयोजित हुआ कार्यक्रम

लखनऊ। पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर गुरुवार को लखनऊ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और सामाजिक न्याय तथा वंचित वर्गों के लिए उनके योगदान को स्मरण किया।

रामविलास पासवान का निधन 8 अक्टूबर 2020 को हुआ था। उन्होंने लंबे राजनीतिक जीवन में केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और अलग-अलग सरकारों में मंत्री के रूप में काम किया।

लखनऊ में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम

रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ में विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रदेश सरकार के अन्य नेताओं की मौजूदगी रही।

कार्यक्रम में रामविलास पासवान के राजनीतिक और सामाजिक जीवन को याद किया गया। उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

सीएम योगी ने रामविलास पासवान को किया याद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामविलास पासवान के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने वंचित और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए लगातार काम किया। उनके सार्वजनिक जीवन को सामाजिक न्याय और जनसेवा से जोड़कर देखा जाता है।

मुख्यमंत्री ने उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक योगदान को स्मरण किया।

लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे

रामविलास पासवान देश की राजनीति के प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते थे। उनका राजनीतिक सफर कई दशकों तक चला। उन्होंने केंद्र में अलग-अलग सरकारों के दौरान मंत्री पद संभाले और रेल, संचार, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई।

उन्होंने वर्ष 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की थी। इसके पहले भी वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे और संसद में लंबे समय तक बिहार का प्रतिनिधित्व किया।

सामाजिक न्याय और वंचितों के अधिकार पर जोर

रामविलास पासवान ने अपने राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने दलित समुदाय के अधिकारों को लेकर भी लंबे समय तक आवाज उठाई।

उनकी राजनीतिक शैली का एक प्रमुख पहलू यह रहा कि उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों के साथ काम किया और कई सरकारों में मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का रिकॉर्ड

रामविलास पासवान का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा रहा। अपने सार्वजनिक जीवन में उन्होंने

अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व वाली केंद्र सरकारों में मंत्री के रूप में काम किया।

उनका राजनीतिक प्रभाव बिहार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

चिराग पासवान ने भी पिता को किया याद

रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर उनके बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी

(रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि पार्टी और परिवार की जिम्मेदारी

संभालने के बाद उन्हें रामविलास पासवान की जिम्मेदारियों का एहसास और अधिक हुआ।

चिराग पासवान ने अपने पिता के साथ बचपन की तस्वीर साझा करते हुए भावुक संदेश भी लिखा।

लखनऊ कार्यक्रम के राजनीतिक मायने भी चर्चा में

रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है

जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

कार्यक्रम में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया था।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है।

पार्टी की ओर से प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक तैयारी की बात भी कही गई है।

रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत

रामविलास पासवान ने करीब पांच दशक तक भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।

उन्होंने संसद से लेकर केंद्र सरकार तक विभिन्न स्तरों पर काम किया।

उनके निधन के बाद उनके बेटे चिराग पासवान पार्टी की राजनीतिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

रामविलास पासवान की पुण्यतिथि पर आयोजित

कार्यक्रम उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करने का अवसर बना।

निष्कर्ष

रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में

उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी

उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए वंचित और शोषित वर्गों के लिए उनके योगदान को स्मरण किया।

कार्यक्रम में कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने इसे महत्वपूर्ण बनाया।

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