मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विद्यार्थियों और युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े मुद्दे सामने आए। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अधिकार है।
छात्रों के सवालों पर राहुल गांधी की बात
इंदौर के कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी शिक्षा और करियर से जुड़ी परेशानियां साझा कीं। प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, भर्ती प्रक्रिया, उम्र सीमा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल प्रमुख रहे। कुछ विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नियुक्तियों में हो रही देरी को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में शिक्षा और रोजगार को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए व्यवस्था की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की भूमिका केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें देश और संस्थाओं से जुड़े सवाल भी पूछने चाहिए।
कार्यक्रम में उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि सवाल पूछने वाले छात्रों की आवाज को दबाया जाता है। ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल भी उनके संबोधन में हुआ। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप और उनका वक्तव्य था, जिसे अलग-अलग राजनीतिक पक्ष अलग नजरिए से देखते हैं।
15-29 वर्ष के युवाओं पर फोकस क्यों?
कार्यक्रम की चर्चा में 15 से 29 वर्ष की युवा आबादी और रोजगार से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता मिली। सरकारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025 के अनुसार भारत में 15-29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की बेरोजगारी दर 9.9 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 8.3 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 13.6 प्रतिशत दर्ज की गई।
हालांकि, 15-29 वर्ष आयु वर्ग को सीधे मतदाता वर्ग मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इस समूह में 18 वर्ष से कम उम्र के लोग भी शामिल होते हैं। निर्वाचन संबंधी आंकड़ों में मतदाता आयु वर्ग को अलग तरीके से परिभाषित किया जाता है। उदाहरण के लिए, निर्वाचन आयोग के 2019 के आंकड़ों में 18-29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं का हिस्सा 25.37 प्रतिशत बताया गया था।
रोजगार और परीक्षा व्यवस्था बने अहम मुद्दे
कार्यक्रम में युवाओं की ओर से रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाए गए। विद्यार्थियों के लिए परीक्षा में पारदर्शिता, समय पर परिणाम, नियुक्तियों में देरी और बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
सरकारी PLFS आंकड़े भी युवा रोजगार की स्थिति पर नियमित जानकारी देते हैं।
PLFS 2025 में 15-29 वर्ष के युवाओं की राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश‘
छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों के साथ युवाओं की सार्वजनिक भागीदारी पर भी चर्चा हुई।
राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद करते हुए सवाल पूछने और अपनी समस्याओं को सामने रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में छात्रों की व्यक्तिगत समस्याओं को व्यापक रुप से शिक्षा और रोजगार व्यवस्था से जोड़कर चर्चा की गई।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मौजूदा व्यवस्था को लेकर कई राजनीतिक आरोप लगाए है
और कहा कि छात्रों के सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उनके वक्तव्य में शिक्षा, बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती और संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल रहे।
FAQ
1. ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कहां आयोजित हुआ?
कार्यक्रम मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ।
2. कार्यक्रम में मुख्य मुद्दे क्या रहे?
शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, भर्ती प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही प्रमुख मुद्दे रहे।
3. राहुल गांधी ने युवाओं से क्या कहा?
उन्होंने छात्रों से सवाल पूछने और अपनी समस्याओं को सामने रखने पर जोर दिया।
4. 15-29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर कितनी थी?
PLFS 2025 के अनुसार इस आयु वर्ग की अखिल भारतीय बेरोजगारी दर 9.9 प्रतिशत थी।
5. क्या 15-29 वर्ष के सभी युवा 2029 के मतदाता होंगे?
नहीं। 15-29 वर्ष की आयु सीमा में 18 वर्ष से कम उम्र के लोग भी आते हैं, इसलिए इसे सीधे मतदाता संख्या के बराबर नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष
इंदौर का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े युवाओं के सवालों पर केंद्रित रहा।
राहुल गांधी ने इन मुद्दों को राजनीतिक और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जोड़कर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम में उठे सवाल आने वाले समय में युवा नीति और रोजगार संबंधी बहस का हिस्सा बने रह सकते हैं।