पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने 23 सितंबर 2026 को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। मेरठ बार एसोसिएशन की आमसभा में लिए गए निर्णय के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और संबंधित तहसील बार एसोसिएशनों के अधिवक्ता बुधवार को न्यायिक कार्य नहीं करेंगे।
हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का यह आंदोलन लंबे समय से चला आ रहा है। हालिया घटनाक्रम के बाद मेरठ में आयोजित आमसभा में आंदोलन की आगे की रणनीति पर कई प्रस्ताव पारित किए गए।
22 जिलों में कार्य बहिष्कार का निर्णय
मेरठ के नानकचंद सभागार में मंगलवार को बार एसोसिएशन की आमसभा आयोजित हुई। बैठक में तय किया गया कि बुधवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी 22 जिलों और तहसील स्तर पर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
इस दौरान न्यायालयों में नियमित न्यायिक कार्य प्रभावित होने की संभावना है। अधिवक्ता संगठनों ने हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बनी आंदोलन की रणनीति
अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद यह मामला फिर चर्चा में आया। अधिवक्ता प्रतिनिधियों के अनुसार, बातचीत के दौरान हाईकोर्ट बेंच के गठन के अधिकार क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई और इसे उच्चतम न्यायालय से जुड़े विषय के रूप में बताया गया।
वहीं, अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने की प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। इस बातचीत के बाद मेरठ बार एसोसिएशन ने आमसभा कर आगे की रणनीति तय की।
कचहरी परिसर में लगाए जाएंगे बैनर
आमसभा में मेरठ कचहरी परिसर में हाईकोर्ट बेंच की मांग से संबंधित बैनर और पोस्टर लगाने का निर्णय भी लिया गया है। इनमें ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ का नारा इस्तेमाल करने की बात कही गई है।
यह निर्णय बार एसोसिएशन की ओर से आंदोलन के तहत लिया गया है।
जनप्रतिनिधियों के प्रवेश को लेकर भी निर्णय
आमसभा में भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों के मेरठ कचहरी परिसर में प्रवेश को लेकर भी प्रस्ताव पारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा ऐसे जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों में वकालतनामे वापस लेने संबंधी निर्णय भी बैठक में लिए जाने की बात कही गई है।
ये सभी निर्णय मेरठ बार एसोसिएशन की आमसभा में लिए गए प्रस्तावों के तौर पर सामने आए हैं।
वकालतनामा वापस लेने का फैसला
बैठक में राज्यसभा सदस्य डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को हाईकोर्ट बेंच स्थापना की पैरवी के लिए दिए गए वकालतनामे को वापस लेने का निर्णय भी लिया गया।
इसके साथ ही बार एसोसिएशन से जुड़े उन सदस्यों के संबंध में भी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है, जो संगठन की सदस्यता के साथ राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं और हाईकोर्ट बेंच की मांग का समर्थन नहीं करते हैं।
आगे की रणनीति पर होगी बैठक
अधिवक्ताओं ने आंदोलन की आगामी रणनीति तैयार करने के लिए पश्चिमी
उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक बुलाने की बात कही है।
इसमें अलग-अलग जिलों के बार एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल होंगे।
इसके अलावा व्यापारिक और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर
हाईकोर्ट बेंच की मांग से जुड़े विषयों पर चर्चा करने की योजना भी सामने आई है।
पश्चिमी यूपी में लंबे समय से उठ रही है मांग
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग लंबे समय से अधिवक्ता संगठनों
प्रयागराज जाना पड़ता है, इसलिए क्षेत्र में बेंच स्थापित होने से न्यायिक पहुंच आसान हो सकती है।
अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने हालिया बातचीत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों की
आबादी और क्षेत्रफल का भी उल्लेख करते हुए बेंच की मांग के पक्ष में अपनी दलील रखी।
ये आंकड़े अधिवक्ता संगठनों की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं।
23 सितंबर को क्या होगा?
23 सितंबर 2026 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और तहसील बार एसोसिएशनों के
अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद केंद्रीय संघर्ष समिति की
बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति तय किए जाने की बात कही गई है।
FAQ
प्रश्न: पश्चिमी यूपी के अधिवक्ता 23 सितंबर को न्यायिक कार्य से क्यों विरत रहेंगे?
हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर आंदोलन के तहत
22 जिलों में न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया है।
प्रश्न: कितने जिलों के अधिवक्ता कार्य बहिष्कार करेंगे?
निर्णय के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और संबंधित तहसील बार
एसोसिएशनों के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे।
प्रश्न: हाईकोर्ट बेंच की मांग किस क्षेत्र के लिए है?
मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की है।
प्रश्न: क्या आंदोलन आगे भी जारी रहेगा?
अधिवक्ता संगठनों ने केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करने की बात कही है।
प्रश्न: क्या कचहरी परिसर में बैनर लगाए जाएंगे?
हां, आमसभा में हाईकोर्ट बेंच की मांग से जुड़े बैनर और पोस्टर लगाने का निर्णय लिया गया है।
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