उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि रामराज्य की अवधारणा केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऐसी आदर्श व्यवस्था का प्रतीक है, जहां समाज के प्रत्येक वर्ग को सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। इसमें किसी के साथ भेदभाव या तुष्टिकरण की जगह नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री मंगलवार, 3 नवंबर को पीलीभीत के बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम नूरानपुर स्थित गोरक्ष पीठ आश्रम के शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने रामराज्य की अवधारणा, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, अयोध्या के विकास और भारतीय संस्कृति में भगवान श्रीराम के आदर्शों के महत्व पर अपने विचार रखे।
रामराज्य में हर वर्ग को मिले समान अवसर: योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें किसान, नौजवान, व्यापारी और बेटियों सहित समाज के सभी वर्गों को सुरक्षा और सम्मान मिले। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में भेदभाव और तुष्टिकरण के बजाय न्यायपूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय दंगे और अराजकता की स्थिति थी, जबकि वर्तमान में सुरक्षा का वातावरण बेहतर हुआ है। उन्होंने इसे रामराज्य की संकल्पना से जोड़कर प्रस्तुत किया।
अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन और बदलती तस्वीर का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए लंबे समय तक संघर्ष चला। उन्होंने अपने संबोधन में करीब 500 वर्षों के संघर्ष की बात कही और अयोध्या में पहले की व्यवस्थाओं तथा मौजूदा विकास के बीच अंतर का जिक्र किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज अयोध्या सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़ चुकी है। वहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुविधा उपलब्ध है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले श्रद्धालुओं को कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब सुविधाओं में विस्तार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने आगामी 6 नवंबर को छोटी दीपावली के अवसर पर अयोध्या में आयोजित होने वाले दीपोत्सव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आगमन की स्मृति में जलने वाला प्रत्येक दीप प्रदेश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
रामकथा और रामलीला भारतीय संस्कृति की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है। देश में अलग-अलग भाषाएं, वेशभूषाएं और खानपान होने के बावजूद लोग एक सांस्कृतिक सूत्र से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने रामकथा, रामलीला और अखंड रामायण पाठ जैसी परंपराओं को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार गांवों में स्थानीय कलाकार रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाते हैं। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ने आने वाली पीढ़ियों को मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन की प्रेरणा दी है।
उन्होंने धार्मिक आयोजनों को केवल परंपरा निभाने तक सीमित न रखते हुए जीवन में
सकारात्मक विचार और अच्छे संस्कार अपनाने का माध्यम बताया।
धार्मिक स्थलों के विकास से संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन और
बरेली के धार्मिक स्थलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि
धार्मिक स्थलों का विकास केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नहीं,
बल्कि सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने ब्रह्मलीन महंत शांतिनाथ महाराज को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और
आश्रम के विकास के प्रति उनके प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि
आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, स्वच्छता और संतों की उपस्थिति देखकर उन्हें प्रसन्नता हुई।
संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में संपन्न हुआ कार्यक्रम
नूरानपुर स्थित गोरक्ष पीठ आश्रम में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के समापन समारोह में
मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ पर विराजमान कथाव्यास संत अंजलि शरण का अभिनंदन किया। उन्होंने मंच पर
उपस्थित संतों को नमन किया और धार्मिक आयोजनों को समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला बताया।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री संजय गंगवार,
एमएलसी सुधीर गुप्ता, संजीव प्रताप सिंह, विधायक बाबूराम पासवान, विवेक वर्मा, स्वामी प्रवक्तानंद,
महंत हनुमान नाथ महाराज सहित बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री के संबोधन का प्रमुख संदेश यही रहा कि रामराज्य की कल्पना में समाज के
प्रत्येक व्यक्ति के लिए न्याय, सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर का महत्व है।
प्रश्न 1: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामराज्य को लेकर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि रामराज्य में भेदभाव और तुष्टिकरण नहीं होना चाहिए।
समाज के हर वर्ग को सुरक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।
प्रश्न 2: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पीलीभीत में कहां पहुंचे थे?
उत्तर: मुख्यमंत्री पीलीभीत के बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम नूरानपुर स्थित गोरक्ष पीठ
आश्रम के शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में पहुंचे थे।
प्रश्न 3: मुख्यमंत्री ने अयोध्या के बारे में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के लंबे संघर्ष और अयोध्या में सड़क,
रेल तथा हवाई संपर्क सहित विकसित हुई सुविधाओं का उल्लेख किया।
प्रश्न 4: रामकथा कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद रहे?
उत्तर: कार्यक्रम में संतों, कथाव्यास संत अंजलि शरण, प्रदेश सरकार के मंत्री,
जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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