पाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंध 1947 में पाकिस्तान की आजादी के साथ शुरू हुए, लेकिन ये कभी स्थिर नहीं रहे। शीत युद्ध के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को सोवियत संघ के खिलाफ सहयोगी बनाया। 1954 के सैन्य समझौते से पाकिस्तान को सैन्य सहायता मिली, जो CENTO और SEATO जैसे गठबंधनों का हिस्सा था। हालांकि, 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में अमेरिका की तटस्थता ने पाकिस्तान को निराश किया। 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के बांग्लादेश बनने में अमेरिका की चुप्पी ने संबंधों में दरार डाली। फिर भी, 1980 के दशक में सोवियत-अफगान युद्ध ने दोनों को करीब लाया। अमेरिका ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर की मदद दी ताकि मुजाहिदीन को सोवियत के खिलाफ हथियार पहुंचें।
ऐतिहासिक संघर्ष और तनाव
9/11 हमलों के बाद संबंधों में नया मोड़ आया। राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अमेरिका के ‘आतंकवाद के खिलाफ युद्ध’ में शामिल होकर अरबों डॉलर की सहायता हासिल की। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया, लेकिन ओसामा बिन लादेन का 2011 में एबटाबाद में अमेरिकी नेवी सील्स द्वारा मारा जाना पाकिस्तान के लिए अपमानजनक था। पाकिस्तान ने इसे अपने संप्रभुता का उल्लंघन बताया। इसके बाद ड्रोन हमलों ने विवाद बढ़ाया, जिसमें सैकड़ों नागरिक मारे गए। अमेरिका ने पाकिस्तान को ‘मेजर नॉन-नाटो अलाइड’ का दर्जा दिया, लेकिन हाफिज सईद जैसे आतंकियों को शरण देने के आरोप लगाए।
परमाणु कार्यक्रम ने भी तनाव पैदा किया। 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए। अब्दुल कादिर खान के परमाणु तस्करी नेटवर्क का खुलासा 2004 में हुआ, जिसने पाकिस्तान की छवि खराब की। फिर भी, अमेरिका ने पाकिस्तान को परमाणु हथियारों की सुरक्षा में मदद की। आर्थिक रूप से, अमेरिका पाकिस्तान का सबसे बड़ा दानदाता रहा। 2001-2021 तक 330 अरब डॉलर से ज्यादा सहायता दी गई, जिसमें कोविड वैक्सीन और बाढ़ राहत शामिल है। लेकिन IMF लोन में अमेरिकी दबाव से CPEC पर सवाल उठे।
आर्थिक और व्यापारिक संबंध
पाकिस्तान-अमेरिका व्यापार 2025 में 7 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचा। अमेरिका पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, जहां टेक्सटाइल और चावल भेजे जाते हैं। USAID ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में निवेश किया। हालांकि, व्यापार असंतुलन है—अमेरिका ज्यादा आयात करता है। 2026 में ट्रंप प्रशासन की वापसी से टैरिफ युद्ध की आशंका है, जो पाकिस्तानी निर्यात को प्रभावित कर सकता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को अमेरिका भारत के साथ मिलकर चुनौती दे रहा है।
वर्तमान चुनौतियां और भविष्य
2021 के अफगानिस्तान से अमेरिकी撤退 ने पाकिस्तान को तालिबान के करीब धकेला। अमेरिका ने पाकिस्तान पर आतंकवाद रोकने का दबाव बनाया, लेकिन TTP हमलों में वृद्धि हुई। 2026 में इमरान खान की वापसी या शहबाज शरीफ सरकार के साथ संबंध सुधारने की कोशिश हो रही। जलवायु परिवर्तन पर सहयोग बढ़ा—2022 बाढ़ में अमेरिका ने 200 मिलियन डॉलर दिए। मानवाधिकार उल्लंघनों पर अमेरिका आलोचना करता है, खासकर बलूचिस्तान और सिंध में।
भारत कारक महत्वपूर्ण है। अमेरिका भारत को क्वाड और I2U2 जैसे गठबंधनों में मजबूत कर रहा, जो पाकिस्तान को असुरक्षित महसूस कराता है। कश्मीर पर अमेरिका तटस्थ है, लेकिन मोदी सरकार के साथ निकटता पाकिस्तान को चुभती है। परमाणु अप्रसार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों को सहयोग बढ़ाना होगा।
निष्कर्ष: संतुलित साझेदारी की जरूरत
पाकिस्तान vs USA संबंध अवसर और चुनौतियों से भरे हैं। ऐतिहासिक गठजोड़ से सीखते हुए, दोनों को आतंकवाद, अर्थव्यवस्था और जलवायु पर फोकस करना चाहिए। अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति में पाकिस्तान को महत्वपूर्ण सहयोगी बनाना होगा