ओमान के पास वाणिज्यिक जहाज पर हुए मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले देवरिया जिले के गौरी बाजार क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव निवासी सूरज यादव का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा। करीब 12 दिनों के लंबे इंतजार के बाद जब ताबूत में सूरज का शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। अंतिम दर्शन के लिए गांव और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए।
ताबूत पहुंचते ही गम में डूबा पूरा गांव
सूरज का पार्थिव शरीर एंबुलेंस से गांव पहुंचते ही माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार और ग्रामीण काफी समय से शव के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही ताबूत घर के सामने रखा गया, परिजन अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
मां पुष्पा देवी बेटे का शव देखकर खुद को संभाल नहीं सकीं। वह बेटे से लिपटकर रोने लगीं और कुछ देर बाद बेसुध हो गईं। पिता ओमप्रकाश यादव भी बेटे को अंतिम बार देखकर भावुक हो उठे। परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों का भी रो-रोकर बुरा हाल रहा।
रोजगार के लिए विदेश गया था सूरज
करमाजीतपुर निवासी सूरज यादव रोजगार के सिलसिले में अगस्त 2026 में ओमान गया था। वह समुद्री जहाज पर काम करता था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी करने के बाद सूरज अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
बताया गया कि 23 सितंबर को भारत लौट रहे एक वाणिज्यिक जहाज को ओमान के पूर्वी तट के पास मिसाइल हमले का सामना करना पड़ा। घटना के दौरान जहाज पर सवार लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूरज भी अन्य लोगों के साथ समुद्र में कूदा, लेकिन हादसे में उसे गंभीर चोट आई और उसकी मौत हो गई।
कई दिनों के इंतजार के बाद गांव पहुंचा शव
हादसे के बाद सूरज के परिजन लगातार उसके पार्थिव शरीर के गांव आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद रविवार को शव भारत लाया गया। इसके बाद विशेष विमान के जरिए शव दिल्ली पहुंचा और वहां से गोरखपुर लाया गया।
दोपहर करीब 3:20 बजे पार्थिव शरीर गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचा। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लगभग चार बजे शव परिजनों को सौंपा गया। इसके बाद एंबुलेंस से पार्थिव शरीर को करमाजीतपुर गांव ले जाया गया।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़
सूरज के अंतिम दर्शन के लिए गांव में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। परिवार के दुख में शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से भी ग्रामीण पहुंचे। अंतिम दर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा।
भीड़ बढ़ने के कारण गांव में कुछ समय के लिए व्यवस्था संभालने की जरूरत पड़ी। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव यात्रा के दौरान व्यवस्था बनाए रखी।
गोरखपुर मार्ग से निकली अंतिम यात्रा
घर से सूरज की अंतिम यात्रा निकली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा उसमें शामिल हुए। शव यात्रा करमाजीतपुर से भटौली बुजुर्ग, खरोह चौराहा होते हुए गोरखपुर मुख्य मार्ग की ओर गई।
यात्रा में शामिल लोगों ने सूरज को भावभीनी विदाई दी। कई युवाओं ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाकर अपने गांव के युवा को अंतिम सम्मान दिया।
पिता ने कांपते हाथों से दी मुखाग्नि
शव यात्रा मझना नाला के पास स्थित श्मशान घाट पहुंची। वहां देर शाम अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। बेटे को खोने के दर्द के बीच पिता ओमप्रकाश यादव ने सूरज को मुखाग्नि दी।
जिस बेटे से परिवार को भविष्य की उम्मीदें थीं, उसकी अंतिम विदाई का दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव के लोगों ने परिवार को ढांढस बंधाया और इस दुख की घड़ी में साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
परिवार के लिए कभी न भरने वाला नुकसान
सूरज की मौत ने उसके परिवार के सामने गहरा संकट खड़ा कर दिया है। परिवार को उम्मीद थी कि
विदेश में नौकरी के जरिए वह अपने भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा,
लेकिन समुद्री जहाज पर हुए हमले ने इन उम्मीदों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
सूरज का पार्थिव शरीर भले ही अपने गांव पहुंच गया, लेकिन उसके जाने का
दुख परिवार और ग्रामीणों के लिए लंबे समय तक बना रहेगा। गांव में
अब भी मातम का माहौल है और लोग इस घटना को लेकर गहरे सदमे में हैं।
घटना ने खड़े किए कई सवाल
विदेश में रोजगार करने वाले भारतीय कामगारों की सुरक्षा एक बार फिर चर्चा का विषय बनी है।
समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव और संघर्ष की घटनाओं के बीच
ऐसे हादसे परिवारों के लिए बड़ी चिंता पैदा करते हैं।
सूरज का मामला भी इसी चिंता को सामने लाता है। बेहतर रोजगार और
परिवार का भविष्य संवारने के लिए विदेश जाने वाला एक युवा अचानक
ऐसी घटना का शिकार हो गया, जिसकी कल्पना उसके परिवार ने कभी नहीं की थी।
निष्कर्ष
देवरिया के करमाजीतपुर गांव में सूरज यादव की अंतिम विदाई बेहद भावुक माहौल में हुई।
ओमान के पास हुए मिसाइल हमले में जान गंवाने के बाद करीब 12 दिन के
इंतजार से गुजर रहे परिवार को आखिरकार अपने बेटे का अंतिम दर्शन मिला।
पिता ने नम आंखों से मुखाग्नि देकर बेटे को अंतिम विदाई दी। पूरे गांव ने एकजुट होकर सूरज की
अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
FAQ
1. सूरज यादव कौन थे?
सूरज यादव देवरिया जिले के गौरी बाजार क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव के निवासी थे और
रोजगार के सिलसिले में ओमान गए थे।
2. सूरज यादव की मौत कैसे हुई?
बताई गई जानकारी के अनुसार, 23 सितंबर को भारत लौट रहे वाणिज्यिक जहाज पर
ओमान के पूर्वी तट के पास मिसाइल हमला हुआ। इस घटना में सूरज की जान चली गई। Amar Ujala
3. सूरज यादव का शव गांव कब पहुंचा?
सूरज यादव का पार्थिव शरीर रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को उनके पैतृक गांव पहुंचा। Amar Ujala
4. सूरज यादव का अंतिम संस्कार कहां हुआ?
उनका अंतिम संस्कार गोरखपुर-देवरिया मार्ग के मझना नाला के पास स्थित श्मशान घाट पर किया गया। Amar Ujala
5. सूरज यादव को मुखाग्नि किसने दी?
सूरज यादव के पिता ओमप्रकाश यादव ने अंतिम संस्कार के दौरान मुखाग्नि दी। Amar Ujala
6. शव भारत कैसे पहुंचा?
पार्थिव शरीर पहले दिल्ली लाया गया और इसके बाद गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचाया गया। वहां से एंबुलेंस द्वारा शव को पैतृक गांव ले जाया गया। Amar Ujala
7. सूरज के अंतिम दर्शन के लिए कितने लोग पहुंचे?
गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा अंतिम दर्शन तथा अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
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