नेपाल के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों और नालों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि का खतरा बढ़ गया है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने कई क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी करते हुए लोगों से नदी-नालों और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।
इस स्थिति का असर भारत-नेपाल सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिलों पर भी पड़ सकता है। सिद्धार्थनगर में प्रशासन पहले से ही राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, बानगंगा और अन्य जलधाराओं के जलस्तर पर निगरानी बनाए हुए है।
17 जिलों में अचानक बाढ़ का ज्यादा खतरा
नेपाल के हाइड्रोलॉजी एवं मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के अनुसार गंडकी और लुंबिनी प्रांत के कई हिस्सों में छोटी नदियों में अचानक बाढ़ आने का खतरा अधिक है।
जिन 17 जिलों को ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है, उनमें लामजुंग, कास्की, मनांग, मुस्तांग, म्यागदी, बागलुंग, पर्वत, तनहुन, स्यांगजा, रूपनदेही, कपिलवस्तु, नवलपरासी पूर्व-पश्चिम, पाल्पा और गुल्मी समेत अन्य संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं।
कई नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका
नेपाल में लगातार बारिश के कारण कोशी, नारायणी और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। बूढ़ीगंडकी, मर्स्यांगडी, सेती, माडी, बादीगाड और कालीगंडकी जैसी नदियों में बहाव बढ़ने की संभावना जताई गई है।
नदी किनारे रहने वाले लोगों और निचले इलाकों में बसे परिवारों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सिद्धार्थनगर में भी बढ़ा नदियों का जलस्तर
नेपाल में बारिश का असर सिद्धार्थनगर की नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों बानगंगा में नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद जलप्रवाह बढ़ा था। वहीं बूढ़ी राप्ती के जलस्तर में भी कुछ घंटों के भीतर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी।
26 सितंबर की शाम की बाढ़ रिपोर्ट में कूड़ा नदी का जलस्तर उसके खतरे के स्तर तक पहुंच गया था, जबकि बूढ़ी राप्ती का जलस्तर भी खतरे के निशान के बेहद करीब था।
बूढ़ी राप्ती और अन्य नदियां लाल निशान के पार
27 सितंबर के ताजा अपडेट में सिद्धार्थनगर की बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, तेलार और कूड़ा नदी के लाल निशान पार करने की जानकारी सामने आई है। बूढ़ी राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बताया गया है और कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी रास्तों तक पहुंचने लगा है।
इससे नदी किनारे बसे गांवों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में भी पानी पहुंचने की सूचना है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
सिद्धार्थनगर में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने नदी क्षेत्रों और तटबंधों का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। सिंचाई विभाग को तटबंधों की लगातार निगरानी करने और किसी भी संभावित समस्या की तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की ओर से लोगों से नदी, तटबंध और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की गई है।
नेपाल से आने वाले पानी पर यूपी की नजर
भारत-नेपाल सीमा से लगे जिलों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहने पर
वहां से आने वाले पानी का असर उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती नदियों में दिखाई दे सकता है।
सिद्धार्थनगर के साथ-साथ महाराजगंज और आसपास के जिलों में भी नदी जलस्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है।
महाराजगंज क्षेत्र में नारायणी समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
नदी किनारे या निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए।
बढ़ते पानी के दौरान नदी या नाले को पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
रात के समय जलभराव वाले रास्तों पर अनावश्यक यात्रा से बचना और
जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए तैयार रहना जरूरी है।
आगे भी स्थिति पर नजर
नेपाल में बारिश और जलस्तर की स्थिति लगातार बदल रही है। इसलिए सीमावर्ती जिलों में प्रशासन और
सिंचाई विभाग को नदियों के जलस्तर तथा तटबंधों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखनी होगी।
फिलहाल सबसे ज्यादा चिंता उन क्षेत्रों को लेकर है जहां छोटी नदियों में अचानक पानी बढ़ने की संभावना है।
FAQ: नेपाल बारिश और यूपी बाढ़ का खतरा
नेपाल में कितने जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है?
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने 17 जिलों में छोटी नदियों में
अचानक बाढ़ के अधिक खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है।
क्या नेपाल की बारिश का असर उत्तर प्रदेश पर पड़ सकता है?
हां। भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों की कई नदियों का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में है।
वहां लगातार बारिश होने पर सीमावर्ती यूपी की नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है।
सिद्धार्थनगर में कौन-कौन सी नदियां बढ़ रही हैं?
सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, कूड़ा और तेलार समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है।
प्रशासन ने क्या तैयारी की है?
प्रशासन ने नदी और तटबंध क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाई है तथा
संबंधित विभागों को लगातार स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
लोगों को क्या करना चाहिए?
नदी और नालों के किनारे जाने से बचें, जलभराव वाले रास्तों पर सावधानी बरतें और
प्रशासन की ओर से जारी किसी भी निकासी या सुरक्षा निर्देश का पालन करें।
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