राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में वृंदावन और छत्तीसगढ़ जैसे स्थानों पर हिंदू एकता पर जोर देते हुए महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिंदू समाज कभी शत्रुओं की वीरता से नहीं हारा, बल्कि आंतरिक फूट के कारण हारता रहा। एकता ही सनातन समाज को बांटने वालों का मुंहतोड़ जवाब देगी।
मोहन भागवत का वृंदावन भाषण: फूट का राज खोला
वृंदावन में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा, “हिंदू समाज कभी दूसरों के शौर्य और वीरता से नहीं हारा, बल्कि फूट की वजह से हमेशा हार गया।” सनातन समाज जब एक होता है, तभी बांटने वालों के टुकड़े होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि एकजुट हिंदू समाज को बांटने की साजिशें जारी रहती हैं। यह संदेश 9 जनवरी 2026 को वायरल हुआ।
भागवत जी ने ऐतिहासिक उदाहरण देकर समझाया कि विभाजनकारी शक्तियां हमेशा एकता तोड़ने का प्रयास करती हैं। संगठित समाज ही राष्ट्र का भाग्य बदल सकता है। वर्तमान समय में यह पाठ विशेष रूप से प्रासंगिक है जब सीमाओं पर चुनौतियां बढ़ रही हैं।
छत्तीसगढ़ हिंदू सम्मेलन: समरसता का मंत्र
31 दिसंबर 2025 को सोनपैरी हिंदू सम्मेलन में भागवत ने कहा, “देश सबका है, जाति-धन-भाषा से ऊपर उठें।” सभी को अपने जैसा समझें, मंदिर-पानी सबके लिए खुले रहें। उन्होंने मंगल संवाद की सलाह दी- परिवार में साप्ताहिक भोजन, प्रार्थना और चर्चा से अकेलापन दूर होगा। मंडल स्तर पर हिंदू एकजुट हो रहे हैं, जो RSS के 100 वर्ष पूरे होने का संदेश है। भाषा सीखें- घर में मातृभाषा, दूसरे राज्य की भाषा अपनाएं। यह व्यावहारिक समरसता समाज को मजबूत बनाएगी।
एकता के अनमोल वचन: भागवत जी के उद्धरण
संगठित समाज ही भाग्य परिवर्तन की कुंजी है।””
सृष्टि की सारी विविधता में एकता का रूप है।””
हिंदू एक जीवन दृष्टि है, विचार है, जीवन शैली है।”ये वचन समाज को एकात्मता की प्रेरणा देते हैं।
भारत में सभी भारतीय हिंदू हैं क्योंकि पूर्वज एक हैं। प्रतिस्पर्धा स्वस्थ हो, युद्ध नहीं।
भोपाल युवा संवाद: एकता से बड़ा भारत
2 जनवरी 2026 को भोपाल में भागवत ने कहा, “एकता और गुणवत्ता वाला समाज भारत को बड़ा बनाएगा।” यह संघ का नहीं, समाज का कार्य होगा। आने वाले समय में एकजुट वातावरण बनाना हमारी भूमिका है। RSS के 100 वर्ष RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर यह संदेश शक्ति और धर्मनिष्ठा पर केंद्रित रहा।
हिंदू एकता का महत्व: ऐतिहासिक संदर्भ
मई 2025 में भागवत ने जोर दिया, “हिंदू समाज की एकता से शक्तिशाली और धर्मनिष्ठ बनेगा भारत।” सीमाओं पर बुरी ताकतें सक्रिय हैं, हमें अजेय शक्ति चाहिए। संघ प्रार्थना में ‘अजय्यं च विश्वस्य देहि मे शक्ति’ का जाप इसी का प्रतीक है।
सामाजिक सद्भाव के लिए संवाद जरूरी
भागवत ने कहा, “सद्भाव के लिए सभी को त्याग करना होगा। एकतरफा प्रयास नहीं चलेगा।” पूर्वज एक हैं, मातृभूमि समान। भावनात्मक एकीकरण आवश्यक है। यह संदेश 2023 से प्रासंगिक बना हुआ है।
निष्कर्ष में एकता पाठ का सार
मोहन भागवत का एकता का पाठ जाति, भाषा, धन से ऊपर उठकर समाज निर्माण का आह्वान है। फूट त्यागें, संगठित हों तो भारत विश्व गुरु बनेगा। RSS के 100 वर्ष इसकी गवाही देते हैं।