अमेरिकी चुनाव में भारतीय मूल की पिया डांडिया की जीत, बनीं नई सांसद; टीचर से अमेरिकी कांग्रेस तक का सफर, दिल्ली की झुग्गियों से भी जुड़ा है नाता

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव 2026 में भारतीय मूल की पिया डांडिया ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) का चुनाव जीत लिया है। पिया डांडिया ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व मरीन सैनिक केसी असकर को हराकर अमेरिकी संसद में अपनी जगह बनाई है।

इस जीत के साथ पिया डांडिया भारतीय-अमेरिकी समुदाय की नई निर्वाचित सांसद बन गई हैं। उनकी सफलता इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। वह हाईस्कूल की प्रिंसिपल भी रह चुकी हैं और शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए काम कर चुकी हैं।

पिया डांडिया के माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बस गए थे। उनका जन्म फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ और वहीं उनका बचपन बीता। उनके जीवन और सामाजिक कार्यों की कहानी में दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को पढ़ाने का अनुभव भी शामिल बताया गया है।

फ्लोरिडा के 22वें डिस्ट्रिक्ट से जीता चुनाव, केसी असकर को हराया

अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव में पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर से था, जो पूर्व मरीन सैनिक हैं।

घोषित चुनाव परिणामों के अनुसार पिया डांडिया को 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी केसी असकर को 49.1 प्रतिशत वोट मिलने की जानकारी प्रकाशित हुई। इस जीत के साथ वह अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की नई सदस्य बन गई हैं।

फ्लोरिडा का 22वां कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट इस चुनाव में महत्वपूर्ण मुकाबलों में शामिल था। निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण यानी री-डिस्ट्रिक्टिंग के बाद यह सीट नए स्वरूप में सामने आई थी।

पिया डांडिया ने पहले फ्लोरिडा के 21वें डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन नेता ब्रायन मास्ट को चुनौती देने की योजना बनाई थी। बाद में उन्होंने अपना चुनावी क्षेत्र बदलकर 22वें डिस्ट्रिक्ट से चुनाव लड़ा।

इस सीट पर उनकी जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

कौन हैं पिया डांडिया? भारतीय माता-पिता से जुड़ी हैं जड़ें

पिया डांडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी नागरिक हैं। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनका जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ।

पिया ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद वह शिक्षा प्रशासन और सामाजिक नीति से जुड़े कार्यों में आगे बढ़ीं। उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम क्षेत्र में एक हाईस्कूल की प्रिंसिपल के रूप में भी काम किया।

उनका मानना रहा है कि शिक्षा के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर भविष्य दिया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने कम आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों के लिए एक हाईस्कूल की स्थापना की।

उनके अभियान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, उनके स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाले सभी विद्यार्थियों को कॉलेज में प्रवेश मिला। इनमें लगभग 86 प्रतिशत विद्यार्थी कम आय वाले परिवारों से आते थे।

सिर्फ 28 वर्ष की उम्र में वह अपने स्थापित स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बन गई थीं। इस उपलब्धि के कारण उन्हें अमेरिका की कम उम्र में हाईस्कूल प्रिंसिपल बनने वाली शिक्षाविदों में गिना गया।

दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बच्चों को पढ़ाने का अनुभव भी जुड़ा

पिया डांडिया की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत से उनका सामाजिक जुड़ाव भी है। उनके शुरुआती करियर के बारे में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, उन्होंने दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का काम किया था।

इस अनुभव ने उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की

शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर दिया।

उन्होंने महसूस किया कि कई प्रतिभाशाली बच्चों को केवल आर्थिक परिस्थितियों के कारण अच्छी शिक्षा और

बेहतर अवसर नहीं मिल पाते। इसी सोच के आधार पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे प्रयास किए, जिनसे कम

आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को भी कॉलेज और रोजगार तक पहुंचने का अवसर मिल सके।

उनका चुनावी अभियान भी शिक्षा, आर्थिक अवसरों और समुदायों को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा।

अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने के बाद उनसे जुड़े लोगों को उम्मीद है कि

वह शिक्षा और आर्थिक समानता जैसे विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठा सकेंगी।

भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम ने भी बचाई अपनी सीट

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में पिया डांडिया के अलावा भारतीय मूल के

एक अन्य नेता सुहास सुब्रमण्यम ने भी जीत दर्ज की है।

डेमोक्रेटिक पार्टी के सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से

दोबारा जीत हासिल की। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार

डेव बेकविथ को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपनी जगह बरकरार रखी।

सुहास सुब्रमण्यम का जन्म अमेरिका के ह्यूस्टन में भारतीय माता-पिता के घर हुआ था।

वह पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन में

व्हाइट हाउस के तकनीकी नीति सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं।

उन्होंने वर्जीनिया की राजनीति में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्ष 2024 में

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जाने के बाद अब 2026 में भी उन्होंने अपनी सीट बचा ली है।

इस चुनाव में भारतीय मूल के कई अन्य उम्मीदवारों पर भी नजर रही। हालांकि

सभी उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली। ओहियो के गवर्नर चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक

रामास्वामी को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से हार का सामना करना पड़ा।

अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती भागीदारी

अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार चर्चा का विषय रही है।

शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, कारोबार और प्रशासन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई लोग अब अमेरिकी राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

पिया डांडिया की जीत इसी राजनीतिक भागीदारी का एक नया उदाहरण है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र से अपनी

सार्वजनिक पहचान बनाई और अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा तक पहुंचने में सफलता हासिल की है।

उनकी जीत से भारतीय-अमेरिकी समुदाय में भी उत्साह देखा जा रहा है।

खासतौर पर शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए

उनकी यात्रा एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने के बाद अब पिया डांडिया के सामने अपने

चुनावी वादों को नीतियों और विधायी कार्यों में बदलने की जिम्मेदारी होगी।

निष्कर्ष: भारतीय मूल की पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत

हासिल कर अमेरिकी राजनीति में अपनी नई पहचान बनाई है।

शिक्षक से हाईस्कूल प्रिंसिपल और फिर अमेरिकी सांसद तक का

उनका सफर शिक्षा और सामाजिक कार्यों से जुड़ा रहा है। उनकी जीत के साथ अमेरिकी

संसद में भारतीय मूल के प्रतिनिधित्व को एक और नया चेहरा मिला है।

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