परिचय
देश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी दो अहम खबरें सामने आई हैं। मेडिकल डिवाइस के नियमन को और मजबूत करने की दिशा में बदलाव लागू किए गए हैं, वहीं दवा नियामक ने पेनकिलर और एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चेतावनी जारी की है।
मुख्य खबर
स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता तथा सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर नियामकीय स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं। मेडिकल डिवाइस के मामले में केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में Medical Devices (Third Amendment) Rules, 2026 को अधिसूचित किया। इसमें कुछ प्रावधानों के तहत गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को भी शामिल किया गया है और सरकारी मेडिकल डिवाइस परीक्षण प्रयोगशालाओं से संबंधित नियमों में बदलाव किए गए हैं।
नए संशोधन के अनुसार संबंधित नियमों में मानकों के साथ Quality Management System (QMS) का उल्लेख जोड़ा गया है। इसके अलावा मेडिकल डिवाइस से जुड़े कुछ प्रावधानों में यूरोपीय संघ के देशों को भी शामिल किया गया है। ये बदलाव मेडिकल डिवाइस के नियमन, परीक्षण और गुणवत्ता से जुड़े ढांचे का हिस्सा हैं।
भारत में मेडिकल डिवाइस पहले से ही Drugs and Cosmetics Act, 1940 और Medical Devices Rules, 2017 के तहत विनियमित हैं। नियामक ढांचे का उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन को सुनिश्चित करना है।
पेनकिलर के इस्तेमाल पर दवा नियामक की चेतावनी
दूसरी ओर, Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने 21 सितंबर 2026 के सर्कुलर में पेनकिलर, खासकर Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs (NSAIDs) और एंटीबायोटिक के अनुचित इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है। नियामक ने इनके बार-बार या लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय सलाह इस्तेमाल से किडनी संबंधी जटिलताओं और Chronic Kidney Disease (CKD) के जोखिम की ओर ध्यान दिलाया है।
CDSCO ने कहा है कि इन दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार, उचित खुराक और उचित अवधि के लिए किया जाना चाहिए। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है या किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम है, उन्हें NSAIDs लेने से पहले डॉक्टर को अपनी स्थिति बतानी चाहिए।
एंटीबायोटिक को लेकर भी सावधानी
नियामक ने एंटीबायोटिक की खुद से शुरुआत करने और बची हुई दवाओं का दोबारा इस्तेमाल करने से भी बचने की सलाह दी है।
सामान्य वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक आम तौर पर उपयोगी नहीं होते है
अनावश्यक इस्तेमाल से antimicrobial resistance यानी दवाओं के प्रति बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का जोखिम रहता है।
फार्मासिस्ट, खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को भी दवाओं की बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन करने तथा मरीजों को उचित जानकारी देने पर जोर दिया गया है।
Facts/Details
Medical Devices Rules, 2017 में 2026 में कई संशोधन किए गए हैं।
अगस्त 2026 के संशोधन में Quality Management System से जुड़े प्रावधान जोड़े गए।
ने 21 सितंबर 2026 के सर्कुलर में NSAIDs और एंटीबायोटिक के अनुचित इस्तेमाल पर चेताया।
लंबे समय तक या बार-बार NSAIDs लेने से किडनी संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।
एंटीबायोटिक का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी बताया गया है।
Statement
CDSCO की सलाह का मुख्य उद्देश्य दवाओं के तर्कसंगत, सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
नियामक ने डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, अस्पतालों और आम लोगों से निर्धारित नियमों तथा चिकित्सकीय सलाह का पालन करने को कहा है।
FAQ
1. पेनकिलर का ज्यादा इस्तेमाल क्यों चिंता का विषय है?
कुछ NSAIDs के बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल से किडनी संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।
2. क्या पेनकिलर पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए?
नहीं। इन्हें चिकित्सकीय जरूरत, सही खुराक और उचित अवधि के अनुसार इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
3. क्या वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक जरूरी है?
अधिकांश सामान्य वायरल संक्रमणों में एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होते। डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हें नहीं लेना चाहिए।
4. मेडिकल डिवाइस नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
2026 के संशोधन में कुछ प्रावधानों में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली और सरकारी परीक्षण प्रयोगशालाओं से संबंधित बदलाव किए गए हैं।
5. किडनी की बीमारी वाले मरीज क्या सावधानी रखें?
NSAIDs लेने से पहले डॉक्टर को अपनी किडनी की स्थिति और अन्य दवाओं की जानकारी देनी चाहिए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नए नियामकीय बदलावों के साथ दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी जोर बढ़ा है।
मेडिकल डिवाइस की गुणवत्ता व्यवस्था मजबूत करने के प्रयासों के बीच CDSCO की पेनकिलर और एंटीबायोटिक संबंधी चेतावनी लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह दवा लेने से बचने का संदेश देती है।