UP Politics News: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से जुड़ी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में ऐसा कोई कारण नहीं होना चाहिए जिससे मतदाता के मन में यह शंका पैदा हो कि उसका वोट सही प्रत्याशी के पक्ष में दर्ज हुआ है या नहीं। उनका बयान ऐसे समय आया है जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और मतदान व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
मायावती ने क्या कहा?
मायावती ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक मतदाता को यह विश्वास होना चाहिए कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसका मत उसी उम्मीदवार के खाते में दर्ज हुआ है।
उन्होंने अपने बयान में EVM के साथ-साथ VVPAT व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसी मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर संदेह बना रहता है तो चुनावी व्यवस्था में विश्वास प्रभावित हो सकता है।
बैलेट पेपर और EVM का किया जिक्र
मायावती ने देश में मतदान व्यवस्था के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआती दशकों में बैलेट पेपर से मतदान होता था और बाद में EVM का इस्तेमाल शुरू हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा की ओर से भी EVM को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। मायावती ने सवाल किया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने EVM व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय इसे जारी क्यों रखा। यह उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है।
बसपा का EVM पर पुराना रुख
मायावती ने कहा कि बसपा लंबे समय से EVM से मतदान का विरोध करती रही है। उन्होंने दावा किया कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के बीच EVM को लेकर आशंकाएं हैं और चुनाव प्रक्रिया में इन आशंकाओं को दूर किया जाना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि मतदान व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसी भी मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर संदेह की स्थिति न बने।
VVPAT को लेकर भी सवाल
मायावती ने EVM के साथ इस्तेमाल होने वाली VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सभी VVPAT पर्चियों की गिनती और EVM में दर्ज मतों के मिलान को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मशीनों में छेड़छाड़ और दूर से हैक किए जाने की आशंका का भी उल्लेख किया।
हालांकि, इन आशंकाओं और चुनावी व्यवस्था पर आधिकारिक पक्ष अलग है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि ECI की EVM स्टैंड-अलोन मशीनें हैं और नेटवर्क से जुड़ी नहीं होतीं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार VVPAT का इस्तेमाल मतदाता को यह देखने का अवसर देता है कि उसका वोट किस उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज हुआ है।
चुनाव आयोग की व्यवस्था क्या कहती है?
चुनाव आयोग की उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार EVM और VVPAT के इस्तेमाल के साथ कई स्तरों पर प्रक्रियाएं लागू हैं। मतदान के बाद EVM और VVPAT को सील किया जाता है और मतदान एजेंटों की मौजूदगी में संबंधित प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।
आधिकारिक जानकारी में यह भी बताया गया है कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक खंड में निर्धारित प्रक्रिया के तहत पांच मतदान केंद्रों की VVPAT पर्चियों की गिनती का अनिवार्य सत्यापन किया जाता है।
इस तरह EVM को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से उठाई जाने वाली आपत्तियों और चुनाव आयोग की ओर से बताई गई तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।
चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी टिप्पणी
मायावती ने अपने बयान में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने उनकी जीत को लेकर आरोप लगाए और EVM से संबंधित अपनी आशंकाओं को इससे जोड़ा।
चंद्रशेखर आजाद के संबंध में मायावती की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान हैं।
इन्हें किसी स्थापित तथ्य या न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR और चुनावी प्रक्रिया पर भी बहस
EVM के साथ-साथ देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी
राजनीतिक बहस चल रही है। ऐसे माहौल में मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और
मतदाताओं के भरोसे से जुड़े मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं।
हालिया राजनीतिक बयानों में अलग-अलग दलों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं और मांगें सामने रखी हैं।
दिल्ली और पंजाब की कानून-व्यवस्था पर भी बोलीं मायावती
मायावती ने अपने बयान में दिल्ली, पंजाब और कुछ अन्य राज्यों की कानून-व्यवस्था पर भी चिंता जताई।
उन्होंने संबंधित सरकारों से कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
मायावती का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में
आने वाले चुनावों के मद्देनजर चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा में हैं।
EVM को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के रुख भी सामने आते रहे हैं।
हालांकि, EVM की विश्वसनीयता और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी सवालों पर
किसी भी दावे को समझने के लिए राजनीतिक बयानों के साथ-साथ निर्वाचन
आयोग की आधिकारिक प्रक्रियाओं और उपलब्ध तथ्यों को देखना जरूरी है।
निष्कर्ष
मायावती ने EVM और VVPAT व्यवस्था को लेकर मतदाताओं के भरोसे का मुद्दा उठाया है।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर संदेह नहीं रहना चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी EVM-VVPAT
व्यवस्था के तकनीकी और प्रशासनिक सुरक्षा उपायों को रेखांकित करती है।
ऐसे में EVM को लेकर जारी राजनीतिक बहस में राजनीतिक दावों,
आधिकारिक प्रक्रियाओं और सत्यापित तथ्यों को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण रहेगा।
FAQ
Q1. मायावती ने EVM को लेकर क्या कहा?
मायावती ने कहा कि मतदाता के मन में अपने वोट के सही तरीके से
दर्ज होने को लेकर कोई संदेह नहीं रहना चाहिए।
Q2. क्या मायावती ने VVPAT पर भी सवाल उठाए?
हां, उन्होंने VVPAT पर्चियों की गिनती और EVM में दर्ज मतों के मिलान को लेकर सवाल उठाए हैं।
Q3. VVPAT क्या होता है?
VVPAT ऐसी व्यवस्था है जिसमें मतदान के बाद मतदाता को निर्धारित प्रक्रिया के तहत
यह देखने का अवसर मिलता है कि उसका वोट किस उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज हुआ है।
Q4. चुनाव आयोग EVM के बारे में क्या कहता है?
निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार ECI की EVM
स्टैंड-अलोन मशीनें हैं और नेटवर्क से जुड़ी नहीं होतीं। आयोग ने
EVM-VVPAT के लिए विभिन्न सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रियाएं भी बताई हैं।
Q5. क्या मायावती ने बैलेट पेपर की मांग की है?
मायावती ने अपने बयान में बैलेट पेपर और EVM व्यवस्था की तुलना करते हुए EVM पर आपत्तियां जताई हैं।
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