लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक लोकसभा की कार्यवाही से दूर रहने का फैसला किया है। यह कदम बजट सत्र 2026 के दौरान आया, जब कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाते हुए नोटिस सौंपा। सूत्रों के अनुसार, ओम बिरला ने लोकसभा सचिव जनरल को नोटिस की जांच के निर्देश दिए हैं, और चर्चा होने तक वे सदन में शामिल नहीं होंगे।
विपक्ष के आरोप
कांग्रेस ने ओम बिरला पर राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकने का आरोप लगाया। इसके अलावा, 8 विपक्षी सांसदों के निलंबन और चीन सीमा विवाद पर चर्चा रोकने को संसदीय नियमों का उल्लंघन बताया गया। इंडिया गठबंधन की बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ, जिसमें 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, हालांकि राहुल गांधी ने हस्ताक्षर नहीं किए।
प्रक्रिया और नियम
अविश्वास प्रस्ताव के लिए नियम 94C के तहत कम से कम 50 सांसदों को समर्थन जताना जरूरी है, उसके बाद पीठासीन अधिकारी चर्चा की अनुमति देता है। यह नोटिस लोकसभा सचिव जनरल को दिया गया, और 9 फरवरी 2026 को बजट सत्र के दूसरे चरण में चर्चा संभव है। इतिहास में स्पीकर के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव दुर्लभ रहे हैं, और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को परखेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
एंयह फैसला विपक्ष और NDA के बीच तनाव बढ़ा रहा है, जहां कांग्रेस, सपा, आरजेडी, डीएमके ने समर्थन दिया, लेकिन टीएमसी का रुख अस्पष्ट है। स्पीकर का कदम संसदीय गरिमा और तटस्थता को मजबूत करने वाला बताया जा रहा है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। बजट सत्र की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है।
चर्चा प्रक्रिया
चर्चा शुरू होने पर कम से कम 50 सांसदों को समर्थन में खड़े होना होगा। स्पीकर ओम बिरला अनुपस्थित रहेंगे, इसलिए डिप्टी स्पीकर या अन्य सदस्य अध्यक्षता करेंगे। विपक्ष के 118 हस्ताक्षरों के बावजूद, NDA के बहुमत से प्रस्ताव पास होने की संभावना कम है।