अलकनंदा बेसिन में 131 ग्लेशियल झीलें, बढ़ता आकार दे रहा बड़े बाढ़ खतरे का संकेत

हिमालयी क्षेत्र में तेजी से बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों ने उत्तराखंड के अलकनंदा नदी बेसिन को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। एक नए अध्ययन में वर्ष 1994 से 2023 के बीच इस क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया गया है। अध्ययन के मुताबिक इस अवधि में 57 नई ग्लेशियल झीलें बनीं और कुल संख्या बढ़कर 131 हो गई।

शोधकर्ताओं के अनुसार, कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ग्लेशियरों के पीछे हटने से नई झीलें बन रही हैं और पुरानी झीलों का क्षेत्रफल बढ़ रहा है। यदि किसी झील की प्राकृतिक बांध जैसी संरचना टूटती है तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी, मलबा और चट्टानें नीचे की ओर आ सकती हैं। ऐसी घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है।

30 वर्षों में झीलों के क्षेत्रफल में 67 प्रतिशत वृद्धि

शोध में 1994 से 2023 के बीच अलकनंदा बेसिन की 74 ग्लेशियल झीलों का सैटेलाइट डेटा के जरिए अध्ययन किया गया। इनमें 0.01 वर्ग किलोमीटर से बड़ी 24 झीलों के संयुक्त क्षेत्रफल में करीब 67 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इन झीलों का संयुक्त क्षेत्रफल 1994 में लगभग 0.97 वर्ग किलोमीटर था, जो 2023 तक बढ़कर करीब 1.62 वर्ग किलोमीटर हो गया।

57 नई झीलों का हुआ निर्माण

अध्ययन के दौरान अलकनंदा बेसिन में 57 नई ग्लेशियल झीलें बनने की पहचान हुई। इसके बाद इस बेसिन में दर्ज झीलों की कुल संख्या 131 तक पहुंच गई।

नई बनी झीलों में से 18 का क्षेत्रफल 0.01 वर्ग किलोमीटर से अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं ने ऐसी झीलों की लगातार निगरानी और विस्तृत मैदानी जांच की जरूरत बताई है।

वासुंधरा और बलबला झील में तेजी से बदलाव

अध्ययन में कुछ झीलों के आकार में विशेष रूप से तेज वृद्धि दर्ज की गई है। वासुंधरा झील का क्षेत्रफल 1994 से 2023 के बीच 261 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बलबला झील के क्षेत्रफल में इसी अवधि में 119 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

शोधकर्ताओं ने तेजी से बदल रही ऐसी झीलों पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई है, क्योंकि झील का आकार बढ़ने के साथ उसकी स्थिरता और संभावित जोखिम का आकलन भी जरूरी हो जाता है।

क्या भारत में नेपाल जैसी बाढ़ का खतरा है?

हिमालय में हाल की बाढ़ की घटनाओं ने ग्लेशियल झीलों और पर्वतीय क्षेत्रों की अस्थिरता पर ध्यान बढ़ाया है। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार किसी दूसरे क्षेत्र में हुई आपदा को हूबहू दोहराए जाने की भविष्यवाणी करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

हर हिमालयी घाटी की भौगोलिक संरचना, ग्लेशियर, ढलान और जल निकासी व्यवस्था अलग होती है। फिर भी ग्लेशियरों का पीछे हटना, झीलों का विस्तार, भूस्खलन, अत्यधिक बारिश और ढलानों की अस्थिरता एक साथ होने पर जोखिम बढ़ सकता है।

GLOF क्या होता है?

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF ऐसी बाढ़ है जिसमें ग्लेशियर के पास बनी झील का पानी अचानक बाहर निकल जाता है। झील को रोकने वाली बर्फ, मोरेन यानी चट्टानों-मलबे की प्राकृतिक बांध जैसी संरचना या दूसरी बाधा कमजोर होने पर यह स्थिति पैदा हो सकती है।

अचानक निकलने वाला पानी अपने साथ मलबा, मिट्टी और चट्टानें बहाकर नीचे की घाटियों तक पहुंच सकता है।

इससे नदी किनारे बसे गांवों, सड़कों, पुलों और

अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

सिर्फ सैटेलाइट निगरानी पर्याप्त नहीं

शोधकर्ताओं के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरें बड़े और दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में

झीलों के बदलाव को समझने में काफी उपयोगी हैं। इनके जरिए नई झीलों की पहचान,

क्षेत्रफल में बदलाव और तेजी से बढ़ रही झीलों की निगरानी की जा सकती है।

लेकिन किसी झील के वास्तविक खतरे का आकलन करने के लिए जमीन पर जाकर उसकी गहराई,

पानी की मात्रा, प्राकृतिक बांध की मजबूती,

आसपास की ढलानों और पानी के संभावित बहाव मार्ग की जांच करना भी जरूरी है।

अलकनंदा घाटी में निगरानी बढ़ाने की जरूरत

अलकनंदा बेसिन उत्तराखंड के महत्वपूर्ण हिमालयी नदी क्षेत्रों में शामिल है।

यहां होने वाले बड़े बदलावों का असर निचले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

इसलिए नई और तेजी से बढ़ रही ग्लेशियल झीलों की पहचान के साथ

उनके संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों का भी अध्ययन जरूरी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार सैटेलाइट निगरानी, मैदानी सर्वेक्षण, बेहतर बाढ़ मॉडल और

समय पर चेतावनी व्यवस्था को साथ लेकर चलना पर्वतीय क्षेत्रों में

आपदा जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

FAQ

प्रश्न: अलकनंदा बेसिन में कितनी ग्लेशियल झीलें दर्ज की गई हैं?
उत्तर: नए अध्ययन में 1994 से 2023 के दौरान 57

नई झीलों की पहचान के बाद कुल संख्या 131 बताई गई है।

प्रश्न: ग्लेशियल झीलों की संख्या क्यों बढ़ रही है?
उत्तर: ग्लेशियरों के पीछे हटने और उनके पिघलने से

कई स्थानों पर पानी जमा होने के कारण नई ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं।

प्रश्न: GLOF क्या है?
उत्तर: ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड वह स्थिति है जिसमें ग्लेशियल झील से

अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा बाहर निकलकर नीचे की ओर बाढ़ का रूप ले लेता है।

प्रश्न: अलकनंदा बेसिन की झीलों में कितना बदलाव आया है?
उत्तर: अध्ययन के अनुसार 0.01 वर्ग किलोमीटर से बड़ी 24 झीलों का संयुक्त क्षेत्रफल

1994 से 2023 के बीच लगभग 67 प्रतिशत बढ़ा।

प्रश्न: क्या नेपाल जैसी आपदा भारत में भी निश्चित रूप से होगी?
उत्तर: ऐसा निष्कर्ष वैज्ञानिक रूप से नहीं निकाला जा सकता। अलग-अलग हिमालयी क्षेत्रों की

भौगोलिक परिस्थितियां और आपदा के कारण अलग होते हैं। हालांकि बदलते ग्लेशियर, बढ़ती झीलें और

अस्थिर ढलान जोखिम की निगरानी की जरूरत को बढ़ाते हैं

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