खजनी सीओ के सामने अधिवक्ताओं ने दर्ज कराया बयान

परिचय

गोरखपुर के खजनी क्षेत्र में थानों की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार को लेकर अधिवक्ताओं ने क्षेत्राधिकारी दीपांशी राठौर के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। अधिवक्ताओं ने जमानतदार सत्यापन समेत विभिन्न पुलिस रिपोर्टों के नाम पर कथित रिश्वत मांगने के आरोप लगाते हुए पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था की मांग की।

मुख्य खबर

गोरखपुर के खजनी क्षेत्र में थानों में कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ अधिवक्ताओं ने अपनी आवाज उठाई है। 6 अक्टूबर को अधिवक्ताओं के एक दल ने क्षेत्राधिकारी खजनी दीपांशी राठौर के कार्यालय पहुंचकर पूर्व में की गई शिकायत और संबंधित घटनाक्रम के संबंध में अपना बयान दर्ज कराया।

बयान दर्ज कराने वाले अधिवक्ताओं में पिंटू साहनी, रितेश कुमार गिरी, दिवाकर निषाद, अम्बरीष पाण्डेय, चन्द्रिका भारती और राजकमल समेत अन्य लोग शामिल रहे। अधिवक्ताओं ने पुलिस थानों में जमानतदार सत्यापन, वाहन संबंधी रिपोर्ट, सीजर, पासपोर्ट सत्यापन तथा वांछित व्यक्तियों से संबंधित रिपोर्ट और आख्या तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

जमानत सत्यापन के नाम पर रुपये मांगने का आरोप

अधिवक्ताओं के अनुसार, थाना रामगढ़ताल से जुड़े मु०अ०सं० 244/2026 में अभियुक्त नेहा निषाद के जमानतदार का सत्यापन 17 सितंबर 2026 को न्यायालय से प्राप्त हुआ था। आरोप है कि सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान थाने के पैरोकार द्वारा कथित रूप से रुपये की मांग की गई।

अधिवक्ताओं का कहना है कि जब 1,000 रुपये देने की बात सामने आई तो कथित तौर पर इससे अधिक रकम की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस दौरान थाने के अधिकारियों तक पैसे पहुंचाने की बात भी कही गई।

इसके बाद 18 सितंबर को अधिवक्ता जमानतदार के सत्यापन के लिए खजनी थाने पहुंचे।

उनका आरोप है कि थाना प्रभारी ने जमानतदार को घर भेजने और स्वयं उसके घर जाकर सत्यापन करने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

एसएसपी से भी की गई थी शिकायत

अधिवक्ताओं ने बताया कि पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के समक्ष भी प्रार्थना पत्र दिया गया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिले के विभिन्न थानों में सरकारी रिपोर्ट और सत्यापन से जुड़े कार्यों के दौरान आम लोगों तथा अधिवक्ताओं से कथित रूप से रुपये मांगे जाते हैं।

अधिवक्ताओं ने मांग की है कि यदि किसी रिपोर्ट या सत्यापन के लिए कोई वैध सरकारी शुल्क निर्धारित है तो उसकी स्पष्ट रेट लिस्ट प्रत्येक थाने में सार्वजनिक रूप से लगाई जाए।

इससे लोगों को वास्तविक शुल्क की जानकारी मिल सकेगी और कथित अवैध वसूली पर रोक लगाई जा सकेगी।

अधिवक्ताओं ने रखीं प्रमुख मांगें

अधिवक्ताओं ने सीओ खजनी के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।

पहली, थानों में सरकारी शुल्क और संबंधित प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए।

दूसरी, जमानतदार सत्यापन, वाहन रिपोर्ट, सीजर, पासपोर्ट सत्यापन और अन्य आख्या को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए।

तीसरी मांग कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की है।

अधिवक्ताओं ने कहा कि आम जनता को पुलिस थानों में अपने वैध कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

उन्होंने पारदर्शी व्यवस्था लागू होने तक जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाते रहने की बात कही।

जमानत सत्यापन के नाम पर रुपये मांगने का आरोप

एसएसपी से भी की गई थी शिकायत

अधिवक्ताओं ने रखीं प्रमुख मांगें

Facts/Details

बयान 6 अक्टूबर 2026 को सीओ खजनी के समक्ष दर्ज कराया गया।

अधिवक्ताओं ने थानों की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत रखी।

रामगढ़ताल थाने से जुड़े मु०अ०सं० 244/2026 का उल्लेख किया गया।

जमानतदार सत्यापन में कथित रुपये मांगने का आरोप लगाया गया।

अधिवक्ताओं ने सरकारी शुल्क की रेट लिस्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

रिपोर्ट और सत्यापन की प्रक्रिया समयबद्ध करने की मांग की गई।

आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग रखी गई।

अधिवक्ताओं का कहना है कि पुलिस थानों में आम जनता और अधिवक्ताओं के वैध कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी प्रक्रिया के लिए सरकारी शुल्क निर्धारित है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

FAQ

Q1. अधिवक्ताओं ने किसके सामने बयान दर्ज कराया?खजनी क्षेत्राधिकारी दीपांशी राठौर के समक्ष।

Q2. अधिवक्ताओं ने क्या आरोप लगाए हैं?

उन्होंने जमानतदार सत्यापन और अन्य पुलिस रिपोर्टों के नाम पर कथित रूप से रुपये मांगने के आरोप लगाए हैं।

Q3. अधिवक्ताओं की प्रमुख मांग क्या है?

सरकारी शुल्क की स्पष्ट रेट लिस्ट, समयबद्ध प्रक्रिया और आरोपों की निष्पक्ष जांच उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।

Q4. क्या आरोपों की पुष्टि हो चुकी है?

नहीं। ये आरोप अधिवक्ताओं की शिकायत और बयान पर आधारित हैं। जांच के निष्कर्ष के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

खजनी में अधिवक्ताओं द्वारा दर्ज कराए गए बयान के बाद थानों की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हुई है।

अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।