लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के 20वें परिनिर्वाण दिवस पर पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद किया। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने लंबे समय से सामाजिक भेदभाव और शोषण का सामना कर रहे बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक बनाने तथा सत्ता में भागीदारी दिलाने के लिए ऐतिहासिक कार्य किया।
कांशीराम का जीवन सामाजिक परिवर्तन, समानता और बहुजन समाज के अधिकारों के संघर्ष से जुड़ा रहा। उनके विचारों ने बड़ी संख्या में लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रेरणा दी।
कांशीराम ने बहुजन समाज को राजनीतिक ताकत दी
मायावती ने अपने संदेश में कहा कि कांशीराम ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और सामाजिक समानता के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका उद्देश्य बहुजन समाज को केवल सामाजिक रूप से जागरूक बनाना नहीं था, बल्कि उसे राजनीतिक सत्ता में प्रभावी भागीदारी दिलाना भी था।
उन्होंने कहा कि कांशीराम ने समाज के वंचित, पिछड़े और शोषित वर्गों को संगठित करके लोकतंत्र में उनकी ताकत का एहसास कराया। उनके प्रयासों से बहुजन समाज के भीतर राजनीतिक चेतना का विस्तार हुआ और सत्ता में प्रतिनिधित्व को लेकर नई उम्मीदें पैदा हुईं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम की विरासत
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम की भूमिका को सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जाता है। उन्होंने बहुजन समाज को एकजुट करने और उसके राजनीतिक अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी।
मायावती के अनुसार, कांशीराम के संघर्ष और संगठन निर्माण की रणनीति का परिणाम रहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बसपा को सत्ता तक पहुंचने का अवसर मिला और पार्टी की चार बार सरकार बनी।
बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक सम्मान और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे आज भी प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। कांशीराम की विचारधारा उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के लिए संगठनात्मक प्रेरणा का प्रमुख आधार बनी हुई है।
महापुरुषों के विचारों और संविधान के मूल्यों पर जोर
मायावती ने सामाजिक परिवर्तन की चर्चा करते हुए महात्मा ज्योतिबा फुले, नारायण गुरु, छत्रपति शाहूजी महाराज और डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का भी उल्लेख किया। इन महापुरुषों ने सामाजिक समानता, शिक्षा, आत्मसम्मान और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की दिशा में आगे बढ़ने के लिए संविधान की भावना के अनुरूप काम करना आवश्यक है। समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा, रोजगार, सम्मान और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कांशीराम की राजनीति का प्रमुख उद्देश्य भी सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित समुदायों को संगठित करके उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना था।
बसपा शासन और कानून-व्यवस्था का भी किया उल्लेख
मायावती ने उत्तर प्रदेश में बसपा सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकारों ने कानून-व्यवस्था, जनहित और विकास के मुद्दों पर काम किया। उन्होंने इसे कांशीराम के विचारों और उनके मिशन को आगे बढ़ाने से जोड़ते हुए कहा कि जनता के हित में काम करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं से उनके अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने की अपील भी की गई।
लखनऊ में परिनिर्वाण दिवस का बड़ा कार्यक्रम
कांशीराम के 20वें परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर लखनऊ में बड़े स्तर पर
कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी की ओर से नेताओं, कार्यकर्ताओं और
समर्थकों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।
मुख्य कार्यक्रम मान्यवर कांशीराम जी स्मारक स्थल, ईको गार्डन में आयोजित किया गया। पार्टी के
प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, मायावती ने मॉल
एवेन्यू स्थित केंद्रीय कार्यालय में कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम रखा।
पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से कांशीराम के विचारों को याद करना,
कार्यकर्ताओं को संगठित करना और बहुजन आंदोलन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराना रहा।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले
कांशीराम का परिनिर्वाण दिवस बसपा के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी लंबे समय से अपने जनाधार को मजबूत करने और
समर्थकों को फिर से सक्रिय करने के प्रयास में जुटी है।
ऐसे में लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम को केवल श्रद्धांजलि सभा तक सीमित नहीं माना जा रहा,
बल्कि इसे संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं की
एकजुटता प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि, किसी बड़े आयोजन में जुटने वाली भीड़
अपने आप में चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होती।
आगामी चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन संगठन की मजबूती, स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों,
सामाजिक समीकरणों और मतदाताओं के समर्थन सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
कांशीराम के विचार आज भी प्रासंगिक
मान्यवर कांशीराम का राजनीतिक जीवन इस विचार से जुड़ा रहा कि समाज के वंचित वर्गों को
अपने अधिकारों के लिए जागरूक और संगठित होना चाहिए। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोट की ताकत,
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान को विशेष महत्व दिया।
उनके परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें याद करना सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक
अधिकारों पर चर्चा करने का अवसर भी है। उनके समर्थकों के लिए यह दिन उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने और
बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी मजबूत करने के संकल्प से जुड़ा है।
निष्कर्ष: कांशीराम के 20वें परिनिर्वाण दिवस पर
मायावती का संदेश बहुजन समाज के
राजनीतिक सशक्तीकरण, सामाजिक सम्मान और समानता के
मुद्दों पर केंद्रित रहा। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर
कांशीराम की विरासत और उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनके योगदान को चर्चा के केंद्र में ला दिया।
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