Jalaun Drug Factory Raid: गुलाब जल की आड़ में चल रही थी ड्रग्स फैक्टरी, DRI-ATS की छापेमारी में 300 करोड़ का खुलासा; दो गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध निर्माण से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक गांव के बाहर खेत में गुलाब जल बनाने की फैक्टरी की आड़ में कथित तौर पर प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग्स तैयार की जा रही थी। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की संयुक्त कार्रवाई में इस अवैध ड्रग्स निर्माण केंद्र का पर्दाफाश हुआ है।

जांच एजेंसियों ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी और आरोपियों के ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान कुल 1,102.88 किलोग्राम ड्रग्स, अर्ध-निर्मित पदार्थ, रासायनिक सामग्री और निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए। बरामदगी की अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत 200 से 300 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में मूल्यांकन का आंकड़ा अलग है।

इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों तक फैले कथित ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है। एजेंसियां पता लगा रही हैं कि इस कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा तैयार मादक पदार्थ किन रास्तों से बाजार तक पहुंचाए जाते थे।

जालौन के खेत में चल रही थी गुप्त ड्रग्स लैब, DRI और ATS ने मारा छापा

जानकारी के अनुसार, राजस्व खुफिया निदेशालय को सूचना मिली थी कि जालौन जिले के उरई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक ड्रग्स का निर्माण किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद DRI ने उत्तर प्रदेश ATS से संपर्क किया और संयुक्त अभियान की तैयारी की।

29 अक्टूबर 2026 को तड़के दोनों एजेंसियों की टीम ने गांव के बाहर स्थित संदिग्ध परिसर पर छापा मारा। तलाशी के दौरान वहां सामान्य फैक्टरी के बजाय ड्रग्स बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एक व्यवस्थित प्रयोगशाला मिली।

इस लैब में रासायनिक पदार्थों के साथ ड्रग्स तैयार करने वाले उपकरण और अन्य सामग्री रखी गई थी। अधिकारियों ने परिसर से बड़ी मात्रा में संदिग्ध मादक पदार्थ, अर्ध-निर्मित सामग्री और रसायन बरामद किए।

कार्रवाई के दौरान महाराष्ट्र निवासी संतोष कुमार और स्थानीय निवासी हेमेन्द्र कुशवाहा को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों कथित रूप से इस अवैध निर्माण और तस्करी नेटवर्क से जुड़े थे।

गुलाब जल फैक्टरी की आड़ में बन रही थी MD ड्रग्स, 1,102 किलो से अधिक सामग्री बरामद

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय लोगों को संदिग्ध परिसर में गुलाब जल बनाने की फैक्टरी चलने का आभास कराया गया था। बताया गया है कि आरोपियों ने संदेह से बचने के लिए थोड़ी मात्रा में गुलाब जल बनाने का काम भी किया था, जबकि मुख्य गतिविधि कथित तौर पर अवैध ड्रग्स निर्माण की थी।

जांच एजेंसियों ने लैब और आरोपियों के आवासों पर तलाशी के दौरान कुल 1,102.88 किलोग्राम सामग्री जब्त की। इसमें करीब 184 किलोग्राम अर्ध-निर्मित ड्रग्स, 15.44 किलोग्राम तैयार मेफेड्रोन तथा बड़ी मात्रा में रासायनिक पदार्थ और निर्माण उपकरण शामिल हैं।

बरामदगी के आंकड़े में लगभग 582.2 किलोग्राम रसायन और अन्य सामग्री लैब से मिली। एक आरोपी के आवास से तैयार मेफेड्रोन के साथ अतिरिक्त रसायन और मशीन बरामद की गई। दूसरे आरोपी के ठिकाने से भी रासायनिक सामग्री जब्त की गई।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 1,102.88 किलोग्राम की कुल बरामदगी में तैयार ड्रग्स के अलावा अर्ध-निर्मित पदार्थ और रसायन भी शामिल हैं। पूरी मात्रा को तैयार नशीला पदार्थ समझना सही नहीं होगा।

बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 200 करोड़ रुपये से अधिक और लगभग 300 करोड़ रुपये तक के आंकड़े सामने आए हैं।

दिल्ली-मुंबई तक सप्लाई का शक, हर तीन दिन में 20 किलो उत्पादन का दावा

जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर उत्तर प्रदेश के

अलग-अलग शहरों के अलावा दिल्ली-एनसीआर और मुंबई तक ड्रग्स पहुंचाने के नेटवर्क से जुड़े थे।

बड़े क्लबों, होटलों और अन्य स्थानों तक इसकी आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस लैब में हर तीन दिन में करीब 20 किलोग्राम ड्रग्स तैयार करने का दावा किया गया है।

इसकी कीमत लगभग 30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है। हालांकि, उत्पादन और बिक्री से जुड़े

इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय है।

एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कच्चा माल कहां से खरीदा जाता था,

लैब में किन लोगों की भूमिका थी, तैयार पदार्थ किन सप्लायरों तक पहुंचता था और

इस नेटवर्क को आर्थिक मदद कौन उपलब्ध करा रहा था।

जांच के दौरान आरोपियों के संपर्कों, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और

अन्य संभावित ठिकानों की पड़ताल भी की जा सकती है। अधिकारियों का उद्देश्य केवल निर्माण केंद्र का

पर्दाफाश करना नहीं, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचना है।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी, स्थानीय स्तर पर कैसे नहीं लगी भनक?

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। गांव के बाहर खेत में

कथित तौर पर प्रयोगशाला स्थापित करके मादक पदार्थ तैयार किए जा रहे थे, लेकिन

इसकी जानकारी लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई।

गिरफ्तार आरोपियों में एक महाराष्ट्र का निवासी बताया गया है,

जबकि दूसरा जालौन क्षेत्र का रहने वाला है। जांच से यह भी सामने आया है कि

एक आरोपी पहले भी मादक पदार्थों से जुड़े मामले में जेल जा चुका है।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों ने कितने समय से

इस गतिविधि को संचालित किया था और क्या इस कारोबार में अन्य जिलों या राज्यों के लोग भी शामिल थे।

स्थानीय पुलिस की जानकारी और संभावित भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

हालांकि, किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की मिलीभगत अभी साबित नहीं हुई है।

निष्कर्ष

जालौन में DRI और ATS की संयुक्त कार्रवाई ने अवैध सिंथेटिक ड्रग्स निर्माण के एक कथित बड़े

नेटवर्क को उजागर किया है। गुलाब जल फैक्टरी की आड़ में खेत में चल रही लैब से भारी मात्रा में ड्रग्स,

अर्ध-निर्मित पदार्थ और रसायन बरामद किए गए हैं। दो आरोपियों की

गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश में फैले

संभावित सप्लाई नेटवर्क पर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. जालौन में ड्रग्स फैक्टरी कहां पकड़ी गई?

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के उरई क्षेत्र में गांव के बाहर खेत में चल रही

कथित अवैध ड्रग्स निर्माण लैब का पर्दाफाश किया गया।

2. DRI और ATS की छापेमारी में कितनी बरामदगी हुई?

कुल 1,102.88 किलोग्राम ड्रग्स, अर्ध-निर्मित पदार्थों, रसायनों और संबंधित सामग्री की बरामदगी बताई गई है।

इसमें तैयार मेफेड्रोन की मात्रा 15.44 किलोग्राम बताई गई है।

3. जालौन ड्रग्स फैक्टरी मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?

संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां उनके अन्य संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

4. जालौन से ड्रग्स की सप्लाई कहां होती थी?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के

अलावा दिल्ली-एनसीआर और मुंबई तक कथित सप्लाई नेटवर्क फैला हुआ था। इसकी विस्तृत जांच जारी है।

read this post :गोला थाना क्षेत्र में 19 वर्षीय युवती लापता, युवक समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज