जौहर ट्रस्ट की जांच में डमी ट्रस्टियों से पूछताछ, आजम खां और परिवार की भूमिका पर ED के सवाल

पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिवार से जुड़े जौहर ट्रस्ट को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें ऐसे ट्रस्टी भी शामिल हैं, जिन्होंने पहले जांच अधिकारियों के सामने खुद को केवल नाममात्र का ट्रस्टी बताया था।

पूछताछ में ट्रस्ट के संचालन, उसके वित्तीय लेनदेन, दान के स्रोत, सरकारी धन के कथित इस्तेमाल और ट्रस्ट में आजम खां के परिवार की भूमिका से जुड़े सवालों पर जानकारी जुटाई जा रही है।

डमी ट्रस्टी के बयान से क्या सामने आया?

आयकर विभाग की पिछली जांच के दौरान जौहर ट्रस्ट से जुड़े चौधरी शहरयार सलीम ने कथित तौर पर खुद को केवल डमी ट्रस्टी बताया था।

उनके बयान के अनुसार, ट्रस्ट की कुछ बैठकों में उनसे केवल दस्तखत कराए जाते थे और फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका नहीं थी। एक बैठक में उन्हें जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति के चयन के सिलसिले में बुलाए जाने और दस्तखत के बाद वापस भेजे जाने की बात भी जांच में सामने आई।

अब ED ऐसे बयानों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर यह समझने की कोशिश कर रहा है कि ट्रस्ट का वास्तविक संचालन किसके नियंत्रण में था।

आजम खां के परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में

आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार जौहर ट्रस्ट के नौ सदस्यों में से पांच आजम खां के परिवार से जुड़े बताए गए हैं। रिपोर्ट में ट्रस्ट के नियंत्रण और प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

अब ED की पूछताछ में यह देखा जा रहा है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक फैसलों, वित्तीय गतिविधियों और विश्वविद्यालय से जुड़े कामों में अलग-अलग पदाधिकारियों की वास्तविक भूमिका क्या थी।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट या आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम दोष सिद्धि नहीं होते। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

सरकारी ठेकों और ट्रस्ट के बीच संबंध की जांच

ED ने आजम खां के मंत्री रहने के दौरान जल निगम में हुए कामों का ब्योरा भी मांगा है। एजेंसी खास तौर पर उन फर्मों की जानकारी जुटा रही है जिन्हें उस अवधि में अपेक्षाकृत अधिक सरकारी काम मिले थे।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सरकारी ठेकों से जुड़े कारोबार और जौहर ट्रस्ट को मिले कथित दान के बीच कोई वित्तीय संबंध था या नहीं।

करीब 86 करोड़ रुपये के सरकारी बजट पर सवाल

ताजा रिपोर्ट के अनुसार जांच एजेंसियां जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स से जुड़े करीब 86 करोड़ रुपये के सरकारी बजट के कथित दुरुपयोग की भी जांच कर रही हैं। साथ ही सरकारी भूमि, ट्रस्ट की संपत्तियों और विश्वविद्यालय परिसर में बने निर्माण कार्यों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।

इन आरोपों के संबंध में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।

जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर भी जांच

आयकर विभाग की जांच में विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद 59 भवनों की निर्माण लागत को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आने की बात कही गई है।

जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार इन भवनों की अनुमानित लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि ट्रस्ट के खातों में निर्माण खर्च काफी कम दर्शाए जाने का उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया।

ED इसी तरह के वित्तीय अंतर और उनके स्रोतों को भी अपनी जांच में शामिल कर रहा है।

कथित फर्जी दानदाताओं की भी होगी पड़ताल

जौहर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन में कथित तौर पर ऐसे दानदाताओं का भी उल्लेख मिला है जिनकी पहचान या अस्तित्व को लेकर आयकर जांच में सवाल उठे थे।

जांच रिपोर्ट में 11 ऐसी संस्थाओं का जिक्र किया गया है जिन्हें ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दानदाता बताया गया,

लेकिन आयकर अधिकारियों को उनकी पुष्टि में कठिनाई हुई।

अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन संस्थाओं के नाम पर

दर्ज धनराशि का वास्तविक स्रोत क्या था और रकम ट्रस्ट के खातों में किस तरह पहुंची।

ठेकेदारों और कंपनियों से भी पूछताछ की तैयारी

जांच का एक हिस्सा उन निजी कंपनियों और ठेकेदारों से भी जुड़ा है

जिन्हें आजम खां के मंत्री कार्यकाल के दौरान सरकारी कार्य मिले थे।

रिपोर्टों के मुताबिक ED ऐसे कारोबारियों से यह जानना चाहता है कि उन्हें सरकारी काम

कैसे मिले और क्या बाद में जौहर ट्रस्ट को किसी प्रकार का दान या भुगतान किया गया था।

आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद ED जांच तेज

जौहर ट्रस्ट पर आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद मामला और गंभीर जांच के दायरे में आया।

विभाग ने ट्रस्ट का पंजीकरण और कर छूट से

संबंधित लाभ समाप्त किया था। बाद की रिपोर्टों में अघोषित आय से जुड़े कर,

ब्याज और जुर्माने की संभावित वसूली की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।

इसके बाद ED ने ट्रस्ट और उससे जुड़े लोगों की वित्तीय गतिविधियों की अलग से जांच आगे बढ़ाई है।

अब किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?

ED की जांच में मुख्य रूप से कई सवालों पर ध्यान दिया जा रहा है—

  • ट्रस्ट का वास्तविक संचालन कौन करता था?
  • नाममात्र के ट्रस्टियों की भूमिका कितनी थी?
  • ट्रस्ट में दान के रूप में आई रकम का वास्तविक स्रोत क्या था?
  • कथित फर्जी दानदाताओं के नाम कैसे सामने आए?
  • विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल धन का स्रोत क्या था?
  • सरकारी ठेकों और ट्रस्ट के बीच कोई वित्तीय संबंध था या नहीं?
  • ट्रस्ट और आजम खां के परिवार के सदस्यों की वित्तीय भूमिका क्या थी?

इन सवालों के जवाब दस्तावेजों, बैंक खातों, बयानों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद सामने आने की उम्मीद है।

आगे क्या होगा?

ED द्वारा ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

जिन कंपनियों, ठेकेदारों और कथित

दानदाताओं का नाम जांच में सामने आया है, उनसे भी पूछताछ किए जाने की संभावना है।

फिलहाल यह मामला जांच के चरण में है। इसलिए जांच एजेंसियों के आरोपों और

दस्तावेजों में सामने आए तथ्यों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष से अलग समझना जरूरी है।

निष्कर्ष

जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में अब जांच का फोकस केवल ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है।

डमी ट्रस्टियों के बयान, कथित दानदाताओं, विश्वविद्यालय निर्माण की लागत, सरकारी ठेकों और

ट्रस्ट के संचालन में परिवार की भूमिका जैसे कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

आने वाले दिनों में ED की पूछताछ और दस्तावेजी जांच से इस मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

अभी अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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