जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की अपहरण के बाद हत्या के मामले ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि अपहरण की सूचना मिलने के बाद भी आरोपी उन्हें कार से करीब 70 किलोमीटर दूर कानपुर नगर तक ले गए। इस दौरान रास्ते में पांच थाना क्षेत्रों की सीमाएं पार हुईं, लेकिन अधिवक्ता को बचाया नहीं जा सका।
गयादीन अहिरवार का शव कानपुर नगर के गुजैनी क्षेत्र में मिलने के बाद अपहरण और हत्या का मामला सामने आया। पुलिस ने जांच के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, 2 नवंबर को साक्ष्य बरामदगी के दौरान पुलिस मुठभेड़ में दो आरोपी घायल हो गए।
बेटे ने दी थी अपहरण की सूचना
जानकारी के अनुसार, 31 अक्टूबर की शाम अधिवक्ता गयादीन अहिरवार को कार सवार लोग अपने साथ ले गए थे। उनके बेटे ने शाम करीब पांच बजे अन्य अधिवक्ताओं को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अधिवक्ताओं ने कालपी कोतवाली पुलिस को शिकायत दी।
बताया गया कि गयादीन को कालपी के दुर्गा मंदिर चौराहे से कार में बैठाकर ले जाया गया था। परिजनों को जब उनके अपहरण की आशंका हुई तो पुलिस से शिकायत की गई। इसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई।
70 किलोमीटर की दूरी और पांच थाना क्षेत्रों से गुजरी कार
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल आरोपियों की आवाजाही को लेकर उठ रहा है। कालपी से कानपुर नगर के गुजैनी क्षेत्र की दूरी करीब 70 किलोमीटर बताई जा रही है। इस रास्ते में कालपी, भोगनीपुर, रनियां, सचेंडी और गुजैनी समेत पांच थाना क्षेत्रों की सीमाएं पड़ती हैं।
सवाल उठ रहा है कि अपहरण की सूचना मिलने के बाद क्या संबंधित थानों को तत्काल अलर्ट किया गया था? क्या संदिग्ध कार की पहचान और तलाश के लिए रास्तों पर नाकाबंदी की गई थी? यदि समय रहते प्रभावी घेराबंदी होती तो क्या अधिवक्ता की जान बचाई जा सकती थी?
इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच और उस समय की कार्रवाई के रिकॉर्ड से ही मिल सकेगा। फिलहाल शुरुआती कार्रवाई को लेकर पुलिस की सतर्कता पर सवाल उठ रहे हैं।
कानपुर में मिला अधिवक्ता का शव
रविवार सुबह कानपुर नगर के गुजैनी क्षेत्र में गयादीन अहिरवार का शव बरामद हुआ। इसके बाद अपहरण का मामला हत्या की जांच में बदल गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उनकी हत्या धारदार हथियार से की गई थी।
गयादीन अहिरवार कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके थे और कई बार इस पद पर चुने गए थे। उनकी हत्या की खबर से कालपी के अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।
जमीन विवाद को हत्या की वजह मान रही पुलिस
पुलिस की शुरुआती जांच में जमीन विवाद को हत्या की संभावित वजह माना जा रहा है। परिजनों की ओर से भी जमीन से जुड़े विवाद और पहले शिकायत किए जाने की बात सामने आई है।
परिवार के मुताबिक, गयादीन अहिरवार ने जमीन विवाद के संबंध में पहले स्थानीय थाने में शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को भी
प्रार्थना पत्र देने और न्यायालय की शरण लेने की बात कही गई है।
परिजनों ने धमकियां मिलने का भी आरोप लगाया है।
हालांकि, हत्या के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे,
इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।
तीन आरोपी गिरफ्तार, मुठभेड़ में दो घायल
पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
2 नवंबर को आरोपियों की निशानदेही पर घटना से जुड़े साक्ष्य और वारदात में
इस्तेमाल कार बरामद करने की कार्रवाई के दौरान पुलिस मुठभेड़ हुई।
*पुलिस के अनुसार, इस दौरान आरोपियों ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में
आशीष विश्वकर्मा और सर्वेश शुक्ला नाम के दो आरोपी पैर में गोली लगने से घायल हुए।
तीसरे आरोपी को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया।
घायल आरोपियों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
पुलिस अब हत्या की वजह, साजिश में शामिल अन्य लोगों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
गयादीन अहिरवार की हत्या ने अपहरण की सूचना मिलने के बाद
पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी व्यक्ति के
अपहरण की सूचना मिलती है तो आसपास के थानों को तत्काल जानकारी देना,
संभावित रास्तों पर नाकाबंदी करना और संदिग्ध वाहनों की तलाश करना महत्वपूर्ण होता है।
अब यह जांच का विषय है कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने किस समय कौन-से कदम उठाए और
रास्ते में पड़ने वाले थाना क्षेत्रों को किस तरह अलर्ट किया गया। इस मामले में कार्रवाई की समय-सीमा और
पुलिस संचार व्यवस्था की समीक्षा से ही लापरवाही के आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
निष्कर्ष: कालपी बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या ने
अधिवक्ता समुदाय को झकझोर दिया है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और
मुठभेड़ के बाद भी कई सवाल बाकी हैं। खासकर अपहरण की
सूचना के बाद आरोपियों को करीब 70 किलोमीटर दूर तक जाने से क्यों नहीं रोका जा सका,
इसका जवाब जांच से सामने आना जरूरी है।
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