बहराइच जिले के नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के शोर के बीच एक मासूम बच्ची की दिल दहला देने वाली सिसकियां गूंजीं। अपनों द्वारा झाड़ियों में लावारिस छोड़ दी गई यह नन्ही जान पुलिस की गोद में सुरक्षित पहुंच गई। पत्थर दिल वाले उन हाथों ने फूल जैसी इस बेटी को सड़क किनारे फेंक दिया, लेकिन #खाकीधारी फरिश्तों ने वक्त रहते उसे थाम लिया। यह घटना बहराइच-सीतापुर हाईवे पर घटी, जहां ग्रामीण इलाकों में ऐसी दर्दनाक कहानियां अक्सर सामने आती रहती हैं।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: कैसे मिली बच्ची को सुरक्षा
स्थानीय पुलिस की पैट्रोलिंग के दौरान हाईवे किनारे झाड़ियों में रोती हुई बच्ची दिखाई दी। पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसे गोद में उठाया और नजदीकी अस्पताल में मेडिकल चेकअप कराया। बच्ची की उम्र लगभग 2-3 वर्ष बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कोई गंभीर शारीरिक चोट नहीं मिली, लेकिन मानसिक आघात स्पष्ट था। #बहराइच पुलिस ने तत्काल #चाइल्डलाइन 1098 को सूचित किया, जहां अब बच्ची की देखभाल हो रही है। एसपी डॉ. अजय यादव ने बताया कि घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि अपराधियों या अपनों का पता लगाया जा सके। यह बचाव ऑपरेशन पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है।
समाज का कड़वा सच: क्यों छोड़ी जाती हैं बेटियां लावारिस
भारत के ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आम हो गई हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में #बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चलने के बावजूद लावारिस बच्चों की संख्या चिंताजनक है। बहराइच-सीतापुर हाईवे पर यह कोई पहली घटना नहीं; पहले भी कई बच्चे लावारिस मिल चुके हैं। NCRB रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में यूपी में 5000 से अधिक लावारिस बच्चे दर्ज हुए। लिंग भेदभाव, आर्थिक तंगी और सामाजिक कुरीतियां ऐसी घटनाओं के पीछे मुख्य कारण हैं। क्या हमारा समाज इतना संवेदनहीन हो गया है? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, महिला आयोग और राजनेताओं से अपील है कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और जागरूकता अभियान तेज किए जाएं। #तब भी हम यहां हैं, लेकिन समाज कहां है?
चाइल्ड लाइन की भूमिका: बच्ची की देखभाल और भविष्य की राह
फिलहाल बच्ची चाइल्ड लाइन की देखरेख में सुरक्षित है। उसे उचित पोषण, चिकित्सा सहायता और
मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग दी जा रही है। यदि अपनों का पता नहीं चलता, तो
गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। एसपी डॉ. अजय यादव ने पुलिस और
चाइल्ड लाइन की टीम की सराहना करते हुए कहा, “हम इंसानियत की आखिरी उम्मीद हैं।”
ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए समाज में जागरूकता, शिक्षा और सख्त कानून की जरूरत है।
दुआ कीजिए कि यह मासूम बच्ची उस प्यार और सुरक्षा को पाए जिसका वह हकदार है।
यह घटना न केवल पुलिस की मानवीयता को दर्शाती है, बल्कि समाज को आईना भी दिखाती है।
बहराइच पुलिस का यह प्रयास सराहनीय है, लेकिन ऐसी घटनाओं की
जड़ को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
बेटियों को सुरक्षित भविष्य देने की जिम्मेदारी हम सबकी है।
