
कोटेदारों के इस्तीफे की पूरी घटना – क्या हुआ गोरखपुर में? गोरखपुर जिले में रविवार को एक बड़ा हड़कंप मच गया जब 15 कोटेदारों ने एक साथ अपना इस्तीफा सौंप दिया। गोरखपुर कोटेदार इस्तीफा की यह घटना खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को झकझोर रही है। स्थानीय अधिकारियों ने जब इस्तीफे की वजह सुनी तो वे भी परेशान हो गए। कोटेदारों का कहना है कि लंबे समय से कमीशन का भुगतान नहीं हो रहा, जिससे उनका गुजारा मुश्किल हो गया है। यह मामला खरेला, सहजनवा और कैम्पियरगंज ब्लॉकों के कोटेदारों से जुड़ा है।
इन कोटेदारों ने जिला आपूर्ति विभाग को अपना सामूहिक इस्तीफा पत्र सौंपा। पत्र में स्पष्ट लिखा है कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित कमीशन दरें लागू नहीं हो रही हैं। महंगाई के दौर में बिना भुगतान के राशन वितरण करना अब संभव नहीं। एक कोटेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम गरीब परिवारों को सस्ता अनाज देते हैं, लेकिन खुद का परिवार भूखा रह जाए तो कैसे?”
इस्तीफे की मुख्य वजहें – कमीशन विवाद और भुगतान देरी
कोटेदारों का सामूहिक इस्तीफा का मुख्य कारण कमीशन में कटौती और देरी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने PDS (Public Distribution System) के तहत कोटेदारों को प्रति किलो गेहूं पर 25 पैसे और चावल पर 35 पैसे का कमीशन तय किया था। लेकिन पिछले 6 महीनों से यह भुगतान अटका पड़ा है। कोटेदारों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन पोर्टल पर एंट्री करने के बावजूद फंड ट्रांसफर नहीं हो रहा।
इसके अलावा, आधार सीडिंग और e-POS मशीनों की खराबी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। एक सर्वे के मुताबिक, गोरखपुर के 70% कोटेदारों को पिछले साल से पूर्ण कमीशन नहीं मिला। उत्तर प्रदेश कोटेदार समस्या अब चरम पर पहुंच गई है। अगर समय रहते हल न हुआ तो लाखों राशन कार्ड धारकों को परेशानी हो सकती है।
प्रभावित इलाके और राशन वितरण पर असर
गोरखपुर के खरेला ब्लॉक में 5, सहजनवा में 6 और कैम्पियरगंज में 4 कोटेदारों ने इस्तीफा दिया। इन क्षेत्रों में करीब 50,000 परिवार प्रभावित होंगे। अगले महीने की राशन वितरण प्रक्रिया ठप हो सकती है। जिला मजिस्ट्रेट ने तत्काल बैठक बुलाई है। अधिकारियों का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है, लेकिन कोटेदारों की कमी से व्यवस्था चरमरा जाएगी।
सरकार और अधिकारियों की प्रतिक्रिया – क्या होगा अगला कदम?
गोरखपुर राशन व्यवस्था संकट पर जिलाधिकारी विपिन कुमार ने कहा, “मामला संज्ञान में है। कमीशन भुगतान के लिए उच्च अधिकारियों से बात की जा रही। कोटेदारों को मनाने का प्रयास जारी है।” राज्य स्तर पर खाद्य एवं लॉजिस्टिक्स विभाग ने हेल्पलाइन जारी की है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नाकामी बताया। समाजवादी पार्टी के नेता ने ट्वीट कर कहा, “योगी सरकार गरीबों का राशन छीन रही है।
“कोटेदार संघ ने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे में भुगतान न हुआ तो全省 में आंदोलन होगा। पूर्व में 2024 में लखनऊ और वाराणसी में भी ऐसी घटनाएं हुई थीं। खाद्यान्न वितरण गड़बड़ी को रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम मजबूत करने की मांग उठ रही है।
राशन व्यवस्था सुधार की जरूरत
यह घटना उत्तर प्रदेश की PDS व्यवस्था की पोल खोल रही है। गोरखपुर कोटेदार इस्तीफा से सबक लेते हुए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। कोटेदारों का हक सुनिश्चित हो तो गरीबों को सस्ता अनाज मिलता रहेगा। रहने वाले गोरखपुरवासी सतर्क रहें और स्थानीय खबरों पर नजर रखें।