यूपी में गर्मी से पहले बिजली संकट की आशंका: राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सीएम योगी को लिखा पत्र, वर्टिकल व्यवस्था पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश में गर्मी का मौसम अभी शुरू भी नहीं हुआ है और बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि वर्तमान वर्टिकल व्यवस्था के कारण गर्मी में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बेपटरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिन शहरों में वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है, वहां के हालात मार्च के पहले सप्ताह में ही खराब दिखाई देने लगे हैं। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की गई है।

वर्टिकल व्यवस्था क्या है और क्यों समस्या?

वर्टिकल व्यवस्था में बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) खुद उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण का काम संभालती हैं। परिषद का आरोप है कि इस व्यवस्था में समन्वय की कमी है। उत्पादन इकाइयों में मेंटेनेंस, कोयला कमी या अन्य तकनीकी खराबी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित होता है, जिसका सीधा असर ग्रिड और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। मार्च के पहले सप्ताह में ही कई शहरों में बिजली कटौती के शिकायतें बढ़ गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी खराब बताए जा रहे हैं, जहां घंटों बिजली नहीं आती।

अवधेश कुमार वर्मा ने पत्र में लिखा है कि गर्मी के मौसम में बिजली की मांग 25-30% तक बढ़ जाती है। ऐसे में अगर उत्पादन और वितरण में कोई कमी रही तो बड़े पैमाने पर कटौती अनिवार्य हो जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वर्टिकल व्यवस्था की समीक्षा की जाए और उपभोक्ताओं को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाए।

मार्च में ही खराब हालात: उपभोक्ताओं में आक्रोश

परिषद के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में ही कई शहरों और कस्बों में अनियमित बिजली आपूर्ति की शिकायतें आई हैं। लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, आगरा जैसे प्रमुख शहरों में भी ट्रांसफार्मर फेल होने, लाइन ट्रिपिंग और लोड शेडिंग की घटनाएं बढ़ी हैं। ग्रामीण इलाकों में तो 12-16 घंटे तक बिजली न आने की खबरें हैं। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यदि अभी से हालात खराब हैं तो अप्रैल-मई-जून में स्थिति और भयावह हो सकती है।

मुख्यमंत्री को पत्र में मुख्य मांगें

पत्र में अवधेश कुमार वर्मा ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  • वर्टिकल व्यवस्था की तत्काल समीक्षा और सुधार
  • गर्मी के मौसम के लिए अतिरिक्त बिजली उत्पादन की व्यवस्था
  • पुराने ट्रांसफार्मर और लाइनों का तुरंत अपग्रेडेशन
  • ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का लक्ष्य पूरा करने की योजना
  • उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए प्रभावी हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई

परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ेगा और बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो सकते हैं।

बिजली विभाग की तैयारी और वास्तविकता

बिजली विभाग का दावा है कि गर्मी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

अतिरिक्त कोयला स्टॉक, मेंटेनेंस शेड्यूल और बैकअप जनरेटर तैयार हैं।

लेकिन उपभोक्ता परिषद का कहना है कि जमीनी हकीकत अलग है।

कई जगहों पर ट्रांसफार्मर ओवरलोडेड हैं और लाइनें पुरानी हैं। यदि मांग बढ़ी तो ये कमजोरियां सामने आ जाएंगी।

उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग गर्मी में 28-30 हजार मेगावाट तक पहुंच जाती है,

जबकि उपलब्धता अक्सर कम रहती है। ऐसे में वर्टिकल व्यवस्था की

कमियों को सुधारना जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपेक्षा है कि वे

इस पत्र पर गंभीरता से विचार करें और उपभोक्ताओं को राहत दें।

गर्मी का मौसम अभी शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन बिजली संकट की आशंका उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ा रही है।

आने वाले दिनों में विभाग की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।