हुक्का बार पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्मोकिंग जोन में भी रोक

लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 30 सितंबर 2026

परिचय

उत्तर प्रदेश में हुक्का बार और रेस्टोरेंट में हुक्का परोसने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी रेस्टोरेंट, कैफे या अन्य सार्वजनिक स्थान ग्राहकों को हुक्का सेवा नहीं दे सकते।

मुख्य खबर

उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के संचालन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत ने कहा कि रेस्टोरेंट, कैफे, होटल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराना कानूनी रूप से अनुमन्य नहीं है। यह प्रतिबंध केवल सामान्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि Designated Smoking Area यानी निर्धारित स्मोकिंग जोन में भी हुक्का सेवा पर लागू होता है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की पीठ ने की। अदालत ने हुक्का बार और रेस्टोरेंट संचालकों की ओर से दाखिल मुख्य याचिका सहित संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से ऐसे प्रतिष्ठानों में वैध खाद्य लाइसेंस के आधार पर निर्धारित स्मोकिंग एरिया में हुक्का परोसने की अनुमति मांगी गई थी।

स्मोकिंग जोन को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत के फैसले के अनुसार निर्धारित स्मोकिंग एरिया का प्रावधान ग्राहकों को वहां धूम्रपान करने की सीमित अनुमति से जुड़ा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि रेस्टोरेंट या कैफे संचालक उस स्थान पर हुक्का तैयार करके ग्राहक को सेवा के रूप में उपलब्ध करा सकते हैं। अदालत ने हुक्का तैयार करने और परोसने को अलग तरह की सेवा माना है।

फैसले में COTPA यानी Cigarettes and Other Tobacco Products Act तथा सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध से जुड़े नियमों का उल्लेख किया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल भोजनालय या रेस्टोरेंट का लाइसेंस होना हुक्का सेवा की अनुमति का आधार नहीं बन सकता।

पुलिस कार्रवाई को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी

अदालत के फैसले का असर हुक्का बार संचालकों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों पर भी पड़ेगा। रिपोर्ट किए गए फैसले के अनुसार पुलिस को लागू तंबाकू नियंत्रण कानूनों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है। वहीं, अदालत के आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भेजने का निर्देश भी दिया गया है।

लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में रेस्टोरेंट और कैफे के भीतर हुक्का सेवा को लेकर लंबे समय से कानूनी सवाल उठते रहे हैं। अब हाईकोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट किया गया है।

स्मोकिंग जोन का इस्तेमाल हुक्का बार चलाने के लाइसेंस या कानूनी आधार के तौर पर नहीं किया जा सकता।

स्वच्छ हवा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जोर

अदालत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छ हवा के अधिकार से जुड़े पहलू पर भी जोर दिया।

फैसले में यह बात सामने आई है।

व्यावसायिक प्रतिष्ठान के आर्थिक हितों के आधार पर लोगों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार को सीमित नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में हुक्का सेवा देने वाले रेस्टोरेंट,

कैफे और अन्य प्रतिष्ठानों के लिए कानूनी स्थिति पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट हो गई है।

केवल अलग स्मोकिंग एरिया बनाकर हुक्का सेवा जारी रखने का दावा अदालत के फैसले के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

Facts/Details

फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुनाया।

पीठ में न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी शामिल थे।

रेस्टोरेंट और कैफे में हुक्का सेवा को लेकर दाखिल याचिकाएं खारिज की गईं।

निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का परोसने की अनुमति नहीं है।

COTPA और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान संबंधी नियमों को फैसले में आधार बनाया गया।

आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजने का निर्देश दिया गया।

विस्तार

हाईकोर्ट के फैसले का मूल संदेश यह है।

रेस्टोरेंट या कैफे में अलग स्मोकिंग एरिया होने मात्र से हुक्का सेवा को वैध नहीं माना जा सकता।

अदालत ने तंबाकू नियंत्रण कानूनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारों के आधार पर हुक्का सेवा की अनुमति से इनकार किया है।

FAQ

1. क्या यूपी में रेस्टोरेंट में हुक्का परोसा जा सकता है?हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर हुक्का सेवा की अनुमति नहीं है।

2. क्या Designated Smoking Area में हुक्का दिया जा सकता है?

नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का सेवा नहीं दी जा सकती।

3. क्या रेस्टोरेंट का फूड लाइसेंस हुक्का सेवा की अनुमति देता है?

अदालत के अनुसार केवल खाद्य प्रतिष्ठान का लाइसेंस हुक्का तैयार करने और परोसने की अनुमति का आधार नहीं है।

4. फैसले का पालन कौन कराएगा?

संबंधित कानूनों के तहत प्रवर्तन एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।

आदेश की प्रति मुख्य सचिव तथा डीजीपी को भेजने का निर्देश दिया गया है।