ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत के बाद वाहन से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं। जांच और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर पता चला है कि हादसे वाली बस के खिलाफ 19 चालान लंबित थे, जिनकी कुल राशि करीब 1.75 लाख रुपये बताई गई है। इनमें कई चालान यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े थे।
हादसे के बाद सामने आई इन जानकारियों ने बस के संचालन, वाहन की निगरानी और यातायात नियमों के अनुपालन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन चालानों का होना अपने आप में आग लगने का कारण साबित नहीं करता। हादसे की वास्तविक वजह की जांच अलग से चल रही है।
हादसे से पहले बस का था चालानों का रिकॉर्ड
आरटीओ से संबंधित उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बस के खिलाफ अलग-अलग समय पर यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले दर्ज हुए थे। कुल 19 चालानों की राशि करीब ₹1.75 लाख बताई गई है।
इनमें तेज गति से वाहन चलाने और ट्रैफिक सिग्नल से जुड़े उल्लंघनों के मामले शामिल बताए गए हैं। कुछ अन्य चालान वाहन के तकनीकी बदलाव, परमिट और ड्राइविंग से जुड़े नियमों से संबंधित बताए गए हैं।
नाबालिग चालक से बस चलाने का भी चालान
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी 2026 में बस से जुड़े एक मामले में निर्धारित उम्र से कम चालक द्वारा वाहन चलाने को लेकर कार्रवाई हुई थी। इस मामले में दिल्ली-नोएडा सीमा के आसपास चालान किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह जानकारी हादसे के बाद वाहन के पुराने रिकॉर्ड की जांच के दौरान सामने आई है।
रेट्रोफिटिंग और ईंधन से जुड़े नियमों का मामला
बस के खिलाफ जून 2025 में ईंधन परिवर्तन और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी चालान दर्ज होने की जानकारी है। इसके अलावा परमिट से जुड़े उल्लंघनों का भी रिकॉर्ड सामने आया है।
रेट्रोफिटिंग का मतलब वाहन में मूल डिजाइन या स्वीकृत व्यवस्था के अलावा किए गए तकनीकी बदलावों से है। ऐसे बदलावों के लिए संबंधित नियमों और अनुमति का पालन जरूरी होता है।
इंजन से आवाज आने की शिकायत का भी जिक्र
हादसे के बाद सामने आई जानकारी में बस के इंजन से असामान्य आवाज आने की शिकायतों का भी उल्लेख हुआ है। इन शिकायतों को लेकर वाहन की तकनीकी स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करने के लिए तकनीकी जांच जरूरी है कि इंजन या बस के किसी अन्य हिस्से में खराबी थी या नहीं और उसका आग की घटना से कोई संबंध था या नहीं।
बस के रंग को लेकर भी सामने आया अंतर
वाहन के दस्तावेजों और हादसे के बाद दिखाई दी बस के रंग को लेकर भी अंतर की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिकॉर्ड में वाहन का रंग अलग दर्ज होने की बात कही गई है, जबकि घटनास्थल पर बस का रंग अलग दिखाई दिया।
इस पहलू की भी जांच की जा सकती है कि वाहन में रंग परिवर्तन कब और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
यमुना एक्सप्रेसवे पर कैसे हुआ हादसा?
23 सितंबर की रात दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही स्लीपर बस यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर क्षेत्र के पास आग की चपेट में आ गई। बस में करीब 30 से 35 यात्रियों के सवार होने की जानकारी FIR में सामने आई है।
रात करीब 11:30 बजे एक्सप्रेसवे के 33 किलोमीटर के आसपास बस में आग लगी। कुछ यात्रियों ने जलने की गंध महसूस होने की बात कही। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और कई यात्री बस में फंस गए।
हादसे में 9 यात्रियों की मौत
आग की इस घटना में 9 यात्रियों की मौत हुई। पुलिस के अनुसार मौतें जलने और
दम घुटने के कारण हुईं। कई अन्य यात्रियों को सुरक्षित बाहर
निकाला गया और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की। चालक और परिचालक को
हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।
आग लगने की वजह की जांच जारी
प्रारंभिक जांच में बस के एसी सिस्टम से चिंगारी या विस्फोट के बाद इंजन ऑयल के आग
पकड़ने की संभावना का उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं है।
आग की वास्तविक वजह तकनीकी जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट होगी।
FIR में यात्रियों की ओर से जलने की गंध महसूस होने और चालक-परिचालक को
सूचना देने का भी उल्लेख है। इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है।
19 चालान के बाद भी उठे निगरानी पर सवाल
बस के खिलाफ लंबित 19 चालानों की जानकारी सामने आने के बाद वाहन की
निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर
यह जांच का विषय है कि बार-बार नियम उल्लंघन सामने आने के
बावजूद वाहन के संचालन और फिटनेस से संबंधित क्या कार्रवाई की गई थी।
हालांकि, केवल चालान की संख्या के आधार पर हादसे के लिए किसी व्यक्ति या संस्था की
जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। इसके लिए संबंधित विभागों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
यात्रियों की सुरक्षा पर फिर चर्चा
इस घटना ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्री सुरक्षा के मुद्दे को फिर सामने ला दिया है।
बसों में आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण, तकनीकी फिटनेस,
परमिट और ड्राइवर की पात्रता जैसे मानकों का पालन महत्वपूर्ण है।
हादसे के बाद सामने आ रही जानकारियां यह भी दिखाती हैं कि केवल चालान काटना पर्याप्त है या
नहीं, इस पर भी परिवहन और यातायात व्यवस्था के स्तर पर समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है।
निष्कर्ष
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड में 9 यात्रियों की मौत के बाद वाहन के
पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिकॉर्ड के
अनुसार बस पर 19 चालान और करीब ₹1.75 लाख की लंबित राशि थी।
इनमें तेज गति सहित कई यातायात और वाहन नियमों से जुड़े उल्लंघन बताए गए हैं।
हादसे की वास्तविक वजह और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं,
यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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