उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी धान समेत कई खरीफ फसलों के गिरने और जलभराव से नुकसान की आशंका बनी हुई है। कृषि विभाग ने प्रभावित फसलों की स्थिति का आकलन शुरू कराने के साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने वाले किसानों को महत्वपूर्ण सलाह दी है।
अगर बारिश, तेज हवा या जलभराव से बीमित फसल को नुकसान हुआ है तो किसान नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर दर्ज कराएं, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सर्वे और क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जा सके।
गोरखपुर में बारिश से फसलों पर असर
गोरखपुर में पिछले कई दिनों से बारिश के साथ तेज हवाएं चल रही हैं। कई क्षेत्रों में धान की खड़ी फसल गिरने की जानकारी सामने आई है। खेतों में लगातार पानी जमा रहने से फसल की जड़ों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
कृषि विभाग के अनुसार जिले के सभी 20 ब्लॉकों में अगेती धान की फसल गिरने की जानकारी मिल रही है। धान के अलावा मक्का, बाजरा, ज्वार, तिल और अन्य खरीफ फसलों पर भी मौसम का असर पड़ सकता है।
करीब 1.45 लाख हेक्टेयर में धान की खेती
गोरखपुर में खरीफ सीजन के दौरान कुल करीब 1,61,098 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बुवाई हुई है। इसमें धान का क्षेत्रफल सबसे अधिक करीब 1,44,722 हेक्टेयर बताया गया है।
इसके अलावा मक्का, मूंगफली, अरहर, ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग और तिल जैसी फसलें भी जिले में बोई गई हैं। ऐसे में लगातार बारिश और तेज हवा से बड़ी संख्या में किसानों के प्रभावित होने की आशंका है।
72 घंटे में सूचना देना क्यों जरूरी?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमित फसल को प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर किसान को निर्धारित समय में इसकी सूचना देनी होती है।
मौजूदा मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों से कहा गया है कि फसल नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर सूचना दर्ज कराएं। समय पर सूचना मिलने के बाद संबंधित प्रक्रिया के अनुसार फसल क्षति का आकलन कराया जा सकता है।
14447 नंबर पर दर्ज कराएं फसल नुकसान
गोरखपुर के किसानों के लिए फसल नुकसान की सूचना देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम कृषि रक्षक हेल्पलाइन नंबर 14447 है।
बीमित किसान इस टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करके अपनी फसल को हुए नुकसान की जानकारी दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा संबंधित कृषि विभाग, बैंक शाखा या बीमा कंपनी के माध्यम से भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना दी जा सकती है।
फसल नुकसान की सूचना कैसे दें?
किसानों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए—
- फसल नुकसान की जानकारी 72 घंटे के भीतर दर्ज कराएं।
- 14447 टोल-फ्री नंबर पर सूचना दें।
- आवश्यकता होने पर संबंधित कृषि अधिकारी से संपर्क करें।
- अपनी बीमा पॉलिसी और फसल से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें।
- खेत में हुए नुकसान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- संबंधित अधिकारियों के सर्वे के दौरान आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं।
- यदि ऑनलाइन माध्यम से रिपोर्ट की सुविधा उपलब्ध हो तो संबंधित फसल बीमा ऐप का उपयोग करें।
नुकसान के बाद कैसे होगा सर्वे?
किसान द्वारा नुकसान की सूचना दर्ज कराने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित विभाग और बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा फसल क्षति का आकलन कराया जा सकता है।
क्षति का वास्तविक स्तर सामने आने के बाद योजना के नियमों और किसान की पात्रता के अनुसार क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
धान की फसल पर सबसे ज्यादा चिंता
गोरखपुर में खरीफ फसलों में धान का क्षेत्रफल सबसे अधिक है। तेज हवा के कारण कई जगह धान की फसल खेत में गिर गई है। अगर गिरी हुई फसल लंबे समय तक पानी में रहती है तो नुकसान बढ़ सकता है।
कृषि विभाग ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी है।
किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बारिश रुकने के बाद किसान खेत का निरीक्षण करें और जहां संभव हो वहां अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करें। हालांकि बहुत अधिक गीले खेत में जल्दबाजी में प्रवेश करने से बचना चाहिए।
फसल में हुए नुकसान की तस्वीरें और अन्य जरूरी प्रमाण सुरक्षित रखना भी उपयोगी हो सकता है। बीमा क्लेम से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में आधिकारिक निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
क्या बिना बीमा वाले किसानों को भी राहत मिल सकती है?
फसल बीमा योजना के तहत मिलने वाली क्षतिपूर्ति और सरकार की आपदा राहत व्यवस्था अलग-अलग प्रावधानों पर आधारित हो सकती है। इसलिए बिना बीमा वाले किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, तहसील या राजस्व अधिकारियों से उपलब्ध राहत व्यवस्था की जानकारी प्राप्त करें।
किसी भी सहायता के लिए केवल आधिकारिक सरकारी सूचना को आधार बनाना उचित रहेगा।
गोरखपुर में फसल नुकसान का होगा आकलन
कृषि विभाग ने क्षेत्रीय स्तर पर फसल क्षति की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। सहायक विकास अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को अपने क्षेत्रों में बारिश तथा तेज हवा से प्रभावित फसलों की स्थिति की जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।
इस आकलन से प्रभावित फसलों और किसानों की वास्तविक स्थिति सामने आने में मदद मिलेगी।
किसानों के लिए सबसे जरूरी बात
अगर आपकी बीमित फसल बारिश, तेज हवा या जलभराव से प्रभावित हुई है,
तो सूचना देने में देरी न करें। 72 घंटे की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए
जल्द से जल्द 14447 पर नुकसान की जानकारी दर्ज कराना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
गोरखपुर में लगातार बारिश और तेज हवाओं से खरीफ फसलों पर असर पड़ा है।
धान की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है।
कृषि विभाग ने फसल क्षति का आकलन कराने की प्रक्रिया शुरू की है और
बीमित किसानों से नुकसान की सूचना समय पर दर्ज कराने को कहा गया है।
किसानों के लिए सबसे अहम बात यह है कि फसल नुकसान होने पर 72 घंटे के
भीतर सूचना दें और 14447 हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें, ताकि निर्धारित नियमों के
अनुसार सर्वे और बीमा क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया में उनका दावा शामिल किया जा सके।
FAQ: गोरखपुर फसल नुकसान और बीमा क्लेम
1. गोरखपुर में फसल नुकसान की सूचना कितने घंटे में देनी है?
बीमित फसल को नुकसान होने पर किसानों को 72 घंटे के भीतर सूचना दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
2. फसल नुकसान की शिकायत किस नंबर पर करें?
किसान 14447 टोल-फ्री नंबर पर फसल नुकसान की सूचना दर्ज करा सकते हैं।
3. गोरखपुर में कौन सी फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है?
गोरखपुर में धान का क्षेत्रफल सबसे अधिक है, इसलिए लगातार बारिश और
तेज हवा से धान की फसल पर विशेष असर पड़ने की आशंका है।
मक्का, बाजरा, ज्वार और तिल जैसी फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं।
4. नुकसान की सूचना देने के बाद क्या होगा?
सूचना मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित विभाग और
बीमा कंपनी के प्रतिनिधि फसल नुकसान का आकलन कर सकते हैं। पात्रता और
योजना के नियमों के आधार पर क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
5. क्या खेत में जलभराव से हुई क्षति की सूचना भी दे सकते हैं?
हां, यदि बीमित और अधिसूचित फसल को जलभराव या अत्यधिक बारिश से
नुकसान हुआ है तो निर्धारित समय के भीतर इसकी सूचना दर्ज करानी चाहिए।
6. किसानों को अभी क्या करना चाहिए?
सबसे पहले खेत में फसल की स्थिति देखें, अतिरिक्त पानी की निकासी संभव हो तो करें और
नुकसान होने की स्थिति में 72 घंटे के भीतर 14447 पर सूचना दर्ज कराएं।
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