गोरखपुर में गैंगस्टर की 8.50 लाख की कार जब्त, पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत की कार्रवाई

अपराध के जरिए संपत्ति अर्जित करने के आरोपियों के खिलाफ गोरखपुर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में रामगढ़ताल पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के आरोपी अमरजीत सिंह की करीब 8.50 लाख रुपये कीमत की चार पहिया वाहन जब्त की है।

पुलिस के अनुसार यह वाहन अपराध से अर्जित संपत्ति से जुड़ा हुआ बताया गया है। कार्रवाई जिलाधिकारी गोरखपुर के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 14(1) के तहत की गई।

गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज है मामला

पुलिस के मुताबिक अमरजीत सिंह के खिलाफ रामगढ़ताल थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ लूट, हत्या के प्रयास, मारपीट, धमकी और अवैध हथियार से संबंधित मामले भी दर्ज रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ वर्ष 2020 से 2024 के बीच रामगढ़ताल और सहजनवा थानों में कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

8.50 लाख रुपये की कार पर हुई कार्रवाई

रामगढ़ताल पुलिस के अनुसार जब्त की गई चार पहिया वाहन की अनुमानित कीमत करीब 8.50 लाख रुपये है। पुलिस ने इसे गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत वैधानिक प्रक्रिया के तहत जब्त किया।

इस प्रावधान के तहत गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामलों में अपराध से अर्जित बताई गई संपत्ति के संबंध में प्रशासन की ओर से कुर्की या जब्ती जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

आरोपी के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज होने का दावा

पुलिस के अनुसार अमरजीत सिंह गोरखपुर के केशवाखोर क्षेत्र का रहने वाला है। उसके खिलाफ रामगढ़ताल और सहजनवा थाना क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर मामले दर्ज हुए हैं।

पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ दर्ज मुकदमे या संपत्ति जब्ती की कार्रवाई अपने आप में अदालत द्वारा अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं होती। मामलों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है।

अपराध से अर्जित संपत्ति पर प्रशासन की नजर

गोरखपुर पुलिस और प्रशासन की ओर से गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध से अर्जित बताई जा रही संपत्तियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाले और अपराध के माध्यम से संपत्ति अर्जित करने के आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी संपत्तियों पर कानूनी शिकंजा कसना और अपराध से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई करना है।

अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई एसपी सिटी निमिष पाटिल के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी कैंट कीर्ति निधि आनंद के पर्यवेक्षण में की गई।

रामगढ़ताल थाना प्रभारी श्यामा नंद राय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम

  • वरिष्ठ उपनिरीक्षक — अनूप मणि त्रिपाठी
  • हेड कांस्टेबल — अनिल गुप्ता
  • कांस्टेबल — हर्षित
  • कांस्टेबल — मुकेश प्रजापति

क्या है गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1)?

उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत अपराध से अर्जित बताई गई संपत्ति के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई का प्रावधान है। संबंधित मामले में प्रशासन और पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों एवं कानूनी प्रक्रिया के आधार पर संपत्ति को कुर्क या जब्त करने की कार्रवाई कर सकते हैं।

गोरखपुर में हुई यह कार्रवाई भी इसी कानूनी प्रावधान के तहत की गई है।

एक नजर में

बिंदुजानकारी
जिलागोरखपुर
थानारामगढ़ताल
आरोपीअमरजीत सिंह
कार्रवाईचार पहिया वाहन जब्ती
वाहन की अनुमानित कीमत8.50 लाख रुपये
कानूनी आधारगैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1)
आदेशजिलाधिकारी गोरखपुर
पुलिस टीमरामगढ़ताल थाना
कार्रवाई का उद्देश्यअपराध से अर्जित बताई गई संपत्ति पर वैधानिक कार्रवाई

FAQ

प्रश्न: गोरखपुर में किस आरोपी की कार जब्त हुई है?
उत्तर: पुलिस के अनुसार अमरजीत सिंह की करीब 8.50 लाख रुपये कीमत की चार पहिया वाहन जब्त की गई है।

प्रश्न: कार क्यों जब्त की गई?
उत्तर: पुलिस के अनुसार वाहन को अपराध से अर्जित बताई गई संपत्ति से संबंधित माना गया है और गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कार्रवाई की गई।

प्रश्न: कार्रवाई किस थाने की पुलिस ने की?
उत्तर: रामगढ़ताल थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की।

प्रश्न: आरोपी के खिलाफ कौन-कौन से मामले बताए गए हैं?
उत्तर: पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ लूट, हत्या के प्रयास, मारपीट, धमकी और आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले दर्ज हैं।

प्रश्न: क्या संपत्ति जब्त होने से आरोपी दोषी साबित हो जाता है?
उत्तर: नहीं। संपत्ति जब्ती प्रशासनिक/कानूनी कार्रवाई है।

किसी आपराधिक मामले में दोष का अंतिम निर्धारण न्यायालय की प्रक्रिया के तहत होता है।

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