राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर जनपद के धुरियापार में श्री श्री आदर्श रामलीला समिति की ओर से आयोजित 56वें वर्ष की रामलीला के अंतर्गत रविवार की रात धनुष यज्ञ महोत्सव धूमधाम और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ। भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने का दृश्य प्रस्तुत होते ही पूरा रामलीला पंडाल ‘जय श्री राम’ के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
अयोध्या के कलाकारों ने किया सीता स्वयंवर का भव्य मंचन
धनुष यज्ञ महोत्सव में अयोध्या धाम से आए कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुति दी। मंच पर मिथिला नरेश राजा जनक का भव्य दरबार सजाया गया, जहां माता सीता के स्वयंवर का प्रसंग जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
रामलीला के मंचन के दौरान राजा जनक ने दरबार में उपस्थित राजाओं के सामने घोषणा की कि जो भी भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, उसी के साथ उनकी पुत्री सीता का विवाह किया जाएगा। इसके बाद स्वयंवर में आए राजा-महाराजाओं ने धनुष उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया।
रावण और बाणासुर भी नहीं हिला सके शिव धनुष
सीता स्वयंवर के प्रसंग में लंका के राजा रावण, बाणासुर सहित कई शक्तिशाली राजाओं ने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया। लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका। इस दृश्य को कलाकारों ने प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
जब सभी राजा असफल हो गए, तब गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम आगे आए। उन्होंने सहजता से शिव धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते ही धनुष टूट गया। मंच पर प्रस्तुत इस दृश्य के साथ दिव्य प्रकाश और जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
श्रीराम के गले में माता सीता ने डाली वरमाला
शिव धनुष टूटने के बाद माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपना जीवनसाथी स्वीकार किया। इस प्रसंग का मंचन देखने के लिए धुरियापार सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।
रामलीला पंडाल में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की अच्छी भागीदारी रही। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक आयोजन का आनंद लिया। भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग ने दर्शकों को रामायण की भक्ति और आदर्शों से जोड़ दिया।
56 वर्षों से परंपरा को आगे बढ़ा रही रामलीला समिति
श्री श्री आदर्श रामलीला समिति धुरियापार की ओर से आयोजित यह रामलीला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार 56वें वर्ष आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय लोगों को रामायण के प्रसंगों को देखने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिल रहा है।
धनुष यज्ञ महोत्सव के सफल आयोजन से क्षेत्र में उत्साह का माहौल रहा। कलाकारों की प्रस्तुति, भव्य दरबार और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
समिति के पदाधिकारी और ग्रामवासी रहे मौजूद
इस अवसर पर रामलीला समिति के अध्यक्ष आधाराम कसौधन, व्यवस्थापक एवं प्रधान प्रतिनिधि रिंटू शाही, महामंत्री कृष्णा गुप्ता, संरक्षक डॉ.
हरिहर राम त्रिपाठी, गौरी शंकर मिश्रा उर्फ डिंकू बाबा, कोषाध्यक्ष श्रीरामपाल कसौधन,
उपाध्यक्ष मनीष तिवारी और मोनू गुप्ता सहित समिति के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. धुरियापार में धनुष यज्ञ महोत्सव का आयोजन किसने किया?
धनुष यज्ञ महोत्सव का आयोजन श्री श्री आदर्श रामलीला समिति धुरियापार की ओर से किया गया।
2. धुरियापार की रामलीला का यह कौन-सा वर्ष है?
इस वर्ष समिति की ओर से 56वें वर्ष की रामलीला का आयोजन किया जा रहा है।
3. धनुष यज्ञ महोत्सव में किस प्रसंग का मंचन हुआ?
कार्यक्रम में मिथिला नरेश राजा जनक के दरबार और माता सीता के स्वयंवर का भव्य मंचन किया गया।
4. शिव धनुष किसने तोड़ा?
रामलीला के मंचन में गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा।
5. राम के धनुष तोड़ते ही क्या हुआ?
धनुष टूटते ही पंडाल ‘जय श्री राम’ के जयकारों से गूंज उठा।
इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली।
6. रामलीला देखने के लिए कौन-कौन पहुंचा?
धुरियापार और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
7. रामलीला में कलाकार कहां से आए थे?
धनुष यज्ञ महोत्सव में मंचन करने के लिए अयोध्या धाम से कलाकार आए थे।
8. धनुष यज्ञ महोत्सव में समिति की ओर से कौन-कौन मौजूद रहा?
कार्यक्रम में अध्यक्ष आधाराम कसौधन, व्यवस्थापक रिंटू शाही, महामंत्री कृष्णा गुप्ता, संरक्षक डॉ.
हरिहर राम त्रिपाठी सहित समिति के पदाधिकारी और ग्रामवासी मौजूद रहे।
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