3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर खग्रास चंद्रग्रहण लगेगा
गोरखपुर: तीन मार्च को लगेगा खग्रास चंद्रग्रहण, 50 मिनट दिखेगा दृश्य
*गोरखपुर, 25 फरवरी 2026 – फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा यानी मंगलवार, 3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण (Partial Lunar Eclipse) लगने जा रहा है। यह ग्रहण खंडग्रास चंद्रग्रहण के रूप में दिखाई देगा। विभिन्न स्थानों पर चंद्रोदय के समय चंद्रमा ग्रहण से ग्रस्त रहेगा और मोक्ष के समय तक ही ग्रहण दृश्य होगा। ग्रहण का स्पर्श और प्रारंभ भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा, लेकिन खंड चंद्रग्रहण का मोक्ष 50 मिनट तक देखा जा सकेगा। गोरखपुर में यह ग्रहण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां चंद्रोदय के साथ ही ग्रहण शुरू दिखाई देगा।
गोरखपुर में ग्रहण का समय और दृश्यता
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, जिले में चंद्रोदय मंगलवार को शाम 5 बजकर 57 मिनट पर होगा। उसी समय चंद्रमा ग्रस्त अवस्था में रहेगा। ग्रहण का मोक्ष शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। इस प्रकार यहां ग्रहण लगभग 50 मिनट तक ही दृश्य रहेगा। यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा। गोरखपुर सहित पूर्वांचल के अधिकांश इलाकों में यह ग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, बशर्ते मौसम साफ रहे।
ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव और सावधानियां
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि फाल्गुन मास में पड़ने वाला यह चंद्रग्रहण नृत्य, संगीत और कला से जुड़े लोगों, श्रेष्ठ स्त्रियों, सैनिकों तथा तपस्वियों के लिए कष्टकारक प्रभाव दे सकता है। मंगलवार को घटित होने के कारण सामाजिक अशांति की भी आशंका व्यक्त की गई है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ग्रहण काल में भोजन करने, पानी पीने या बाहर निकलने से परहेज करें।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:20 बजे से लगेगा। सूतक शुरू होते ही मंदिरों के कपाट बंद हो सकते हैं। उनका कहना था कि ग्रहण के दौरान भगवान की पूजा-अर्चना करना चाहिए। मंत्र जाप, राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्रनाम या हनुमान चालीसा का पाठ काफी लाभदायक होता है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर शुद्ध होकर पूजा करें।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें
- क्या करें: घर में रहें, मंत्र जाप करें, ध्यान करें, दान-पुण्य करें। ग्रहण के बाद स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करें।
- क्या न करें: भोजन न बनाएं, न खाएं, न पानी पिएं। ग्रहण काल में नाखून-बाल न काटें, सिलाई-कढ़ाई न करें।
- गर्भवती महिलाएं विशेष रूप से घर से बाहर न निकलें।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होगी। गोरखनाथ मंदिर,
- रामगढ़ ताल और अन्य प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है।
खग्रास चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक महत्व
यह चंद्रग्रहण तब होगा जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाएगी और
चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया का केवल एक हिस्सा पड़ेगा। इसलिए इसे खंडग्रास (Partial) कहा जाता है।
भारत में यह ग्रहण शाम के समय दिखेगा, जिससे खगोल प्रेमी और ज्योतिषी दोनों
इसे देख सकेंगे। गोरखपुर में मौसम विभाग ने कहा है कि अगर बादल न छाए तो ग्रहण स्पष्ट दिखाई देगा।
यह ग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
गोरखपुरवासियों से अपील है कि ग्रहण के नियमों का पालन करें और
शांति से समय व्यतीत करें। ग्रहण के बाद विशेष पूजा से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी।