Gorakhpur में रियल एस्टेट
रियल एस्टेट कारोबारी से करोड़ों की साइबर ठगी
Gorakhpur में फर्जी यूपीआई स्क्रीनशॉट के जरिए करीब 24 करोड़ रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। रियल एस्टेट कारोबारी और शेयर मार्केट ब्रोकर Vishwajeet Srivastava की कंपनी को कथित तौर पर गूगल-पे, फोन-पे और बैंक ट्रांजेक्शन के फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया।
मामले में कोर्ट के आदेश पर गुलरिहा पुलिस ने 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों में बिहार, झारखंड और कुशीनगर के कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
2023 से चल रहा था ठगी का खेल
पीड़ित कारोबारी के मुताबिक यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2023 में शुरू हुआ था। उनकी मुलाकात कुशीनगर निवासी सोनू जायसवाल से हुई थी। बाद में सोनू ने अपने रिश्तेदार शिवम जायसवाल से परिचय कराया।
शिवम ने खुद को दिल्ली में कमीशन आधारित मार्केटिंग का अनुभवी कारोबारी बताया और दोनों कंपनी में एजेंट के रूप में काम करने लगे। इसके बाद निवेश और लेनदेन के नाम पर बड़ा खेल शुरू हुआ।
एक रुपये भेजकर लाखों का दिखाते थे भुगतान
आरोप है कि आरोपी कंपनी के अकाउंटेंट को फर्जी यूपीआई और बैंक ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट भेजते थे। इन्हीं स्क्रीनशॉट के आधार पर कंपनी यह मान लेती थी कि रकम खाते में जमा हो गई है।
जांच में सामने आया कि आरोपी मोबाइल और लैपटॉप की मदद से नकली भुगतान रसीद तैयार करते थे। कई मामलों में एक लाख रुपये भेजने का दावा किया जाता था, लेकिन वास्तविकता में केवल एक रुपये का ट्रांजेक्शन किया जाता था।
इसके बाद एडिटेड स्क्रीनशॉट के जरिए लाखों रुपये ट्रांसफर होने का भ्रम पैदा किया जाता था।
इसी तरीके से लगातार करीब तीन महीने तक कंपनी को गुमराह किया गया।
ऑडिट में खुला करोड़ों की ठगी का राज
वित्तीय वर्ष के ऑडिट के दौरान जब खातों का मिलान किया गया तो
भारी गड़बड़ी सामने आई। जांच में पता चला कि जिन
रकमों को कंपनी के खाते में जमा माना जा रहा था, वे वास्तव में कभी ट्रांसफर ही नहीं हुई थीं।
पीड़ित कारोबारी के अनुसार जब आरोपियों से पूछताछ की गई तो
उन्होंने शुरुआत में आरोपों से इनकार किया। हालांकि दस्तावेज और रिकॉर्ड दिखाने पर
रकम लौटाने का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में पैसे वापस नहीं किए।
पुलिस कार्रवाई न होने पर कोर्ट पहुंचे पीड़ित
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने स्थानीय पुलिस और एसएसपी कार्यालय में शिकायत की थी,
लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ा।
कोर्ट के आदेश के बाद गुलरिहा पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच में जुटी हुई है।
साइबर फ्रॉड का नया तरीका बना चिंता
फर्जी यूपीआई स्क्रीनशॉट के जरिए ठगी का यह मामला
साइबर अपराध के नए और खतरनाक तरीकों को उजागर करता है।
डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ इस तरह के फर्जीवाड़े भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल स्क्रीनशॉट देखकर किसी भुगतान को सत्यापित नहीं मानना चाहिए।
हमेशा बैंक खाते में वास्तविक राशि की पुष्टि करनी चाहिए।
कारोबारियों और आम लोगों को सावधानी जरूरी
साइबर एक्सपर्ट लोगों और कारोबारियों को सलाह दे रहे हैं कि किसी भी
ऑनलाइन भुगतान को केवल मैसेज या स्क्रीनशॉट के आधार पर स्वीकार न करें।
हर लेनदेन की बैंक स्टेटमेंट और आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
